ऊंचे लोग बड़ा टैक्स

  • Posted on: 31 January 2013
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रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर और प्रधानमंत्री के प्रमुख सलाहकार सी रंगराजन ने यह कहकर कि भारी भरकम आय करने वाले अमीरों पर वर्तमान 30 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स लगाने के विकल्प पर विचार हो सकता है, नई लेकिन सार्थक बहस को जन्म दिया है। 1980 के दशक में बड़े अमीरों पर बड़ा टैक्स लगाया जाता था। आयकर की अधिकतम सीमांत दर 97 प्रतिशत तक होती थी। इसका मतलब यह था कि अगर कोई बहुत अमीर व्यक्ति 100 रुपये अतिरिक्त कमाता है तो उसे 97 रुपये तक टैक्स देना होता था। समय बदला और आज पिछले दो दशकों से लगातार घटती आयकर सीमांत दर 30 फीसद ही रह गई है। यानी आज यदि कोई अमीर व्यक्ति अतिरिक्त एक करोड़ रुपये कमाता है तो उसे मात्र 30 लाख रुपये आयकर देना होता है। पिछले दो दशकों में आयकर घटाने के संदर्भ में यह तर्क दिया गया कि दुनिया के किसी भी मुल्क में इतना टैक्स नहीं है जितना भारत में है। यह भी कहा गया कि टैक्स की दर ज्यादा होने के कारण लोग टैक्स की चोरी करते हैं। इसलिए इसकी दर घटाकर टैक्स चोरी रोकी जा सकती है और राजस्व भी बढ़ाया जा सकता है। यह तर्क काफी हद तक सही भी था। टैक्स की दरें घटाने के बाद आयकर पहले से ज्यादा मिलने लगा। वैयक्तिक आयकर की दर घटाने के साथ-साथ निगम आयकर की दर भी कम की गई। टैक्स दरें घटाने से राजस्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। 1980-81 में जहां केंद्र सरकार को 2800 करोड़ रुपये का राजस्व आयकर और निगमकर से मिलता था, वह 2011-12 तक पांच लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी 178 गुणा ज्यादा वृद्धि। इस दौरान चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय में मात्र 62 गुणा ही वृद्धि हुई। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आयकर की दरों को घटाने से राजस्व में भारी बढ़ोतरी हुई। यही नहीं, कर प्रणाली में कई ऐसे बदलाव भी किए गए जिनसे अमीरों पर कम से कम टैक्स लगे। उदाहरण के लिए आज भी प्राप्त लाभांश (डिविडेंट) पर कोई टैक्स नहीं है, हालांकि कंपनियों को वितरित लाभांश पर 16 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। आज जब आयकर की सीमांत दर 30 प्रतिशत है, लाभांश पर मात्र 16 प्रतिशत टैक्स लगाना औचित्यपूर्ण नहीं लगता। आयकर और निगमकर से राजस्व की प्राप्ति में 178 गुणा से ज्यादा बढ़ोतरी का बड़ा कारण यह है कि इस बीच आय एवं संपत्ति की असमानताएं भारी-भरकम रूप से बढ़ गई हैं। आंकड़े बताते हैं कि 1990 के दशक के प्रारंभ में राष्ट्रीय आय में मजदूरी का भाग 40 प्रतिशत था, 2010 तक घटकर मात्र 34 फीसद ही रह गया।                                                  -नवीन शर्मा

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