आधार पर भरोसा

  • Posted on: 2 November 2012
  • By: admin

आधार की दूसरी सालगिरह पर जिस तरह प्रधानमंत्री से लेकर वित्त मंत्री और सोनिया गांधी तक ने आधार कार्ड पर भरोसा जताया है, उससे साफ है कि अब तक विवादों में रहा यह कार्ड अब स्वीकार्य होता नजर आ रहा है। इसकी वजह है इसे खुद सोनिया गांधी का समर्थन हासिल होना। कार्ड की दूसरी सालगिरह पर सबसे आश्चर्यजनक रहा अब तक इसके विरोधी रहे चिदंबरम का इसके समर्थन में आ जाना। इससे साफ होता है कि नेताओं की सोच उन्हें मिले मंत्रालय भी तय करते हैं। गृह मंत्री रहते आधार कार्ड को चिदंबरम का समर्थन नहीं मिल पाया था। मूलत: योजना आयोग की इस योजना को गृह मंत्रालय ने कभी मान्यता नहीं दी। यह गृह मंत्रालय का विरोध ही था कि बैंक, हवाई अड्डे और सुरक्षा एजेंसियां तक आधार कार्ड को मान्यता देने से बचती रहीं। वैसे ऐसे कार्ड की परिकल्पना सबसे पहले गृह मंत्री रहते लालकृष्ण आडवाणी ने की थी, जिसमें एक ही कार्ड के जरिए हर एक नागरिक से जुड़े आंकड़ों और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ ही राज्य से एक वैध पहचान पाई जा सके।-तब निजता की आजादी की समर्थक संस्थाओं के साथ ही कांग्रेस भी इस योजना की विरोधी थी।
यह बात और है कि सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार की शह पर योजना आयोग ने इसे मंजूरी देने में देर नहीं लगाई। विवाद तब भी हुआ। गृह मंत्रालय के विरोध की भी आज तक आधिकारिक वापसी नहीं हो पाई है। यही वजह है कि आज भी सरकारी दफ्तर आधार कार्ड को वैध दस्तावेज और पहचान पत्र नहीं मानते। बहरहाल, नई आर्थिकी के दौर में नया विचार गरीबों को सीधे सब्सिडी देने का है। आधार कार्ड के रजिस्ट्रेशन के जरिए सरकार 23 करोड़ लोगों के आंकड़े हासिल कर ही चुकी है। योजना 2014 तक साठ करोड़ लोगों का आधार कार्ड बनाने की है। जिस तरह सोनिया गांधी से लेकर प्रधानमंत्री तक इस योजना का समर्थन कर रहे है, ये तय है कि ऐसा होना ही है।                         -नवीन शर्मा

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