Editorial

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नरेंद्र मोदी हैं गरीबों के मसीहा

  • Posted on: 25 May 2017
  • By: admin
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि तीन साल में गरीबों के मसीहा के तौर पर लोगों के बीच छा गई है। देश का ऐसा कोई कोना नहीं हैं, जहां मोदी जी जाते हो और लोग मोदी-मोदी के नारे न लगाते हों। मोदी जी की एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार करते हैं। मोदी जी के लोगों से मिलने और संवाद करने के तरीके से भी लोग उनके कायल हो जाते हैं। उनकी गरीबों के मसीहा की छवि अचानक नहीं बनी है। इसके पीछे है उनकी मेहनत और सबका साथ-सबका विकास की भावना से ओतप्रोत योजनाओं को अमली जाना पहना कर गरीबों तक पहुंचाना। देश की जनता हैरान है

ताकि, बन सके पढ़ाई का 'बेहतर माहौल'

  • Posted on: 10 May 2017
  • By: admin

इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेजों समेत तकनीकी संस्थानों के छात्रों को अब कॉलेजों में जूनियर्स या अन्य किसी स्टूडेंट को उनके वर्थ प्लेस के आधार पर सम्बोधित नहीं किया जा सकेगा। यदि ऐसा होता है तो वह रैंगिंग के दायरे में आएगा और नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। ऑल इण्डिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन द्वारा हाल ही इस बारे में जारी किया गया। नोटिफिकेशन न केवल सामयिक है बल्कि सराहनीय भी है। नि:संदेह यह नया बिंदु उन छात्रों के लिए राहत की खबर लाया है,

लापता होते बच्चे एक गंभीर समस्या

  • Posted on: 25 April 2017
  • By: admin
बच्चों को तलाशने के लिए बनाई गई सरकारी वेसबाइट- ट्रैक चाइल्ड के मुताबिक जनवरी 2012 से मार्च 2017 के बीच ढाई लाख बच्चे लापता हो गए। दरअसल, इतने बच्चों के गायब होने के मामले दर्ज हुए हैं। यानी मुमकिन है कि ये संख्या इससे कहीं ज्यादा हो। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे बच्चों की असल संख्या इससे कई गुनी हो सकती है क्योंकि बहुत से मामले माता पिता दर्ज ही नहीं कराते हैं। कई बार पुलिस भी रिपोर्ट नहीं लिखती है। वैसे दर्ज मामलों पर ही गौर करें तो मतलब निकलता है कि भारत में हर घंटे पांच बच्चे लापता हो रहे हैं।

शिक्षा का महत्व

  • Posted on: 10 April 2017
  • By: admin
तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् अधंकार से मुझे प्रकाश की ओर ले जाओ- यह प्रार्थना भारतीय संस्कृति का मूल स्तम्भ है । प्रकाश में व्यक्ति को सब कुछ दिखाई देता है, अन्धकार में नहीं । प्रकाश से यहाँ तात्पर्य ज्ञान से है । ज्ञान से व्यक्ति का अंधकार नष्ट होता है । उसका वर्तमान और भावी जीने योग्य बनता है । ज्ञान से उसकी सुप्त इन्द्रियाँ जागृत होती हैं । उसकी कार्य क्षमता बढ़ती है जो उसके जीवन को प्रगति पथ पर ले जाती है। शिक्षा का क्षेत्र सीमित न होकर विस्तृत है । व्यक्ति जीवन से लेकर मृत्यु तक शिक्षा का पाठ पढ़ता है । प्राचीन काल में शिक्षा गुरुकुलों में होती थी ।

संकट में हाथ थामना

  • Posted on: 25 March 2017
  • By: admin
वोडाफोन और आइडिया का विलय भारतीय दूरसंचार उद्योग में बढ़ते संकट का नतीजा है। कुछ रोज पहले एयरटेल के एक बड़े अधिकारी ने कहा था कि दूरसंचार कंपनियों के मुनाफे की दर आज न्यूनतम स्तर पर है। जब ये हाल हो, तो कंपनियां एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक-दूसरे से बाजार साझा करने में अपना भला समझती हैं। ऐसी ही समझ वोडाफोन और आइडिया के कर्ता-धर्ताओं में बनी। तो उन्होंने आपस में विलय का फैसला किया। परिणामस्वरूप भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी अस्तित्व में आएगी। दोनों के साझा ग्राहकों की संख्या करीब 40 करोड़ होगी। यह भारत के कुल टेलीकॉम मार्केट शेयर का करीब 35 फीसदी है। उनका राजस्व मार्केट शेयर

जीएसटी का खुलता रास्ता

  • Posted on: 10 March 2017
  • By: admin

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फिर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर अगले एक जुलाई से अमल की आशा जताई है। जीएसटी परिषद की बैठक में इस नई परोक्ष कर प्रणाली के लिए प्रस्तावित दो प्रमुख विधेयकों- केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी)- के मसौदे पर सहमति बन गई। जेटली ने कहा कि राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) के मसविदे को भी जल्दी ही मंजूरी मिल जाएगी। वो विधेयक राज्य विधानसभाओं से पारित कराया जाएगा। केंद्र को आशा है कि 16 मार्च को जीएसटी परिषद की तय बैठक में उस विधेयक पर रजामंदी बन जाएगी। इस बीच सीजीएसटी, आईजीएसटी और यूटी-जीएसटी (केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जीएसटी कानून) विधेयक को नौ मार्च से श

दूर आसमान में खुद को खोजना

  • Posted on: 25 February 2017
  • By: admin

सात नए ग्रह ढूंढ़े गए हैं, जो सब के सब ऐसे हैं, जिन पर जीवन बस सके। वे सब एक ही तारे के आस-पास घूम रहे हैं। यह खोज दिमाग को चकरा देने वाली है। इस पर मेरे एक साथी पत्रकार की टिप्पणी थी- 'यह तो बैटलस्टार गैलेस्टिका के सच हो जाने सरीखा है।' बैटलस्टार गैलेस्टिका विज्ञान-कथा पर आधारित एक धारावाहिक था, जिसमें एक तारे के आस-पास 12 ग्रह घूमते हैं और उन सब पर मानव आबादी है। अभी जिन सात ग्रहों की खोज की घोषणा की गई है, वे सभी लगभग हमारी धरती के आकार के हैं। हैरत की बात यह है कि एक ही सितारे के चारों ओर चक्कर काट रहे ये सभी ग्रह हैबिटेबल जोन में हैं, यानी उससे इतनी दूरी पर हैं कि वहां जीवन संभव है। जब

आईआईटी की काबिलियत का लोहा

  • Posted on: 10 February 2017
  • By: admin

बड़े कारोबारी बनाने और अरबों डालर का स्टार्ट अप खड़ा करने में आईआईटी दुनिया में चौथे स्थान पर है। आईआईटी ने इस मामले में ऑक्सफोर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। ब्रिटेन की अकाउंटिंग और पैरोल कम्पनी सेज ने इस बाबत रिपोर्ट जारी की है। कहना गलत न होगा कि एक बार फिर आईआईटी की काबिलियत का लोहा पूरी दुनिया ने माना है। ये इंजीनियरिंग संस्थान स्टार्टअप शुरू करने वाले छात्रों को तैयार करने में चौथे स्थान पर हैं। इसमें विश्वभर की उन यूनिवर्सिटीज को जगह दी गई है, जिन्होंने बड़े कारोबारी पैदा कर आर्थिक जगत में डंका बजाने वाले स्टार्टअप तैयार किए हैं। आईआईटी दिल्ली ने सबसे ज्यादा बड़े कारोबारी दिए हैं।

स्वतंत्रता, लोकतंत्र और गणतंत्र में क्या अंतर है ?

  • Posted on: 25 January 2017
  • By: admin

स्वतंत्रता बहुत व्यापक अवधारणा है। इसका सीधा मतलब है व्यक्ति का अपने कार्य-व्यवहार में स्वतंत्र होना, पराधीन नहीं होना। व्यावहारिक अर्थ है ऐसी व्यवस्था में रहना जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता उसका मौलिक अधिकार हो। हजारों साल के मनुष्य जाति के इतिहास में हमने व्यक्ति के कुछ प्राकृतिक अधिकारों को स्वीकार किया है जैसे जीवन, विचरण, भरण-पोषण, निवास वगैरह। इन प्राकृतिक अधिकारों को अतीत में राज-व्यवस्थाओं ने अपने लिखित-अलिखित कानूनों में स्थान देकर नागरिक अधिकार बनाया। 10 दिसम्बर 1948 को जारी संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार घोषणापत्र में इन अधिकारों को जगह दी। इन अधिकारों पर नजर डालेंगे तो आप पाएं

इंटरनेट पर कमजोर क्यों है आवाज की ताकत

  • Posted on: 10 January 2017
  • By: admin

तस्वीरों की दौड़ में हमने आवाज को लगभग भुला ही दिया है। स्मार्टफोन ने देश में इंटरनेट प्रयोग के आयाम जरूर बदले हैं और इसके साथ सोशल नेटवर्किंग ने हमारे संवाद व मेल-मिलाप का तरीका भी बदल दिया है। इसमें यू-ट्यूब और फेसबुक लाइव जैसे फीचर बहुत लोकप्रिय हुए हैं। इन सबके साथ हमने इंटरनेट को वीडियो का ही माध्यम समझ लिया है और ऑडियो यानी ध्वनि को नजरंदाज कर दिया गया है। भारत में अगर आप अपने विचार अपनी आवाज के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आपको इंटरनेट पर खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। व्यवसाय के रूप में जहां यू-ट्यूब के वीडियो चैनल भारत में काफी लोकप्रिय हैं, वहीं ध्वनि का माध्यम अभी जड़ें जम

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