Editorial

All news from Editor

बदलती आदतों का दौर

  • Posted on: 10 September 2017
  • By: admin
सोशल मीडिया हमारी आदतों को किस तरह बदल रहा है, इस पर एसोचैम की एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट से रोशनी पड़ी है। हालांकि एसोचैम ने ये अध्ययन उपभोक्ताओं से संवाद करने की बदलती जरूरतों को समझने के लिए कराया, लेकिन यह समाज की नई प्रवृत्तियों को समझने के लिहाज से भी लाभदायक है। इन प्रवृत्तियों को समझे बिना खासकर आज की नई पीढ़ी से प्रभावी संवाद नहीं हो सकता। स्पष्टत: इस अध्ययन रिपोर्ट का संदर्भ कहीं बड़ा है। मसलन, इसका यह निष्कर्ष कि अब बड़े शहरों में रहने वाले लोग तीन-चार साल पहले के मुकाबले अखबार पढऩे और टीवी देखने में लगभग आधा समय खर्च करते हैं। बाकी समय स्मार्टफोन पर जाता है।

मांग बढऩे पर निर्भर

  • Posted on: 10 August 2017
  • By: admin

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ब्याज दर में चौथाई प्रतिशत की कटौती की। यह कदम बाजार की अपेक्षाओं के मुताबिक है। चूंकि मुद्रास्फीति दर नियंत्रित है, अत: रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति में ब्याज दरों में कटौती पर सहमति थी। छह सदस्यीय इस समिति के दो सदस्य तो आधा फीसदी कमी चाहते थे, लेकिन बहुमत फिलहाल 0.25 प्रतिशत कटौती के पक्ष में रहा। तो आरबीआई ने रेपो रेट (जिस दर पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को कर्ज देता है) 6 प्रतिशत कर दिया है।

स्वच्छता अभियान सराहनीय कदम

  • Posted on: 25 July 2017
  • By: admin
दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रेल प्रशासन द्वारा स्वच्छता को लेकर किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रेल प्रशासन द्वारा स्वच्छता को लेकर किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता को लेकर विगत कुछ समय से सक्रिय दिख रहे रेल प्रशासन ने दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पर विशेष दस्ते तैनात किए हैं। इन दस्तों को स्टेशनों पर अनधिकृत रूप से दाखिल होने वालों और गंदगी फैलाने वालों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इस पहल के सकारात्मक नतीजे भी सामने आए हैं। 

हमारे योग की मुरीद है सारी दुनिया

  • Posted on: 25 June 2017
  • By: admin
योग विधा वास्तव में भारत की ओर से दुनिया को सबसे प्रभावशाली सांस्कृतिक देन है। आज योग का दायरा दुनिया के तमाम देशों में फैल चुका है। सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1893 में शिकागो विश्व सम्मेलन में बोलते हुए दुनिया को योग की अवधारणा से परिचित कराया था। उनके बाद स्वामी योगानंद परमहंस ने अपनी पुस्तक ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी के साथ दुनिया को अचंभित कर दिया।

सफलता का मुख्य रहस्य

  • Posted on: 10 June 2017
  • By: admin

संसार के अग्रणी लोग आत्मविश्वास से परिपूर्ण होते हैं। वे अपनी आत्मा में, अपनी शक्तियों में आस्थावान रहकर कोई भी कार्य कर सकने का साहस रखते हैं। वे अपने लिए चयनित कार्य को पूरी लगन और निष्ठा के साथ करते हैं। वे मार्ग में आने वाली किसी भी बाधा अथवा अवरोध से विचलित नहीं होते। आशा,साहस और उद्योग उनके स्थायी साथी होते हैं। किसी भी परिस्थिति में वे उसका साथ निभाते हैं। आत्मविश्वासी सराहनीय कर्मवीर होता है।

नरेंद्र मोदी हैं गरीबों के मसीहा

  • Posted on: 25 May 2017
  • By: admin
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि तीन साल में गरीबों के मसीहा के तौर पर लोगों के बीच छा गई है। देश का ऐसा कोई कोना नहीं हैं, जहां मोदी जी जाते हो और लोग मोदी-मोदी के नारे न लगाते हों। मोदी जी की एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार करते हैं। मोदी जी के लोगों से मिलने और संवाद करने के तरीके से भी लोग उनके कायल हो जाते हैं। उनकी गरीबों के मसीहा की छवि अचानक नहीं बनी है। इसके पीछे है उनकी मेहनत और सबका साथ-सबका विकास की भावना से ओतप्रोत योजनाओं को अमली जाना पहना कर गरीबों तक पहुंचाना। देश की जनता हैरान है

ताकि, बन सके पढ़ाई का 'बेहतर माहौल'

  • Posted on: 10 May 2017
  • By: admin

इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेजों समेत तकनीकी संस्थानों के छात्रों को अब कॉलेजों में जूनियर्स या अन्य किसी स्टूडेंट को उनके वर्थ प्लेस के आधार पर सम्बोधित नहीं किया जा सकेगा। यदि ऐसा होता है तो वह रैंगिंग के दायरे में आएगा और नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। ऑल इण्डिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन द्वारा हाल ही इस बारे में जारी किया गया। नोटिफिकेशन न केवल सामयिक है बल्कि सराहनीय भी है। नि:संदेह यह नया बिंदु उन छात्रों के लिए राहत की खबर लाया है,

लापता होते बच्चे एक गंभीर समस्या

  • Posted on: 25 April 2017
  • By: admin
बच्चों को तलाशने के लिए बनाई गई सरकारी वेसबाइट- ट्रैक चाइल्ड के मुताबिक जनवरी 2012 से मार्च 2017 के बीच ढाई लाख बच्चे लापता हो गए। दरअसल, इतने बच्चों के गायब होने के मामले दर्ज हुए हैं। यानी मुमकिन है कि ये संख्या इससे कहीं ज्यादा हो। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे बच्चों की असल संख्या इससे कई गुनी हो सकती है क्योंकि बहुत से मामले माता पिता दर्ज ही नहीं कराते हैं। कई बार पुलिस भी रिपोर्ट नहीं लिखती है। वैसे दर्ज मामलों पर ही गौर करें तो मतलब निकलता है कि भारत में हर घंटे पांच बच्चे लापता हो रहे हैं।

शिक्षा का महत्व

  • Posted on: 10 April 2017
  • By: admin
तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् अधंकार से मुझे प्रकाश की ओर ले जाओ- यह प्रार्थना भारतीय संस्कृति का मूल स्तम्भ है । प्रकाश में व्यक्ति को सब कुछ दिखाई देता है, अन्धकार में नहीं । प्रकाश से यहाँ तात्पर्य ज्ञान से है । ज्ञान से व्यक्ति का अंधकार नष्ट होता है । उसका वर्तमान और भावी जीने योग्य बनता है । ज्ञान से उसकी सुप्त इन्द्रियाँ जागृत होती हैं । उसकी कार्य क्षमता बढ़ती है जो उसके जीवन को प्रगति पथ पर ले जाती है। शिक्षा का क्षेत्र सीमित न होकर विस्तृत है । व्यक्ति जीवन से लेकर मृत्यु तक शिक्षा का पाठ पढ़ता है । प्राचीन काल में शिक्षा गुरुकुलों में होती थी ।

संकट में हाथ थामना

  • Posted on: 25 March 2017
  • By: admin
वोडाफोन और आइडिया का विलय भारतीय दूरसंचार उद्योग में बढ़ते संकट का नतीजा है। कुछ रोज पहले एयरटेल के एक बड़े अधिकारी ने कहा था कि दूरसंचार कंपनियों के मुनाफे की दर आज न्यूनतम स्तर पर है। जब ये हाल हो, तो कंपनियां एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक-दूसरे से बाजार साझा करने में अपना भला समझती हैं। ऐसी ही समझ वोडाफोन और आइडिया के कर्ता-धर्ताओं में बनी। तो उन्होंने आपस में विलय का फैसला किया। परिणामस्वरूप भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी अस्तित्व में आएगी। दोनों के साझा ग्राहकों की संख्या करीब 40 करोड़ होगी। यह भारत के कुल टेलीकॉम मार्केट शेयर का करीब 35 फीसदी है। उनका राजस्व मार्केट शेयर

Pages