Editorial

All news from Editor

गूगल के शीर्ष पर

  • Posted on: 25 August 2015
  • By: admin

सुंदर पिच्चई के गूगल के सीईओ बनने के बाद आईटी उद्योग की सबसे बड़ी कंपनियों में से दो के शीर्ष पर भारतीय पहुंच गए हैं। इसके पहले सत्य नाडेला माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बने। सुंदर पिच्चई ने आईआईटी खडग़पुर से इंजीनियरी की पढ़ाई की है और वह पिछले 11 साल से गूगल में काम कर रहे हैं। गूगल क्रोम और मोबाइल सॉफ्टवेयर एंड्राइड बनाने वाली टीमों का नेतृत्व उन्होंने किया है। दुनिया में आईटी उद्योग में, खासकर अमेरिका की सिलिकॉन वैली में भारतीयों की बड़ी उपलब्धियों की मिसाल सुंदर पिच्चई और सत्य नाडेला हैं, लेकिन भारतीयों की उपलब्धियां इन दोनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह कहा जा सकता है कि प्रवासी भारतीय या भारती

अनूठा उपहार

  • Posted on: 10 August 2015
  • By: admin

देश को नगा समझौते का अनूठा उपहार सौंपने के लिए केंद्र सरकार खास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया। अंग्रेज जाते-जाते हमारे लिए ऐसा पेंच फंसा गए थे जिनमें हम दशकों से उलझे चल रहे थे। इस उलझन का सबसे कारण यह था कि चीन सीमा पर बसे अनूठी संस्कृति और समृद्ध परंपरा के धनी इस नार्थ-ईस्ट राज्य का देश की मुख्य भूमि से संवाद नहीं के बराबर था। हमारे मानस में अंग्रेजों ने नगा समाज की जो अराजक छवि बना दी थी उससे भी उबरने में हमें खासा वक्त लगा है। नार्थ-ईस्ट राज्यों पर कुटिल नजर रखने वाले चीन ने भी इस समस्या को उलझाए रखने में खासा पसीना बहाया है। इस इलाके के बागियों को हथियारों की सप्लाई करने में

डिजिटल क्रांति

  • Posted on: 10 July 2015
  • By: admin

सूचना क्रांति के इस जमाने में किसी देश या समाज की हैसियत जाननी हो तो बस इतना पता लगाना काफी रहेगा कि वहां सूचना संचार की व्यवस्था कितनी लोकतांत्रिक और चुस्त है। इतिहास गवाह है कि तानाशाही या सामंतशाही व्यवस्था की बुनियाद ही सूचना पर सत्ता के एकाधिकार से पनपती है। लोकतंत्र इसीलिए तो शासन का सर्वश्रेष्ठ माध्यम माना जाता है क्योंकि इसमें आम आदमी ही सूचना प्रसारण का लक्ष्य रहता है। लेकिन सात दशकों के सतत अनुभव के बावजूद अगर हमें अपने लोकतंत्र में कमियां नजर आ रही हैं तो इसके पीछे वे व्यवस्थागत खामियां ही जिम्मेदार हैं जो आम आदमी तक सूचना के स्वतंत्र प्रवाह को बाधित कर रही हैं। इस लिहाज से देखें

घर का सपना

  • Posted on: 25 June 2015
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वर्ष 2022 तक सबको आवास देने का वादा प्रधानमंत्री मोदी लगातार करते रहे हैं। अब उनकी सरकार ने इसे अमल में लाने के लिए कदम बढ़ाने शुरू किए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने फैसला लिया है कि अपनी छत का सपना देख रहे लोगों और बेहतर रिहाइश की अपेक्षा रखने वालों को जरूरत के मुताबिक बहुस्तरीय राहत दी जाएगी। इस क्रम में झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास के लिए हरेक लाभार्थी को एक लाख रपए की केंद्रीय सहायता मिलेगी। वहीं अपना घर खरीदने के इच्छुक कमजोर व निम्न आय वर्ग के लोगों को ब्याज दर में जबर्दस्त छूट मिलने वाली है। इसके अलावा पीपीपी मॉडल के तहत सस्ते घरों का निर्माण भी होगा जिसके खरीदारों को डेढ़ लाख रपए की सरकार

वृक्ष लगाएं, हरियाली बचाएं

  • Posted on: 10 June 2015
  • By: admin

पर्यावरण दिवस के मौके पर कुछेक सरकारी घोषणाओं को छोड़ दें तो बाकी सबकुछ रस्म अदायगी के अलावा कुछ विशेष नहीं था। पर्यावरण जागरूकता को लेकर दिखी हर जगह बेचैनी कुछ उसी किस्म की थी, जैसे कुछ अरसा पहले प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता अभियान के दौरान झाड़ू उठाए जाने के बाद ऐसा लगता था मानो हर महत्वपूर्ण व्यक्ति राज्य की सफाई करके ही दम लेगा। यह सक्रियता चार दिनों की चांदनी के समान थी। पर्यावरण जागरूकता का भी वही हश्र सामने आना है, क्योंकि हर किसी के पास अनेक तरह की व्यस्तताएं और जरूरतें हैं। एक दिन पर्यावरण के नाम दे दिया, यह कम नहीं। जो काम बिलकुल सीधा, सरल और सपाट है, उसके लिए इतने ताम-झाम की जरूर

शिक्षा के नाम पर धोखा

  • Posted on: 25 May 2015
  • By: admin

शिक्षा उपलब्ध करवाने के नाम पर कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को घटिया खाद्य पदार्थो से बना भोजन परोसे जाने का मामला गहन चिंता का विषय है। यह घटना कोई दूरदराज इलाके में नहीं बल्कि जम्मू के साथ लगते सीमावर्ती आरएसपुरा में खुले नए आंगनबाड़ी केंद्रों की है। सरकार द्वारा गठित पंचायत सदस्यों के एक दल ने विगत दिवस कुछ केंद्रों में निरीक्षण किया तो सूजी, चने, मूंग की दाल की गुणवत्ता सही नहीं थी। हद तो यह है कि बच्चों को घटिया खाद्य सामग्री में बना भोजन कई सालों से मिल रहा है। मौजूद शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि खराब खाद्य सामग्री खाने से कई बार बच्चे बीमार भी पड़ जाते हैं। खाद्य सामग्री की खर

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन

  • Posted on: 25 April 2015
  • By: admin

अंतरराष्ट्रीय संस्था आइपीसीसी के अध्ययन के मुताबिक पिछली सदी के दौरान धरती का औसत तापमान 1.4 फॉरेनहाइट बढ़ चुका है। अगले सौ साल के दौरान इसके बढ़कर 2 से 11.5 फॉरेनहाइट होने का अनुमान है। इस तरह धीरे-धीरे पृथ्वी गर्म हो रही है। धरती के औसत तापमान में हो रही यह मामूली वृद्धि ग्र्रह की जलवायु और मौसम प्रणाली में व्यापक रूप से विनाशकारी बदलाव ला सकती है।

निजी स्कूलों में शिक्षा का खेल

  • Posted on: 25 March 2015
  • By: admin

जिस देश की परंपरागत शिक्षा प्रणाली का पूरा विश्व कायल रहा हो, विकसित देश जहां इस कोशिश में लगे हों कि गुरु-शिष्य परंपरा के केंद्र के रूप में विख्यात रहे नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय को फिर गरिमामय ढंग से जीवित किया जाए, वहां ज्ञान को व्यवसाय का घिनौना रूप देना किसी भी मायने में उचित नहीं है। बिहार की धरती को दुनिया आज भी पावन मानती है, यह भगवान बुद्ध की ज्ञान और कर्मस्थली, लिच्छवी राज्य के रूप में विश्व के पहले लोकतंत्र की जननी, सम्राट अशोक और चंद्रगुप्त मौर्य के सुशासन, आर्यभट्ट कीखगोल संबंधी खोजें और रामानुजम के शून्य के सिद्धांत के रूप में सुप्रसिद्ध है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि

पर्यावरण संरक्षण

  • Posted on: 10 March 2015
  • By: admin

ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे पर्यावरण संतुलन भी बना रहे और विकास भी हो सके। इस दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राजधानी शिमला में गोल्फ कार्ट का चलाया जाना सराहनीय कदम है। इन वाहनों से आम लोगों को यातायात की बेहतर सुविधा मिलेगी और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। अहम बात है कि इन वाहनों को महिलाएं ही चलाएंगी। राजधानी शिमला में लोगों को सबसे बड़ी समस्या यातायात की होती है। यहां पर कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर वाहन ले जाना वर्जित है। इससे बुजुर्गो, बीमार लोगों व पर्यटकों को सबसे अधिक समस्या होती थी। अब गोल्फ कार्ट चलाए जाने से इन लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। इन वाहनों में महिला

महिलाओं की सुरक्षा

  • Posted on: 25 February 2015
  • By: admin

दिल्ली में करीब ढाई सौ स्थानों का महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थलों के रूप में चयनित किया जाना राजधानी में महिलाओं की असुरक्षा की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। यह चिंताजनक है कि महिलाओं के लिए असुरक्षित इन स्थानों में खाने-पीने वाले स्थान, पार्किग, मॉल और मनोरंजन के स्थानों के आसपास के इलाके शामिल हैं। यहां अब तक सुरक्षा के कोई उपाय न किया जाना संबंधित सरकारी एजेंसियों की महिलाओं की सुरक्षा के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। यह स्थिति तब है जबकि वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म की दिल दहला देने वाली वारदात के बाद राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को काफी जोर-शोर से उठाया गया। दिल्ली हाई कोर्ट न

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