Editorial

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वृक्ष लगाएं, हरियाली बचाएं

  • Posted on: 10 June 2015
  • By: admin

पर्यावरण दिवस के मौके पर कुछेक सरकारी घोषणाओं को छोड़ दें तो बाकी सबकुछ रस्म अदायगी के अलावा कुछ विशेष नहीं था। पर्यावरण जागरूकता को लेकर दिखी हर जगह बेचैनी कुछ उसी किस्म की थी, जैसे कुछ अरसा पहले प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता अभियान के दौरान झाड़ू उठाए जाने के बाद ऐसा लगता था मानो हर महत्वपूर्ण व्यक्ति राज्य की सफाई करके ही दम लेगा। यह सक्रियता चार दिनों की चांदनी के समान थी। पर्यावरण जागरूकता का भी वही हश्र सामने आना है, क्योंकि हर किसी के पास अनेक तरह की व्यस्तताएं और जरूरतें हैं। एक दिन पर्यावरण के नाम दे दिया, यह कम नहीं। जो काम बिलकुल सीधा, सरल और सपाट है, उसके लिए इतने ताम-झाम की जरूर

शिक्षा के नाम पर धोखा

  • Posted on: 25 May 2015
  • By: admin

शिक्षा उपलब्ध करवाने के नाम पर कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को घटिया खाद्य पदार्थो से बना भोजन परोसे जाने का मामला गहन चिंता का विषय है। यह घटना कोई दूरदराज इलाके में नहीं बल्कि जम्मू के साथ लगते सीमावर्ती आरएसपुरा में खुले नए आंगनबाड़ी केंद्रों की है। सरकार द्वारा गठित पंचायत सदस्यों के एक दल ने विगत दिवस कुछ केंद्रों में निरीक्षण किया तो सूजी, चने, मूंग की दाल की गुणवत्ता सही नहीं थी। हद तो यह है कि बच्चों को घटिया खाद्य सामग्री में बना भोजन कई सालों से मिल रहा है। मौजूद शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि खराब खाद्य सामग्री खाने से कई बार बच्चे बीमार भी पड़ जाते हैं। खाद्य सामग्री की खर

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन

  • Posted on: 25 April 2015
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अंतरराष्ट्रीय संस्था आइपीसीसी के अध्ययन के मुताबिक पिछली सदी के दौरान धरती का औसत तापमान 1.4 फॉरेनहाइट बढ़ चुका है। अगले सौ साल के दौरान इसके बढ़कर 2 से 11.5 फॉरेनहाइट होने का अनुमान है। इस तरह धीरे-धीरे पृथ्वी गर्म हो रही है। धरती के औसत तापमान में हो रही यह मामूली वृद्धि ग्र्रह की जलवायु और मौसम प्रणाली में व्यापक रूप से विनाशकारी बदलाव ला सकती है।

निजी स्कूलों में शिक्षा का खेल

  • Posted on: 25 March 2015
  • By: admin

जिस देश की परंपरागत शिक्षा प्रणाली का पूरा विश्व कायल रहा हो, विकसित देश जहां इस कोशिश में लगे हों कि गुरु-शिष्य परंपरा के केंद्र के रूप में विख्यात रहे नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय को फिर गरिमामय ढंग से जीवित किया जाए, वहां ज्ञान को व्यवसाय का घिनौना रूप देना किसी भी मायने में उचित नहीं है। बिहार की धरती को दुनिया आज भी पावन मानती है, यह भगवान बुद्ध की ज्ञान और कर्मस्थली, लिच्छवी राज्य के रूप में विश्व के पहले लोकतंत्र की जननी, सम्राट अशोक और चंद्रगुप्त मौर्य के सुशासन, आर्यभट्ट कीखगोल संबंधी खोजें और रामानुजम के शून्य के सिद्धांत के रूप में सुप्रसिद्ध है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि

पर्यावरण संरक्षण

  • Posted on: 10 March 2015
  • By: admin

ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे पर्यावरण संतुलन भी बना रहे और विकास भी हो सके। इस दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राजधानी शिमला में गोल्फ कार्ट का चलाया जाना सराहनीय कदम है। इन वाहनों से आम लोगों को यातायात की बेहतर सुविधा मिलेगी और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। अहम बात है कि इन वाहनों को महिलाएं ही चलाएंगी। राजधानी शिमला में लोगों को सबसे बड़ी समस्या यातायात की होती है। यहां पर कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर वाहन ले जाना वर्जित है। इससे बुजुर्गो, बीमार लोगों व पर्यटकों को सबसे अधिक समस्या होती थी। अब गोल्फ कार्ट चलाए जाने से इन लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। इन वाहनों में महिला

महिलाओं की सुरक्षा

  • Posted on: 25 February 2015
  • By: admin

दिल्ली में करीब ढाई सौ स्थानों का महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थलों के रूप में चयनित किया जाना राजधानी में महिलाओं की असुरक्षा की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। यह चिंताजनक है कि महिलाओं के लिए असुरक्षित इन स्थानों में खाने-पीने वाले स्थान, पार्किग, मॉल और मनोरंजन के स्थानों के आसपास के इलाके शामिल हैं। यहां अब तक सुरक्षा के कोई उपाय न किया जाना संबंधित सरकारी एजेंसियों की महिलाओं की सुरक्षा के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। यह स्थिति तब है जबकि वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म की दिल दहला देने वाली वारदात के बाद राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को काफी जोर-शोर से उठाया गया। दिल्ली हाई कोर्ट न

विकास के मायने

  • Posted on: 18 February 2015
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वास्तविक विकास कार्य उसी को कहा जा सकता है, जिसमें योजना से प्रभावित होने वाले अंतिम व्यक्ति तक का हित सर्वोपरि रहे। पहाड़ी प्रदेश हिमाचल ने अस्तित्व में आने के बाद हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम तय किए हैं। इसी का नतीजा है कि लोगों को घर-द्वार पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। प्रदेश में सड़कों का जाल बिछा है। प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों को सड़क से जोड़ा जा चुका है और कई जगह ऐसे प्रयास जारी हैं। हर गांव में स्कूल व स्वास्थ्य संस्थान खोले गए हैं। औट-लूहरी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण न केवल डेढ़ लाख लोगों को राहत देगा बल्कि एक ऐसा क्षेत्र सड़क से जुड़ जाएगा, जहां बर्फबारी के कारण सड़क य

विकास की राह

  • Posted on: 28 January 2015
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किसी भी राज्य के विकास में सड़कों का सबसे अहम योगदान होता है। इसे उत्तर प्रदेश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाला यह राज्य सड़कों के विकास में 29 राज्यों की सूची में अंतिम आठ में है। केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारों ने कुछ राष्ट्रीय राजमार्गो का निर्माण जरूर शुरू कराया था, लेकिन काम आज तक पूरा नहीं हो पाया है। सड़कों के विकास में सरकारों की गंभीरता लखनऊ-कानपुर के बीच 86 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से आंकी जा सकती है। इस राजमार्ग के चौड़ीकरण का काम वर्ष 2000 में शुरू हुआ था। यह निर्माण आज पंद्रह साल बाद भी जारी है और कह पाना मुश्किल है कि इसे प

बेहतरीन पहल

  • Posted on: 29 December 2014
  • By: admin

दुनियाभर के पशु चिकित्सक व पशु विज्ञानी इस तथ्य पर सहमत होकर इसी दिशा में काम कर रहे हैं कि मनुष्य के स्वस्थ रहने का एक महत्वपूर्ण कारक पशुधन का स्वस्थ रहना है। बेशक हिमाचल प्रदेश में भी कई जिलों में ब्लूक्रॉस सोसायटी का जिक्र सुनने को मिलता है लेकिन पशुओं की व्यवस्था कैसी है, इसे जानने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस उदास मंजर में आशा की एक किरण मंडी जिले से निकलती प्रतीत होती है। यहां पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बेजुबान मवेशियों के कल्याण के लिए ब्लूक्रॉस सोसायटी के गठन की पहल की है। रेडक्रॉस सोसायटी की तर्ज पर यह सोसायटी पशुओं की मदद के लिए संसाधन जुटाएगी व 24 घंटे

'समाजवादी आवास योजना' की शुरूआत की घोषणा

  • Posted on: 10 December 2014
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आज मध्यम आय वर्ग के लोगों का आशियाने का सपना पूरा करने के लिये 'समाजवादी आवास योजना' की शुरूआत की घोषणा की। इसके तहत वर्ष 2016 तक तीन लाख मकान बनाने का लक्ष्य है। आवास विभाग के प्रमुख सचिव सदाकान्त ने यहां संवाददाताओं को बताया कि राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में मध्यम आय वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिये 'समाजवादी आवास योजना' शुरू करने का फैसला किया गया है। इसमें अपार्टमेंट की दरें निर्धारित की गयी हैं। भविष्य में यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह योजना कब शुरू की जाएगी। प्रमुख सचिव ने बताया कि इस योजना के तहत बनाय

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