काले धन का हिसाब

  • Posted on: 30 June 2014
  • By: admin

यह संतोषजनक है कि स्विट्जरलैंड सरकार की ओर से यह कहा गया कि वह ऐसे भारतीयों की सूची बना रही है जिन पर संदेह है कि उन्होंने काला धन स्विस बैंकों में जमा कर रखा है, लेकिन देखना यह है कि ऐसी कोई सूची भारत को कब और किस रूप में हासिल होती है? नि:संदेह स्विट्जरलैंड सरकार के इस रुख से विदेश में जमा काले धन का पता लगाने की भारत की कोशिश को बल मिलेगा, लेकिन इस मामले में और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। यह भी स्पष्ट है कि केवल स्विट्जरलैंड सरकार के सहयोग भरे रुख से बात बनने वाली नहीं है, क्योंकि इस तरह के बैंक दुनिया के अन्य देशों में भी हैं और इसकी भरी-पूरी संभावना है कि वहां भी भारतीयों ने अच्छा खासा धन जमा कर रखा हो। इस धन के संदर्भ में इस तथ्य की भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि यह केवल कर चोरी के रूप में हासिल किया गया धन नहीं है। इसमें से एक अच्छा-खासा धन वह है जो अवैध और अनुचित तरीके से कमाया गया है। दुनिया के जिन देशों में बिना किसी पूछ-परख के काला धन जमा करने की सुविधा है वे मूलत: विकसित देश हैं और यह जगजाहिर है कि वे अपने दशकों पुराने गोपनीयता कानूनों की आड़ में यह जानकारी देने से बचते रहते हैं कि किन देशों के किन लोगों का किस तरीके का धन उनके बैंकों में जमा है।
नि:संदेह विकसित देश इससे अच्छी तरह परिचित हैं कि उनके यहां के निजी और सरकारी बैंकों में विदेशी लोगों का जो धन जमा है उसमें एक बड़ा हिस्सा गलत तरीके से कमाए गए धन का है, लेकिन वे ऐसी हर कोशिश का विरोध करते हैं जिससे काला धन जमा करने वाले लोगों के नाम उजागर हों और संबंधित देशों की सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कर सके। एक ओर वे दावा करते हैं कि उनके यहां किसी तरह के गलत कार्यो को सहयोग-संरक्षण नहीं दिया जाता और दूसरी ओर काले धन के मामले में वे इसके ठीक विपरीत व्यवहार करते हैं।

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