Editorial

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हमारे शहरों को स्वच्छ बनाने की चुनौती

  • Posted on: 25 February 2016
  • By: admin
देश के 73 शहरों में हुए स्वच्छता सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट में वाराणसी नीचे से नौवें (यानी 65वें) स्थान पर आया। मतलब यह कि वहां के प्रशासन में वाराणसी को स्वच्छ बनाने की ऐसी उत्कंठा नहीं जगी, जिससे यह शहर देश के लिए अनुकरणीय बनता। यह नतीजा बताता है कि शहरों को स्वच्छ बनाना कितनी बड़ी चुनौती है। सफाई के इंतजाम करना और लोगों की आदत बदलना इस मकसद के दो खास पहलू हैं। खासकर उन शहरों में, जो इन दोनों कसौटियों पर पिछड़े रहे हैं।
 

नेट न्यूट्रैलिटी के समर्थन में ट्राई

  • Posted on: 10 February 2016
  • By: admin
फेसबुक के फ्री इंटरनेट बेसिक और एयरटेल के एयरटेस जीरो स्कीम को तगड़ा झटका देते हुए भारतीय टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) ने भारत में इंटरनेट डाटा के लिए अलग-अलग चार्ज को नामंजूर कर दिया है। कंपनियों द्वारा अलग-अलग चार्ज लेने पर 50 हजार रुपए प्रतिदिन की दर से अधिकतम 50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
 

उम्मीदों व आशाओं का राष्ट्रीय पर्व

  • Posted on: 25 January 2016
  • By: admin
हम अपने घर में चैन से इसीलिए रह पाते हैं क्यूंकि हमारे घर में हमारी मर्जी चलती है. हम जो चाहते हैं अपने घर में कर पाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि हमारे घर में हमारे अपने कानून और नियम होते हैं. इसी तरह एक देश की आजादी उसका संविधान नियंत्रित करता है. देश तभी जाकर पूर्ण आजाद माना जाता है जब वह गणतांत्रिक होता है. आज भारत की संप्रभुता, गर्व, नागरिक उन्नयन व लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिवस मनाया जा रहा है. 26 जनवरी, 1950 को ही देश के संविधान को लागू किया गया था. तब से आज तक इस दिन को देश गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाता है.

आगे बढऩे का साल

  • Posted on: 10 January 2016
  • By: admin
हर साल शुभकामनाओं और उम्मीदों के साथ शुरू होता है, और इस नए साल से भी कई उम्मीदें हैं। हालांकि 2015 से जितनी उम्मीदें थीं, वे सारी पूरी नहीं हुईं, लेकिन हम आगे बढ़े हैं। 2016 से हमारी सबसे बड़ी उम्मीद तो यह होगी कि पिछले दो साल से जो मानसून गड़बड़ कर रहा है, वह इस साल न हो और इस साल बारिश अच्छी हो। यह उम्मीद इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि जब से मानसून का रिकॉर्ड रखने की शुरुआत हुई है, तब से अब तक कभी लगातार तीन साल तक मानसून खराब नहीं रहा।  अल नीनो का प्रभाव भी अब कम हो जाएगा और अच्छी बारिश होगी, तो देश के लिए बहुत राहत की बात होगी। सचमुच राहत की बात तो तब होगी, जब जल प्रबंधन और सिंचाई का इं

मौसम से शुरुआत

  • Posted on: 25 December 2015
  • By: admin
यह माना जाता है कि मौसम के बारे में सबसे ज्यादा वार्तालाप अंग्रेज करते हैं। सबसे ज्यादा यानी सबसे ज्यादा बार, क्योंकि अंग्रेज कम बोलने के लिए जाने जाते हैं और अक्सर मौसम की बात से वे शुरू इसलिए करते हैं, ताकि बातचीत आगे बढ़े और बदतमीजी भी न मालूम दे। अंग्रेजों की मौसम की बात इस तरह होती है- 'ठंड है।' जवाब में यह उम्मीद की जाती है कि सामने वाला स्वीकार में सिर्फ सिर हिलाकर 'हूं' कहेगा। इस आदान-प्रदान से दोनों अंदाजा लगा लेते हैं कि और आगे बात करने में सामने वाले की कितनी दिलचस्पी है?

वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर जरूरी चिंतन

  • Posted on: 10 December 2015
  • By: admin
उद्योग व कारोबार जगत के बड़े नामों के साथ बैठकर विचार-विमर्श की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तब की थी, जब अर्थव्यवस्था की विकास दर गिरने लगी थी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 15 महीनों के कार्यकाल के बाद ऐसी बैठक तब बुलाई, जब आर्थिक क्षितिज पर आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हैं। किंतु फर्क यह है कि डॉ.

गरीबी का बढ़ता दंश

  • Posted on: 25 November 2015
  • By: admin
एक ओर देश दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपना नाम शुमार कराने के लिए बेताब दिख रहा है, यहां करोड़पतियों, अरबपतियों की संख्या में भी हर साल इजाफा हो रहा है लेकिन दूसरी ओर गरीबी के बढ़ते आंकड़े इस चमकदार तस्वीर को स्याह करते नजर आते हैं। विश्व बैंक ने ''शॉक वेब्स: मैनेजिंग द इंपेक्ट ऑफ क्लाइमेट चेंज ऑन पॉवर्टी' नाम की अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि भारत में 2030 तक साढ़े चार करोड़ ऐसे लोग गरीबों की पंक्ति में खड़े हो जाएंगे जो अब तक गरीब नहीं माने जाते हैं। रिपोर्ट में इसका प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में गलोबल वार्मिग के कारण हो र

शुभ दीपावली

  • Posted on: 10 November 2015
  • By: admin
दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। दीपावली शब्द 'दीप' एवं 'आवली' की संधि से बना है। आवली अर्थात पंक्ति। इस प्रकार दीपावली शब्द का अर्थ है, दीपों की पंक्ति। भारतवर्ष में मनाए जानेवाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' अर्थात् 'अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर गमन'

भारत की जलवायु योजना

  • Posted on: 10 October 2015
  • By: admin
भारत ने ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के स्वयं-निर्धारित लक्ष्य घोषित कर दिए हैं। इनमें दो खास बातें हैं। 2030 तक देश के ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 2005 के स्तर की तुलना में 33-35 फीसदी कटौती की जाएगी। और उस समय तक देश में कुल बिजली खपत का 40 फीसदी हिस्सा गैर-जीवाश्म (नॉन फॉसिल) स्रोतों से प्राप्त किया जाएगा। भारतीय योजना को तैयार करने वाले दल के प्रमुख और जाने-माने अर्थशास्त्री किरित पारिख ने कहा है कि ये दोनों लक्ष्य हासिल हो सकते हैं, बशर्ते विकसित देश जरूरी तकनीक और धन उपलब्ध कराएं। लेकिन यही शर्त है, जो नई अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधि के लिए 30 नवंबर से पेरिस में आरंभ होन

वैश्वि· आर्थि· चुनौतियों पर जरूरी चिंतन

  • Posted on: 25 September 2015
  • By: admin
उद्योग व कारोबार जगत के बड़े नामों के साथ बैठकर विचार-विमर्श की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तब की थी, जब अर्थव्यवस्था की विकास दर गिरने लगी थी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 15 महीनों के कार्यकाल के बाद ऐसी बैठक तब बुलाई, जब आर्थिक क्षितिज पर आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हैं। 

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