Editorial

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वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर जरूरी चिंतन

  • Posted on: 10 December 2015
  • By: admin
उद्योग व कारोबार जगत के बड़े नामों के साथ बैठकर विचार-विमर्श की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तब की थी, जब अर्थव्यवस्था की विकास दर गिरने लगी थी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 15 महीनों के कार्यकाल के बाद ऐसी बैठक तब बुलाई, जब आर्थिक क्षितिज पर आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हैं। किंतु फर्क यह है कि डॉ.

गरीबी का बढ़ता दंश

  • Posted on: 25 November 2015
  • By: admin
एक ओर देश दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपना नाम शुमार कराने के लिए बेताब दिख रहा है, यहां करोड़पतियों, अरबपतियों की संख्या में भी हर साल इजाफा हो रहा है लेकिन दूसरी ओर गरीबी के बढ़ते आंकड़े इस चमकदार तस्वीर को स्याह करते नजर आते हैं। विश्व बैंक ने ''शॉक वेब्स: मैनेजिंग द इंपेक्ट ऑफ क्लाइमेट चेंज ऑन पॉवर्टी' नाम की अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि भारत में 2030 तक साढ़े चार करोड़ ऐसे लोग गरीबों की पंक्ति में खड़े हो जाएंगे जो अब तक गरीब नहीं माने जाते हैं। रिपोर्ट में इसका प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में गलोबल वार्मिग के कारण हो र

शुभ दीपावली

  • Posted on: 10 November 2015
  • By: admin
दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। दीपावली शब्द 'दीप' एवं 'आवली' की संधि से बना है। आवली अर्थात पंक्ति। इस प्रकार दीपावली शब्द का अर्थ है, दीपों की पंक्ति। भारतवर्ष में मनाए जानेवाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' अर्थात् 'अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर गमन'

भारत की जलवायु योजना

  • Posted on: 10 October 2015
  • By: admin
भारत ने ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के स्वयं-निर्धारित लक्ष्य घोषित कर दिए हैं। इनमें दो खास बातें हैं। 2030 तक देश के ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 2005 के स्तर की तुलना में 33-35 फीसदी कटौती की जाएगी। और उस समय तक देश में कुल बिजली खपत का 40 फीसदी हिस्सा गैर-जीवाश्म (नॉन फॉसिल) स्रोतों से प्राप्त किया जाएगा। भारतीय योजना को तैयार करने वाले दल के प्रमुख और जाने-माने अर्थशास्त्री किरित पारिख ने कहा है कि ये दोनों लक्ष्य हासिल हो सकते हैं, बशर्ते विकसित देश जरूरी तकनीक और धन उपलब्ध कराएं। लेकिन यही शर्त है, जो नई अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधि के लिए 30 नवंबर से पेरिस में आरंभ होन

वैश्वि· आर्थि· चुनौतियों पर जरूरी चिंतन

  • Posted on: 25 September 2015
  • By: admin
उद्योग व कारोबार जगत के बड़े नामों के साथ बैठकर विचार-विमर्श की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तब की थी, जब अर्थव्यवस्था की विकास दर गिरने लगी थी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 15 महीनों के कार्यकाल के बाद ऐसी बैठक तब बुलाई, जब आर्थिक क्षितिज पर आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हैं। 

सम्पाद्कीय: महंगे स्कूलों का दौर

  • Posted on: 10 September 2015
  • By: Naveen Sharma

महंगी और असमानता का भाव पैदा करने वाली शिक्षा प्रणाली के विस्तार को रोकने के लिए अदालत से निकली एक माकूल व्यवस्था का असर पडऩा शुरू हो गया है। पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह कहा था कि सरकारी कर्मचारियों को अपने बच्चों को निजी स्कूलों में नहीं भेजना चाहिए, सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाना चाहिए। कोर्ट ने फैसले में यह भी कहा था कि जज भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाएं। कोर्ट के निर्णय से आशय तो यही निकलता है कि देश में सरकारी विद्यालयों की दशा सुधारने के साथ समान शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। शिक्षा के आईने में झांककर देखें तो अस्सी के दश

गूगल के शीर्ष पर

  • Posted on: 25 August 2015
  • By: admin

सुंदर पिच्चई के गूगल के सीईओ बनने के बाद आईटी उद्योग की सबसे बड़ी कंपनियों में से दो के शीर्ष पर भारतीय पहुंच गए हैं। इसके पहले सत्य नाडेला माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बने। सुंदर पिच्चई ने आईआईटी खडग़पुर से इंजीनियरी की पढ़ाई की है और वह पिछले 11 साल से गूगल में काम कर रहे हैं। गूगल क्रोम और मोबाइल सॉफ्टवेयर एंड्राइड बनाने वाली टीमों का नेतृत्व उन्होंने किया है। दुनिया में आईटी उद्योग में, खासकर अमेरिका की सिलिकॉन वैली में भारतीयों की बड़ी उपलब्धियों की मिसाल सुंदर पिच्चई और सत्य नाडेला हैं, लेकिन भारतीयों की उपलब्धियां इन दोनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह कहा जा सकता है कि प्रवासी भारतीय या भारती

अनूठा उपहार

  • Posted on: 10 August 2015
  • By: admin

देश को नगा समझौते का अनूठा उपहार सौंपने के लिए केंद्र सरकार खास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया। अंग्रेज जाते-जाते हमारे लिए ऐसा पेंच फंसा गए थे जिनमें हम दशकों से उलझे चल रहे थे। इस उलझन का सबसे कारण यह था कि चीन सीमा पर बसे अनूठी संस्कृति और समृद्ध परंपरा के धनी इस नार्थ-ईस्ट राज्य का देश की मुख्य भूमि से संवाद नहीं के बराबर था। हमारे मानस में अंग्रेजों ने नगा समाज की जो अराजक छवि बना दी थी उससे भी उबरने में हमें खासा वक्त लगा है। नार्थ-ईस्ट राज्यों पर कुटिल नजर रखने वाले चीन ने भी इस समस्या को उलझाए रखने में खासा पसीना बहाया है। इस इलाके के बागियों को हथियारों की सप्लाई करने में

डिजिटल क्रांति

  • Posted on: 10 July 2015
  • By: admin

सूचना क्रांति के इस जमाने में किसी देश या समाज की हैसियत जाननी हो तो बस इतना पता लगाना काफी रहेगा कि वहां सूचना संचार की व्यवस्था कितनी लोकतांत्रिक और चुस्त है। इतिहास गवाह है कि तानाशाही या सामंतशाही व्यवस्था की बुनियाद ही सूचना पर सत्ता के एकाधिकार से पनपती है। लोकतंत्र इसीलिए तो शासन का सर्वश्रेष्ठ माध्यम माना जाता है क्योंकि इसमें आम आदमी ही सूचना प्रसारण का लक्ष्य रहता है। लेकिन सात दशकों के सतत अनुभव के बावजूद अगर हमें अपने लोकतंत्र में कमियां नजर आ रही हैं तो इसके पीछे वे व्यवस्थागत खामियां ही जिम्मेदार हैं जो आम आदमी तक सूचना के स्वतंत्र प्रवाह को बाधित कर रही हैं। इस लिहाज से देखें

घर का सपना

  • Posted on: 25 June 2015
  • By: admin

वर्ष 2022 तक सबको आवास देने का वादा प्रधानमंत्री मोदी लगातार करते रहे हैं। अब उनकी सरकार ने इसे अमल में लाने के लिए कदम बढ़ाने शुरू किए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने फैसला लिया है कि अपनी छत का सपना देख रहे लोगों और बेहतर रिहाइश की अपेक्षा रखने वालों को जरूरत के मुताबिक बहुस्तरीय राहत दी जाएगी। इस क्रम में झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास के लिए हरेक लाभार्थी को एक लाख रपए की केंद्रीय सहायता मिलेगी। वहीं अपना घर खरीदने के इच्छुक कमजोर व निम्न आय वर्ग के लोगों को ब्याज दर में जबर्दस्त छूट मिलने वाली है। इसके अलावा पीपीपी मॉडल के तहत सस्ते घरों का निर्माण भी होगा जिसके खरीदारों को डेढ़ लाख रपए की सरकार

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