Editorial

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इंटरनेट एडिक्शन

  • Posted on: 10 October 2016
  • By: admin

विज्ञान ने हमें जहाँ बहुत सी सहुलियत दी है वहीं मानव को उनके दुरूपयोग से बड़ा नुकसान भी हो रहा है। मोबाइल फोन मानव के लिये बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ है जिसे कोडलैस होने की वजह से कहीं भी ले जाया जा सकता है और आवश्यकतानुसार कहीं से भी बात हो सकती है। नवीनतम मोबाइल में तो इंटरनेट की सुविधा के अलावा दूसरों का फोटो लेने के साथ स्वयं का फोटो (सेल्फी) लेने की भी सुविधा है। लेकिन देखा जा रहा है कि आज का युवा वर्ग मोबाइल की सुविधाओं का जरूरत से ज्यादा उपयोग करने लगा है। वे अपना अधिकतर खाली समय मोबाइल गेम खेलने या गाने सुनने में बिताने लगे हैं। कभी-कभी तो वे पढ़ाई या होमवर्क करते समय भी ईयरफोन लगाकर गा

सरकार की बंदोबस्ती

  • Posted on: 25 September 2016
  • By: admin

सरकार गेहूं के आयात शुल्क में कमी लाने पर संजीदगी से विचार कर रही है। गेहूं का घरेलू उत्पादन कम होने और भारतीय खाद्य निगम के पास पर्याप्त गेहूं नहीं होने से महंगाई बढऩे की आशंका के मद्देनजर सरकार एहतियात बरतना चाहती है। व्यापारियों और आटा मिलों ने घरेलू पैदावार पचास लाख टन रहने का अनुमान लगाया है। कहना न होगा कि घरेलू बाजार में गेहूं की प्रचुरता बनी रहने पर ही महंगाईके दंश से बचा रहा जा सकता है। समझा जाता है कि गेहूं के आयात शुल्क को घटाकर 10 फीसद या 15 फीसद के स्तर पर लाया जा सकता है। अभी यह 25 फीसद है। कृषि मंत्रालय ने उत्पादन बढऩे की बात कही है। मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक,

शहरी बच्चों पर निगेटिव असर

  • Posted on: 10 September 2016
  • By: admin

एक मनोविज्ञानशाला में हाल ही में एक सर्वे हुआ था। ग्रामीण व शहरी इलाकों में छात्र-छात्राओं के बीच कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि आज के कंपीटीशन युग में शहरी बच्चे अपने माता-पिता की उदासीनता के शिकार हो रहे हैं। शोध अध्ययन में यह भी पता चला है कि ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहर के बच्चों पर पारिवारिक उदासीनता का ज्यादा निगेटिव असर पड़ रहा है। मनोविज्ञानशाला के विशेषज्ञों के मुताबिक, 2015-16 शैक्षिक सत्र में कुल 500 छात्र व 258 छात्राओं पर सर्वे किया। ये सभी बच्चे 10वीं के विद्यार्थी हैं। जब लड़के व लड़कियों पर अलग-अलग अध्ययन किया गया तो पता चला कि लड़कियों की अपेक्षा लड़कों की शैक्ष

बढ़ता 'साइबर अपराध'

  • Posted on: 25 August 2016
  • By: admin

भारत में पिछले साल 2005 से 2014 के बीच कुल दस वर्षोंं में साइबर अपराध के मामलों में 19 गुना बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही इन्टरनेट पर दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के मामले में भारत का अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरा स्थान है। वही दुर्भावना पूर्ण कोड के निर्माण में भारत का स्थान दूसरा वेब हमले और नेटवर्क हमले के मामले में क्रमश: चौथा और आठवां स्थान है। कहना गलत न होगा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी में नौ गुना बढ़ोतरी हुई है।

समाधान की मंशा और संवाद ने बनाई राह

  • Posted on: 10 August 2016
  • By: admin

दस साल के लंबे वक्त से अटके जीएसटी विधेयक का पारित होना अर्थ जगत के लिए तो बड़ी खबर है ही लेकिन राजनीति के लिए आंख खोलने वाली बड़ी घटना भी है। कभी जिद तो कभी अवरोधों में अटका रहा विधेयक जितने सुखद और शांत माहौल में परवान चढ़ा।उसने यह साबित कर दिया कि राजनीति में संवाद जरूरी है। दोतरफा संवाद और समस्या के निपटारे की मंशा हो तो पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक अखाड़े का नजारा देने वाली संसद सर्वोच्च पंचायत की अपनी पुरानी गरिमा में फिर से लौट सकती है। यह आस और अपेक्षा जग गई है कि काश, संसद में ऐसा दिन रोज दिखे जब चर्चा व्यक्तिगत राजनीति के बजाय जनहित पर हो। मानसून सत्र का तेवर शुरू से बदला- बदला थ

शहरीकरण से दूर होगी गरीबी?

  • Posted on: 25 July 2016
  • By: admin

पिछले महीने पुणे में स्मार्ट सिटी परियोजना का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शहरीकरण को समस्या नहीं, बल्कि गरीबी दूर करने का एक अवसर माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी में गरीबी कम करने की क्षमता है, तो वह हमारे शहर हैं, क्योंकि वहां काम के अवसर हैं. यही वजह है कि गरीब गांवों से निकल कर शहरों में जाते हैं. लेकिन, क्या यह सच है? क्या सचमुच शहरीकरण से गरीबी दूर हो सकती है? विश्व-बैंक तथ्यों के आधार पर दावा करता है कि शहरीकरण की वजह से चीन, भारत, कई अफ्रीकी व दक्षिण-अमेरिकी देशों में जीवन-स्तर सुधरा है.

भारत में मानव पूंजी

  • Posted on: 10 July 2016
  • By: admin

भारत विश्व मानव पूंजी सूचकांक में गिरकर 105वें स्थान पर पहुंच गया है। यह सूचकांक वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम (डब्लूईएफ) जारी करता है। 2013 में इसमें भारत 78वें नंबर पर था। पिछले साल 124 देशों की सूची में वह 100वें स्थान पर पहुंच गया। फिलहाल जी-20 के सदस्य देशों के बीच वह सबसे निचले पायदान पर है। यह स्थिति न सिर्फ निराशाजनक, बल्कि चिंता पैदा करने वाली भी है। यह बताती है कि अगर विकसित अथवा उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में भारत को प्रतिष्ठा प्राप्त करनी है, तो इसके लिए यहां काफी कुछ करने की जरूरत है। डब्लूईएफ शिक्षा, रोजगार और श्रमशक्ति की गतिशीलता से संबंधित आंकड़ों को सम्मिलित करते हुए यह सूचकांक

मनुष्य के सुखमय जीवन का आधार है योग

  • Posted on: 25 June 2016
  • By: admin

पिछले साल दुनिया भर के 191 देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह मनाया गया था जिसमें 47 इस्लामी देश शामिल थे। इस बार भी इस दिन दुनियाभर के करोड़ों लोग अपने अपने देशों में योग करेंगे। पिछले साल इसी दिन 40 हजार लोगों ने राजपथ पर एक साथ योग किया था जिसकी पूरी दुनिया में चर्चा हुई थी। योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया को कहा जाता है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। यह शब्द, प्रक्रिया और धारणा बौद्ध, जैन और हिन्दू धर्मों में ध्यान प्रक्रिया से सम्बन्धित है।

ज्वैलरी कारोबार में 'कालेधन' का प्रवाह

  • Posted on: 10 June 2016
  • By: admin

संभावना व्यक्त की जा रही है कि टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीएसएस) के अन्तर्गत ज्वैलरी उद्योग को दी जाने वाली विशेष रियायत के बारे में डॉ.

ऑनलाइन से दूर होना अब आसान नहीं

  • Posted on: 25 May 2016
  • By: admin

वर्चुअल दुनिया से दूर रहने को आजकल समझदारी की तरह से पेश किया जाता है। माना जाता है कि इंसान के लिए अच्छा है। इससे उसे अपना आत्मविश्वास, अपनी आजादी और अपनी रचनात्मकता वापस मिल जाती है। दूसरी, ऑनलाइन चीजों पर उसकी निर्भरता कम हो जाती है। इससे हम ज्यादा बेहतर ढंग से फोकस कर पाते हैं और रिश्तों को निभा पाते हैं। फ्रांस में लोगों को डिस्कनेक्ट रहने का अधिकार देने की बात चल रही है। मांग की जा रही है कि कर्मचारियों, खासकर तकनीकी कंपनियों में काम करने वालों को शनिवार और इतवार को ई-मेल से दूर रहने की इजाजत मिलनी चाहिए। वहां की ट्रेड यूनियनों के लिए यह बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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