Editorial

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कम हुआ भ्रष्टाचार

  • Posted on: 10 December 2014
  • By: admin

भ्रष्टाचार के स्तर का आकलन करने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया (टीआईआई) के भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में भारत की रैकिंग में सुधार दर्ज होना यकीनन एक खुशखबरी है। सूचकांक के मुताबिक वर्ष 2014 में भारत को 38 अंक मिले हैं जो वर्ष 2013 के 36 अंक के मुकाबले मामूली तौर पर ही बेहतर दिखते हैं, लेकिन इसका सुफल यह रहा है कि भ्रष्टाचार से प्रभावित देशों की सूची में पिछले वर्ष 94वें स्थान पर रहा भारत इस वर्ष 85वें स्थान पर आ गया है। खास बात यह है कि भारत की रैकिंग में सुधार मुख्य रूप से र्वल्ड इकोनॉमिक फोरम और र्वल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर दर्ज हुआ है। अच्छी बात यह भी

अतिरिक्त शिक्षण

  • Posted on: 1 December 2014
  • By: admin

बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक विद्यालयों की दुर्दशा अक्सर सुनने को मिलती है, लेकिन इस बीच एक अच्छा समाचार हरदोई जिले से आया है। यहां एक अभिनव प्रयोग किया जा रहा है। जिला स्तर पर योजना बनी है जिसमें अब बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक समन्वयक तक कुछ विद्यालयों और शिक्षकों का चयन कर रहे हैं। ये शिक्षक पिछड़े और सघन आबादी वाले चयनित विद्यालयों में कक्षा पांच से आठ तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए शाम के समय दो घंटे का अतिरिक्त समय देंगे। लोक शिक्षा केंद्रों पर पेट्रोमेक्स आदि की व्यवस्था की गई है। उद्देश्य यह है कि प्रारंभ में जिन शिक्षकों और विद्यालयों का चयन

प्रधानमंत्री का संदेश

  • Posted on: 10 November 2014
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नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचने के कारण सारे देश को यह उत्सुकता थी कि वह वहां क्या करते और कहते हैं?

गैरजिम्मेदार स्कूल

  • Posted on: 10 October 2014
  • By: admin

विवाह हो जाने के कारण छात्रा को दिल्ली के एक सरकारी स्कूल द्वारा निकाले जाने की कार्रवाई अत्यंत निंदनीय है। स्कूल की यह दलील भी बेहद आपत्तिजनक है कि शादीशुदा लड़की के स्कूल में होने से वहां का माहौल खराब होगा। उपराज्यपाल नजीब जंग के हस्तक्षेप के बाद लड़की को स्कूल में दोबारा दाखिला तो मिल गया है लेकिन घटना के बहाने यह तथ्य जरूर उजागर हो गया है कि कुछ शिक्षक अब तक अपनी रुढ़ीवादी सोच से नहीं उबर पाए हैं। इससे खराब बात और क्या होगी कि एक छात्रा का नाम केवल इसलिए स्कूल से काट दिया जाए क्योंकि उसकी शादी हो गई है। यदि विवाह को स्कूल से निकाले जाने का पैमाना मान लिया जाए तो केंद्र से लेकर तमाम राज

अव्यवस्था का आलम

  • Posted on: 17 September 2014
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दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की आवासीय योजना-2014 के एलान के साथ ही शुरू हुई अव्यवस्था चिंताजनक है। कहना न होगा कि यह प्राधिकरण की लचर कार्यप्रणाली को उजागर करती है। योजना की घोषणा के दिन ही डीडीए की वेबसाइट बार-बार क्रैश हुई और डीडीए मुख्यालय में आवेदन फॉर्म लेने पहुंचे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं कई बैंकों की शाखाओं में आवेदन फॉर्म ही नहीं पहुंचे। शनिवार को यानी योजना की शुरुआत के छह दिन बाद भी संबंधित बैंकों की कई शाखाओं में लोगों को आवेदन फॉर्म के लिए भटकना पड़ा। यह स्थिति दर्शाती है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण की तैयारियां अधूरी थीं और उसकी अधूरी तैयारियों के कारण लो

बीस लाख फ्लैट

  • Posted on: 10 September 2014
  • By: admin

निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर राजधानी में अगले 12 साल में 20 लाख फ्लैट बनाने संबंधी दिल्ली विकास प्राधिकरण की योजना स्वागतयोग्य है। नई लैंड पुलिंग पॉलिसी लाकर डीडीए निजी बिल्डरों को किसानों से सीधे जमीन खरीदकर बहुमंजिली रिहाइशी इमारतें खड़ी करने की इजाजत देने जा रहा है। यह पहला अवसर है जब राजधानी में निजी क्षेत्र को आवास के क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर निवेश करने का मौका दिया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि डीडीए ने निजी क्षेत्र के साथ हाथ मिलाने की कोशिशें पहले नहीं की हों लेकिन ऐसी हर कोशिश नाकाम रही है। ऐसे में यह उम्मीद की जानी चाहिए कि डीडीए अपनी नई पहल में कामयाब होगा और निजी क्ष

वित्तीय प्रभाव

  • Posted on: 18 August 2014
  • By: admin

संसाधनों की कमी होना नई या विचित्र बात नहीं है, लेकिन इसके कारण जब वातावरण ही नहीं, कई जीवन भी प्रभावित होते दिखें तो वे कारण ढूंढऩे आवश्यक होते हैं जिनसे ऐसी स्थिति आती है। हिमाचल प्रदेश में हालत यह हो गई है कि मेडिकल बिलों का भुगतान ही नहीं हो पा रहा है। सूचनाएं तो ऐसी हैं कि ऊंट के मुंह में जीरे जैसी स्थिति है। बुढ़ापे की दहलीज पर बैठे सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीवन पर इस बात का कितना असर हो सकता है या हो रहा है, इस पर मंथन आवश्यक है। मेडिकल बिलों के भुगतान की परिपाटी शुरू हुई थी तब क्या हालात थे और अब क्या हैं, इस पर बात होनी चाहिए और कोई राह निकाली जानी चाहिए। विषय ऐसा है कि बात साफ ह

प्रक्रिया पर फिर सवाल

  • Posted on: 12 August 2014
  • By: admin

हरियाणा में नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया को साढ़ेसाती से छुटकारा मिलने की संभावना नहीं दिखाई दे रही। औद्योगिक सुरक्षा बल के बर्खास्त कर्मचारी आंदोलन कर सरकार को झकझोरने की कोशिश कर रहे हैं। पीटीआइ के 1800 पदों पर नियुक्ति रद हो चुकी, गेस्ट टीचरों पर सरकार को अदालत में मुंह की खानी पड़ी, पीजीटी व कई अन्य पदों पर नियुक्ति को अदालत में चुनौती मिल चुकी। कई मामलों में भर्ती प्रक्रिया में धांधली, अनियमितता की शिकायत हुई जो अदालत में साबित भी हो चुकी। इसी क्रम में अब सिविल जूनियर इंजीनियर के सौ पदों पर भर्ती विवादों में आ गई है। चयन के लिए मेरिट सूची बनाने के तरीके को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है

शिक्षा का गिरता स्तर

  • Posted on: 15 July 2014
  • By: admin

 ग्रेजुएशन पार्ट-वन का परीक्षा परिणाम 25 फीसद रहना शिक्षा के गिरते स्तर का परिचायक है। पिछले पांच सालों में यह अब तक का सबसे खराब परिणाम है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य में शिक्षा का स्तर किस कदर गिर गया है। अगर अभी से इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संभाग में पढ़े-लिखे युवाओं की जमात कम होती चली जाएगी। शिक्षा के गिरते स्तर के लिए अगर सरकार को भी दोषी ठहराए तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि पिछले दस सालों में जम्मू-कश्मीर में डिग्री कॉलेज कुकरमुत्तों की तरह खोले गए। हालत यह है कि दस सालों में 45 नए कॉलेज खोल कर सरकार ने अपनी पीठ तो थपथपा ली लेकिन शिक्षा के स्तर को

काले धन का हिसाब

  • Posted on: 30 June 2014
  • By: admin

यह संतोषजनक है कि स्विट्जरलैंड सरकार की ओर से यह कहा गया कि वह ऐसे भारतीयों की सूची बना रही है जिन पर संदेह है कि उन्होंने काला धन स्विस बैंकों में जमा कर रखा है, लेकिन देखना यह है कि ऐसी कोई सूची भारत को कब और किस रूप में हासिल होती है?

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