Editorial

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जीएसटी का खुलता रास्ता

  • Posted on: 10 March 2017
  • By: admin

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फिर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर अगले एक जुलाई से अमल की आशा जताई है। जीएसटी परिषद की बैठक में इस नई परोक्ष कर प्रणाली के लिए प्रस्तावित दो प्रमुख विधेयकों- केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी)- के मसौदे पर सहमति बन गई। जेटली ने कहा कि राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) के मसविदे को भी जल्दी ही मंजूरी मिल जाएगी। वो विधेयक राज्य विधानसभाओं से पारित कराया जाएगा। केंद्र को आशा है कि 16 मार्च को जीएसटी परिषद की तय बैठक में उस विधेयक पर रजामंदी बन जाएगी। इस बीच सीजीएसटी, आईजीएसटी और यूटी-जीएसटी (केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जीएसटी कानून) विधेयक को नौ मार्च से श

दूर आसमान में खुद को खोजना

  • Posted on: 25 February 2017
  • By: admin

सात नए ग्रह ढूंढ़े गए हैं, जो सब के सब ऐसे हैं, जिन पर जीवन बस सके। वे सब एक ही तारे के आस-पास घूम रहे हैं। यह खोज दिमाग को चकरा देने वाली है। इस पर मेरे एक साथी पत्रकार की टिप्पणी थी- 'यह तो बैटलस्टार गैलेस्टिका के सच हो जाने सरीखा है।' बैटलस्टार गैलेस्टिका विज्ञान-कथा पर आधारित एक धारावाहिक था, जिसमें एक तारे के आस-पास 12 ग्रह घूमते हैं और उन सब पर मानव आबादी है। अभी जिन सात ग्रहों की खोज की घोषणा की गई है, वे सभी लगभग हमारी धरती के आकार के हैं। हैरत की बात यह है कि एक ही सितारे के चारों ओर चक्कर काट रहे ये सभी ग्रह हैबिटेबल जोन में हैं, यानी उससे इतनी दूरी पर हैं कि वहां जीवन संभव है। जब

आईआईटी की काबिलियत का लोहा

  • Posted on: 10 February 2017
  • By: admin

बड़े कारोबारी बनाने और अरबों डालर का स्टार्ट अप खड़ा करने में आईआईटी दुनिया में चौथे स्थान पर है। आईआईटी ने इस मामले में ऑक्सफोर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। ब्रिटेन की अकाउंटिंग और पैरोल कम्पनी सेज ने इस बाबत रिपोर्ट जारी की है। कहना गलत न होगा कि एक बार फिर आईआईटी की काबिलियत का लोहा पूरी दुनिया ने माना है। ये इंजीनियरिंग संस्थान स्टार्टअप शुरू करने वाले छात्रों को तैयार करने में चौथे स्थान पर हैं। इसमें विश्वभर की उन यूनिवर्सिटीज को जगह दी गई है, जिन्होंने बड़े कारोबारी पैदा कर आर्थिक जगत में डंका बजाने वाले स्टार्टअप तैयार किए हैं। आईआईटी दिल्ली ने सबसे ज्यादा बड़े कारोबारी दिए हैं।

स्वतंत्रता, लोकतंत्र और गणतंत्र में क्या अंतर है ?

  • Posted on: 25 January 2017
  • By: admin

स्वतंत्रता बहुत व्यापक अवधारणा है। इसका सीधा मतलब है व्यक्ति का अपने कार्य-व्यवहार में स्वतंत्र होना, पराधीन नहीं होना। व्यावहारिक अर्थ है ऐसी व्यवस्था में रहना जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता उसका मौलिक अधिकार हो। हजारों साल के मनुष्य जाति के इतिहास में हमने व्यक्ति के कुछ प्राकृतिक अधिकारों को स्वीकार किया है जैसे जीवन, विचरण, भरण-पोषण, निवास वगैरह। इन प्राकृतिक अधिकारों को अतीत में राज-व्यवस्थाओं ने अपने लिखित-अलिखित कानूनों में स्थान देकर नागरिक अधिकार बनाया। 10 दिसम्बर 1948 को जारी संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार घोषणापत्र में इन अधिकारों को जगह दी। इन अधिकारों पर नजर डालेंगे तो आप पाएं

इंटरनेट पर कमजोर क्यों है आवाज की ताकत

  • Posted on: 10 January 2017
  • By: admin

तस्वीरों की दौड़ में हमने आवाज को लगभग भुला ही दिया है। स्मार्टफोन ने देश में इंटरनेट प्रयोग के आयाम जरूर बदले हैं और इसके साथ सोशल नेटवर्किंग ने हमारे संवाद व मेल-मिलाप का तरीका भी बदल दिया है। इसमें यू-ट्यूब और फेसबुक लाइव जैसे फीचर बहुत लोकप्रिय हुए हैं। इन सबके साथ हमने इंटरनेट को वीडियो का ही माध्यम समझ लिया है और ऑडियो यानी ध्वनि को नजरंदाज कर दिया गया है। भारत में अगर आप अपने विचार अपनी आवाज के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आपको इंटरनेट पर खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। व्यवसाय के रूप में जहां यू-ट्यूब के वीडियो चैनल भारत में काफी लोकप्रिय हैं, वहीं ध्वनि का माध्यम अभी जड़ें जम

बदलते नियम

  • Posted on: 25 December 2016
  • By: admin

अच्छा हुआ रिजर्व बैंक को अपनी गलती बहुत जल्दी समझ में आ गई। बंद किए गए नोटों के साथ अपने बैंक खातों में पांच हजार रुपये से ज्यादा की रकम जमा कराने को लेकर जो पाबंदियां उसने लगाई थीं, वे जिस तरह से एक दिन में ही वापस ले ली गईं, उसके बाद हम 'देर आए-दुरुस्त आए' का मुहावरा भी नहीं दोहरा सकते। सोमवार को जारी रिजर्व बैंक के आदेश से अजीब सी स्थिति पैदा हो गई थी। उस आदेश में कहा गया था कि अब लोग पुराने नोटों में पांच हजार रुपये से ज्यादा की रकम एक बार ही जमा करा सकेंगे और बैंक उसे भी तभी स्वीकार करेगा, जब वह उनकी इस सफाई से संतुष्ट हो जाएगा कि यह देरी क्यों हुई?

न्यूनतम नकदी की ओर

  • Posted on: 10 December 2016
  • By: admin

अच्छी बात है कि केंद्र सरकार देश में भ्रष्टाचार और काले धन की रोकथाम के लिए न्यूनतम नकदी व्यवस्था की ओर बढऩा चाहती है। इसके लिए पुख्ता इंतजाम जरूरी हैं।
पांच सौ और हजार रुपए के नोटों को रद्द कर केंद्र ने काले धन के भंडारों पर प्रहार किया। अब आगे ऐसे भंडार ना बनें, इसके लिए सरकार ने न्यूनतम नकदी (लेस-कैश) के चलन की तरफ बढऩे का लक्ष्य रखा है। अफसोसनाक है कि विपक्षी दल इसमें सहयोग नहीं कर रहे। आम लेन-देन में नकदी का इस्तेमाल घटाने के लिए सरकार ने एक अहम पहल मुख्यमंत्रियों की उपसमिति बनाकर की।

उम्मीदों का एक्सप्रेस-वे

  • Posted on: 25 November 2016
  • By: admin

किसी भी राष्ट्र या राज्य के विकास की गति उसकी सड़कों की रफ्तार से तय होती है और अच्छी बात है कि हमारे देश के ज्यादातर राज्यों ने इस सच को पहचान लिया है। नई-नई सड़कों और फ्लाईओवर का बढ़ता संजाल इसका प्रमाण है। उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि विकास की दौड़ में रफ्तार पहली शर्त है और यह बिना अच्छी सड़कों के संभव नहीं है। उत्तर प्रदेश इस सोच के क्रियान्वयन में काफी आगे निकला दिखाई दे रहा है। तेजी से वैश्विक होते समय में जब हम चीन-जापान जैसे देशों से होड़ की बात करते हैं, स्वीकार करना होगा कि यह होड़ हमारी ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर चलकर संभव नहीं है। टूटी-फूटी सड़कें न रफ्तार बढऩे देती हैं, न कारोबार।

काले धन पर करारा वार

  • Posted on: 10 November 2016
  • By: admin

काले धन पर यह करारा हमला है। ताजा कदम के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाया है कि अवैध धन के खिलाफ उनके एलान महज जुमला नहीं थे। सख्त कदम उठाने में हालांकि कुछ समय लगा, लेकिन देर आयद-दुरुस्त आयद की तर्ज पर अब उनकी सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे काला धन रखने वालों की नींद निश्चित ही उड़ गई होगी। ऐसा धन सामान्यत: बड़े नोटों के रूप में रखा जाता है। जिन लोगों ने 500 और 1000 रुपए के नोटों के रूप में इन्हें रखा होगा, अब एक ही झटके में उनका ऐसा धन किसी मोल का नहीं रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के मुताबिक 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक इन नोटों को लोग बैंकों में जमा करा सकेंगे। लेकिन ऐसा

तमसो मां ज्योतिर्गमय

  • Posted on: 25 October 2016
  • By: admin

दीपावली हमारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक त्यौहार है। हर व्यक्ति इसे श्रद्धा एवं सामथ्र्य के साथ मनाता है। धनतेरस, रूप चौदस, लक्ष्मी पूजन, गोवद्र्धन पूजन और भाईदूज इन पाँच पर्वों के इस पुंज को ही दीपावली कहा जाता है, जिसका सीधा अर्थ अन्धकार में प्रकाश करने से है। यह पर्व हमें यही सन्देश देता है कि हम अपने हृदय में छाए हुए अज्ञान रूपी अन्धकार को मिटा कर ज्ञान रूपी ज्योति का संचार कर हृदय कमल को आलोकित करें। किन्तु लुप्त हो रहे सांस्कृतिक आदर्शों के परिणाम स्वरूप यह पर्व मात्र दीपक व जगमग सजावट का प्रतीक बनकर रह गया है। आज यह पर्व किसी के लिए लक्ष्मी आराधना, तो किसी के लिए आतिशबाजी, तो किसी के लिए

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