Editorial

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रहीमन पानी राखिये

  • Posted on: 10 May 2016
  • By: admin

रहीमन पानी राखिये बिन पानी सब सूनये कहावत पूर्व में जितनी प्रासंगिक रही होगी आज उससे भी अधिक मौंजू नजऱ आती है। आज सुन्दर गृहिणियों के चेहरे का पानी हौद में पानी भरने के चक्कर में लुप्त होता जा रहा है। जिन घरों में पानी है, वहां का रहन-सहन अन्य लोगों से भिन्न है। आज मेरे शहर में चूहे पर विराजमान गणोश या उल्लू पर बैठी लक्ष्मी उतने प्रासंगिक नहीं हैं, जितना प्रासंगिक टैंकर और उस पर विराजमान ड्राइवर है। हाई प्रोफाइल महिलाओं से लेकर सामान्य गृहिणियों का जमघट जब टैंकर आने से इसके ईर्द-गिर्द एकत्र होता है तब टैंकर का प्रभारी ये ड्राइवर अनायास ''कान्हा' सा प्रतीत होने लगता है। जैसे गोपियों के मध्य

गरीबी से मिलेगी निजात

  • Posted on: 25 April 2016
  • By: admin

अगले सोलह वर्षो में भारत गरीब देश नहीं रह जाएगा बशत्रे दस फीसद की विकास दर हासिल करते हुए 100 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाए। उत्साह से सराबोर कर देने वाला यह आकलन है नीति आयोग का। नई दिल्ली में लोक सेवा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री तथा बड़ी संख्या में उपस्थित लोक सेवा अधिकारियों की मौजूदगी में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अमिताभ कांत ने ''सचिवों के समूह की रिपोर्ट' में यह आशावाद जतलाया। दरअसल, गरीबी से निजात पाने के लिए आवश्यक है कि नित बढ़ती आबादी की बुनियादी जरूरतें पूरी होने के साथही उनका रहन-सहन भी बेहतर हो। ऐसा लोगों की आय में इजाफा होने से ही संभव हो सकता है, जिसके लिए

सस्ते कर्ज की राह

  • Posted on: 10 April 2016
  • By: admin

अभी तक आम आदमी के लिए आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती के कोई खास मायने नहीं होते थे। समीक्षा में दरों में कटौती होने पर इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि बैंक कर्ज सस्ता करेंगे अथवा नहीं। लेकिन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने बैंकों की इस मनमानी पर काफी हद तक अंकुश लगाने में काफी हद तक कामयाब दिख रहे हैं। अपने टेक्नोक्रेट ज्ञान का बखूबी इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कर्ज की ब्याज दरें निर्धारित करने का एक उपयोगी तंत्र लागू किया है। इसमें कर्ज की ब्याज दरें फंड की न्यूनतम लागत के आधार पर निर्धारित की जाएंगी। आरबीआई के निर्देश पर यह व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो गई है। देश के तमाम

शिक्षा का मूल्य

  • Posted on: 25 March 2016
  • By: admin

आईआईटी की स्थायी समिति ने छात्रों की फीस में दो सौ प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की सिफारिश की है, यानी अगर स्थायी समिति की सिफारिश मान ली गई, तो फीस 90,000 रुपये से बढ़कर तीन लाख रुपये हो जाएगी। आईआईटी प्रबंधन का मानना है कि जहां तक हो सके, आईआईटी को अपना खर्च खुद निकालना चाहिए। फीस तीन लाख हो जाने पर आईआईटी का लगभग 60 प्रतिशत खर्च फीस से ही निकल आएगा। समिति का कहना है कि आईआईटी छात्रों के लिए वजीफे और शिक्षा के लिए कर्ज की इतनी व्यवस्था होगी कि आर्थिक वजह से किसी गरीब छात्र को आईआईटी की पढ़ाई से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। हालांकि अब भी संदेह है कि फीस इतनी बढ़ेगी। फीस बढ़ाने का आखिरी फैसला मा

सवाल एक तिहाई का

  • Posted on: 10 March 2016
  • By: admin

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस महिला दिवस पर एक बार फिर स्त्री-अधिकारों के प्रति सचेत किया है। हमारा लोकतंत्र लगातार वंचित वर्ग को सकारात्मक भेदभाव की नीति के तहत अधिकार संपन्न करके राज्य की व्यवस्था में सभी लोगों की सहभागिता तय करने की ओर बढ़ता है। यह भी तय है कि पुरु ष प्रधान समाज में सबसे बड़ा वंचित वर्ग स्त्रियों का ही है। आजादी की लड़ाई के समय भी जब हमारी राष्ट्रीयता की व्याख्या तरह-तरह से करने की प्रक्रिया चल रही थी। अधिक से अधिक अधिकारविहीन वर्ग को आत्मसात करने की प्रक्रिया कई स्तरों पर चल रही थी। तब भी आजादी के लगभग सभी आख्यानों में स्त्री जाति को सबसे वंचित माना गया था। उसके लिए दल

हमारे शहरों को स्वच्छ बनाने की चुनौती

  • Posted on: 25 February 2016
  • By: admin
देश के 73 शहरों में हुए स्वच्छता सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट में वाराणसी नीचे से नौवें (यानी 65वें) स्थान पर आया। मतलब यह कि वहां के प्रशासन में वाराणसी को स्वच्छ बनाने की ऐसी उत्कंठा नहीं जगी, जिससे यह शहर देश के लिए अनुकरणीय बनता। यह नतीजा बताता है कि शहरों को स्वच्छ बनाना कितनी बड़ी चुनौती है। सफाई के इंतजाम करना और लोगों की आदत बदलना इस मकसद के दो खास पहलू हैं। खासकर उन शहरों में, जो इन दोनों कसौटियों पर पिछड़े रहे हैं।
 

नेट न्यूट्रैलिटी के समर्थन में ट्राई

  • Posted on: 10 February 2016
  • By: admin
फेसबुक के फ्री इंटरनेट बेसिक और एयरटेल के एयरटेस जीरो स्कीम को तगड़ा झटका देते हुए भारतीय टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) ने भारत में इंटरनेट डाटा के लिए अलग-अलग चार्ज को नामंजूर कर दिया है। कंपनियों द्वारा अलग-अलग चार्ज लेने पर 50 हजार रुपए प्रतिदिन की दर से अधिकतम 50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
 

उम्मीदों व आशाओं का राष्ट्रीय पर्व

  • Posted on: 25 January 2016
  • By: admin
हम अपने घर में चैन से इसीलिए रह पाते हैं क्यूंकि हमारे घर में हमारी मर्जी चलती है. हम जो चाहते हैं अपने घर में कर पाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि हमारे घर में हमारे अपने कानून और नियम होते हैं. इसी तरह एक देश की आजादी उसका संविधान नियंत्रित करता है. देश तभी जाकर पूर्ण आजाद माना जाता है जब वह गणतांत्रिक होता है. आज भारत की संप्रभुता, गर्व, नागरिक उन्नयन व लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिवस मनाया जा रहा है. 26 जनवरी, 1950 को ही देश के संविधान को लागू किया गया था. तब से आज तक इस दिन को देश गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाता है.

आगे बढऩे का साल

  • Posted on: 10 January 2016
  • By: admin
हर साल शुभकामनाओं और उम्मीदों के साथ शुरू होता है, और इस नए साल से भी कई उम्मीदें हैं। हालांकि 2015 से जितनी उम्मीदें थीं, वे सारी पूरी नहीं हुईं, लेकिन हम आगे बढ़े हैं। 2016 से हमारी सबसे बड़ी उम्मीद तो यह होगी कि पिछले दो साल से जो मानसून गड़बड़ कर रहा है, वह इस साल न हो और इस साल बारिश अच्छी हो। यह उम्मीद इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि जब से मानसून का रिकॉर्ड रखने की शुरुआत हुई है, तब से अब तक कभी लगातार तीन साल तक मानसून खराब नहीं रहा।  अल नीनो का प्रभाव भी अब कम हो जाएगा और अच्छी बारिश होगी, तो देश के लिए बहुत राहत की बात होगी। सचमुच राहत की बात तो तब होगी, जब जल प्रबंधन और सिंचाई का इं

मौसम से शुरुआत

  • Posted on: 25 December 2015
  • By: admin
यह माना जाता है कि मौसम के बारे में सबसे ज्यादा वार्तालाप अंग्रेज करते हैं। सबसे ज्यादा यानी सबसे ज्यादा बार, क्योंकि अंग्रेज कम बोलने के लिए जाने जाते हैं और अक्सर मौसम की बात से वे शुरू इसलिए करते हैं, ताकि बातचीत आगे बढ़े और बदतमीजी भी न मालूम दे। अंग्रेजों की मौसम की बात इस तरह होती है- 'ठंड है।' जवाब में यह उम्मीद की जाती है कि सामने वाला स्वीकार में सिर्फ सिर हिलाकर 'हूं' कहेगा। इस आदान-प्रदान से दोनों अंदाजा लगा लेते हैं कि और आगे बात करने में सामने वाले की कितनी दिलचस्पी है?

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