Editorial

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शहरीकरण से दूर होगी गरीबी?

  • Posted on: 25 July 2016
  • By: admin

पिछले महीने पुणे में स्मार्ट सिटी परियोजना का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शहरीकरण को समस्या नहीं, बल्कि गरीबी दूर करने का एक अवसर माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी में गरीबी कम करने की क्षमता है, तो वह हमारे शहर हैं, क्योंकि वहां काम के अवसर हैं. यही वजह है कि गरीब गांवों से निकल कर शहरों में जाते हैं. लेकिन, क्या यह सच है? क्या सचमुच शहरीकरण से गरीबी दूर हो सकती है? विश्व-बैंक तथ्यों के आधार पर दावा करता है कि शहरीकरण की वजह से चीन, भारत, कई अफ्रीकी व दक्षिण-अमेरिकी देशों में जीवन-स्तर सुधरा है.

भारत में मानव पूंजी

  • Posted on: 10 July 2016
  • By: admin

भारत विश्व मानव पूंजी सूचकांक में गिरकर 105वें स्थान पर पहुंच गया है। यह सूचकांक वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम (डब्लूईएफ) जारी करता है। 2013 में इसमें भारत 78वें नंबर पर था। पिछले साल 124 देशों की सूची में वह 100वें स्थान पर पहुंच गया। फिलहाल जी-20 के सदस्य देशों के बीच वह सबसे निचले पायदान पर है। यह स्थिति न सिर्फ निराशाजनक, बल्कि चिंता पैदा करने वाली भी है। यह बताती है कि अगर विकसित अथवा उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में भारत को प्रतिष्ठा प्राप्त करनी है, तो इसके लिए यहां काफी कुछ करने की जरूरत है। डब्लूईएफ शिक्षा, रोजगार और श्रमशक्ति की गतिशीलता से संबंधित आंकड़ों को सम्मिलित करते हुए यह सूचकांक

मनुष्य के सुखमय जीवन का आधार है योग

  • Posted on: 25 June 2016
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पिछले साल दुनिया भर के 191 देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह मनाया गया था जिसमें 47 इस्लामी देश शामिल थे। इस बार भी इस दिन दुनियाभर के करोड़ों लोग अपने अपने देशों में योग करेंगे। पिछले साल इसी दिन 40 हजार लोगों ने राजपथ पर एक साथ योग किया था जिसकी पूरी दुनिया में चर्चा हुई थी। योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया को कहा जाता है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। यह शब्द, प्रक्रिया और धारणा बौद्ध, जैन और हिन्दू धर्मों में ध्यान प्रक्रिया से सम्बन्धित है।

ज्वैलरी कारोबार में 'कालेधन' का प्रवाह

  • Posted on: 10 June 2016
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संभावना व्यक्त की जा रही है कि टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीएसएस) के अन्तर्गत ज्वैलरी उद्योग को दी जाने वाली विशेष रियायत के बारे में डॉ.

ऑनलाइन से दूर होना अब आसान नहीं

  • Posted on: 25 May 2016
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वर्चुअल दुनिया से दूर रहने को आजकल समझदारी की तरह से पेश किया जाता है। माना जाता है कि इंसान के लिए अच्छा है। इससे उसे अपना आत्मविश्वास, अपनी आजादी और अपनी रचनात्मकता वापस मिल जाती है। दूसरी, ऑनलाइन चीजों पर उसकी निर्भरता कम हो जाती है। इससे हम ज्यादा बेहतर ढंग से फोकस कर पाते हैं और रिश्तों को निभा पाते हैं। फ्रांस में लोगों को डिस्कनेक्ट रहने का अधिकार देने की बात चल रही है। मांग की जा रही है कि कर्मचारियों, खासकर तकनीकी कंपनियों में काम करने वालों को शनिवार और इतवार को ई-मेल से दूर रहने की इजाजत मिलनी चाहिए। वहां की ट्रेड यूनियनों के लिए यह बड़ा मुद्दा बन चुका है।

रहीमन पानी राखिये

  • Posted on: 10 May 2016
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रहीमन पानी राखिये बिन पानी सब सूनये कहावत पूर्व में जितनी प्रासंगिक रही होगी आज उससे भी अधिक मौंजू नजऱ आती है। आज सुन्दर गृहिणियों के चेहरे का पानी हौद में पानी भरने के चक्कर में लुप्त होता जा रहा है। जिन घरों में पानी है, वहां का रहन-सहन अन्य लोगों से भिन्न है। आज मेरे शहर में चूहे पर विराजमान गणोश या उल्लू पर बैठी लक्ष्मी उतने प्रासंगिक नहीं हैं, जितना प्रासंगिक टैंकर और उस पर विराजमान ड्राइवर है। हाई प्रोफाइल महिलाओं से लेकर सामान्य गृहिणियों का जमघट जब टैंकर आने से इसके ईर्द-गिर्द एकत्र होता है तब टैंकर का प्रभारी ये ड्राइवर अनायास ''कान्हा' सा प्रतीत होने लगता है। जैसे गोपियों के मध्य

गरीबी से मिलेगी निजात

  • Posted on: 25 April 2016
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अगले सोलह वर्षो में भारत गरीब देश नहीं रह जाएगा बशत्रे दस फीसद की विकास दर हासिल करते हुए 100 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाए। उत्साह से सराबोर कर देने वाला यह आकलन है नीति आयोग का। नई दिल्ली में लोक सेवा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री तथा बड़ी संख्या में उपस्थित लोक सेवा अधिकारियों की मौजूदगी में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अमिताभ कांत ने ''सचिवों के समूह की रिपोर्ट' में यह आशावाद जतलाया। दरअसल, गरीबी से निजात पाने के लिए आवश्यक है कि नित बढ़ती आबादी की बुनियादी जरूरतें पूरी होने के साथही उनका रहन-सहन भी बेहतर हो। ऐसा लोगों की आय में इजाफा होने से ही संभव हो सकता है, जिसके लिए

सस्ते कर्ज की राह

  • Posted on: 10 April 2016
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अभी तक आम आदमी के लिए आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती के कोई खास मायने नहीं होते थे। समीक्षा में दरों में कटौती होने पर इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि बैंक कर्ज सस्ता करेंगे अथवा नहीं। लेकिन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने बैंकों की इस मनमानी पर काफी हद तक अंकुश लगाने में काफी हद तक कामयाब दिख रहे हैं। अपने टेक्नोक्रेट ज्ञान का बखूबी इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कर्ज की ब्याज दरें निर्धारित करने का एक उपयोगी तंत्र लागू किया है। इसमें कर्ज की ब्याज दरें फंड की न्यूनतम लागत के आधार पर निर्धारित की जाएंगी। आरबीआई के निर्देश पर यह व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो गई है। देश के तमाम

शिक्षा का मूल्य

  • Posted on: 25 March 2016
  • By: admin

आईआईटी की स्थायी समिति ने छात्रों की फीस में दो सौ प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की सिफारिश की है, यानी अगर स्थायी समिति की सिफारिश मान ली गई, तो फीस 90,000 रुपये से बढ़कर तीन लाख रुपये हो जाएगी। आईआईटी प्रबंधन का मानना है कि जहां तक हो सके, आईआईटी को अपना खर्च खुद निकालना चाहिए। फीस तीन लाख हो जाने पर आईआईटी का लगभग 60 प्रतिशत खर्च फीस से ही निकल आएगा। समिति का कहना है कि आईआईटी छात्रों के लिए वजीफे और शिक्षा के लिए कर्ज की इतनी व्यवस्था होगी कि आर्थिक वजह से किसी गरीब छात्र को आईआईटी की पढ़ाई से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। हालांकि अब भी संदेह है कि फीस इतनी बढ़ेगी। फीस बढ़ाने का आखिरी फैसला मा

सवाल एक तिहाई का

  • Posted on: 10 March 2016
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस महिला दिवस पर एक बार फिर स्त्री-अधिकारों के प्रति सचेत किया है। हमारा लोकतंत्र लगातार वंचित वर्ग को सकारात्मक भेदभाव की नीति के तहत अधिकार संपन्न करके राज्य की व्यवस्था में सभी लोगों की सहभागिता तय करने की ओर बढ़ता है। यह भी तय है कि पुरु ष प्रधान समाज में सबसे बड़ा वंचित वर्ग स्त्रियों का ही है। आजादी की लड़ाई के समय भी जब हमारी राष्ट्रीयता की व्याख्या तरह-तरह से करने की प्रक्रिया चल रही थी। अधिक से अधिक अधिकारविहीन वर्ग को आत्मसात करने की प्रक्रिया कई स्तरों पर चल रही थी। तब भी आजादी के लगभग सभी आख्यानों में स्त्री जाति को सबसे वंचित माना गया था। उसके लिए दल

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