Editorial

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सूचनाओं का महत्व

  • Posted on: 29 June 2012
  • By: gaurav

सूचना क्रांति के दौर में सोशल साइटों को लेकर बढ़ती ललक ने भले ही सूचनाओं के प्रवाह को बढ़ावा दिया है। आए दिन फेसबुक पर ऐसे फोटो और सूचनाएँ लोड कर दिए जाते हैं, जिन्हें लेकर अदालती और प्रशासनिक हलकों की तरफ से मनाही होती है। इसे ताकत और इस माध्यम का बेजा इस्तेमाल मानने वाले दोनों तरह के लोग हैं। इसे बेजा इस्तेमाल मानने की शुरूआत भ्रष्टाचार विरोधी अण्णा हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलन के साथ ही हुई।  निश्चिततौर पर तब कई बार भ्रष्टाचार विरोधियों ने कॉर्पोरेट के कुछ काले सच से राजनीति के अंदरूनी संबंधों को इन साइटों के जरिए ना सिर्फ उछाला, बल्कि नाराजगी में सत्ता के शीर्ष पर काबिज उन लोगों के खि

ऊर्जा का बढ़ता संकट

  • Posted on: 12 June 2012
  • By: admin

सस्ती व सतत ऊर्जा किसी भी देश की तरक्की के लिए सर्वाधिक जरूरी संसाधन है। किसी भी देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा का मतलब है कि वर्तमान और भविष्य आवश्यकता की पूर्ति इस तरीके से हो कि सभी लाभान्वित हों और पर्यावरण पर भी कोई कुप्रभाव न पड़े। इस संदर्भ में गुजरात ने एक मिसाल कायम की है। पिछले दिनों गुजरात में 600 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना भारत ही नहीं पूरे एशिया के लिए एक उदाहरण है। देश में सौर संयंत्रों से कुल 900 मेगावाट बिजली पैदा होती है। इसमें 600 मेगावाट अकेले गुजरात बना रहा है। गुजरात ने नहर के ऊपर सौर ऊर्जा संयंत्र लगा कर अनूठी मिसाल कायम की है।

अधूरे सुधारों का सच

  • Posted on: 30 April 2012
  • By: poonam

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने अमेरिका यात्रा के दौरान जिस तरह भारत में आर्थिक सुधारों की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई और इसके लिए गठबंधन राजनीति और घपलों-घोटालों को मुख्य रूप से जिम्मेदार बताते हुए कम से कम 2014 तक यही स्थिति कायम रहने का अंदेशा जताया उससे यह एक बार फिर स्पष्ट हो गया कि संप्रग सरकार अपने गठबंधन के सहयोगियों के समक्ष इस हद तक नतमस्तक हो गई है कि उसने राष्ट्रीय हितों को भी हाशिये पर रख दिया है। कौशिक ने वाशिंगटन के प्रतिष्ठित कारनेगी संस्थान में जो कुछ कहा उसके बाद अंतरराष्ट्रीय उद्योग-व्यापार जगत को भी यह स्पष्ट संदेश चला गया कि

रंगत में लौटता सेंसेक्स

  • Posted on: 19 April 2012
  • By: admin

सेंसेक्स केचेहरे पर बला की मुस्कराहट है। उसका मन प्रसन्नता से झूम रहा है। दलाल पथ की रौनक में यकायक चार चांद लग गए हैं। निवेशकों की उम्मीदें फिर से जागने व संवरने लगी हैं। डूबी पूंजी का जहाज उबरने को है। अर्थव्यवस्था पर गुलाबी रंग चढऩे लगा है। मंदी के बादलों को यह बाय-बाय बोलने का समय है। एहसास बनने लगा है कि पॉजिटिव मूड में अब आर्थिक चीजें बदलेंगी। और बदलें भी क्यों न, आखिर अपने सेंसेक्स केबल पर ही तो गुलाबी अर्थव्यवस्था का मयार टिका है प्यारे। एक लंबे समय से सेंसेक्स की दुर्गति पर हंसने वाले फिलहाल खामोश हैं। दरअसल, निगेटिविटी में जीना मंदडिय़ों की पुरानी आदत है। सेंसेक्स की बढ़त से वे भय

जहर घोलता पॉलिथिन

  • Posted on: 30 March 2012
  • By: admin

जम्मू रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए तीस क्विंटल पॉलीथिन के जब्त होने से पता चलता है कि मंदिरों के शहर जम्मू में पॉलीथिन पर लगा प्रतिबंध केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है और इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। इतनी संख्या में पॉलीथिन के जब्त होने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले जम्मू की अनाज मंडी वेयर हाउस में एक गोदाम से करीब बीस क्विंटल पॉलीथिन जब्त किया गया था। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम अधिकारियों को यह जिम्मा सौंपा है कि शहर को प्रदूषण मुक्त एवं खूबसूरत बनाने के लिए वे पॉलीथिन लिफाफों की बिक्री पर रोक लगाएं, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो रहा है। करीब तीन साल पहले जब सरकार ने

बढ़ाना होगा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

  • Posted on: 31 January 2012
  • By: admin

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दिनों आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मलेन में देश की आर्थिक विकास दर में आ रही कमी पर भी चिंता प्रकट की। वित्त वर्ष 2011-12 की दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर नौ माह के सबसे निचले स्तर पर पहुंचकर 6.9 पर रही। इसके परिणाम स्वरूप सरकार ने 2011-2012 के लिए आर्थिक विकास के लक्ष्यों को भी घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया। अब भी प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री सहित कई आर्थिक जानकारों ने इसे इस वर्ष भी 7 से 7.5 प्रतिशत पर बने रहने का अनुमान व्यक्त किया है। वैश्विक आर्थिक मंदी की आहट के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था का यह हाल तो होना ही था। चूंकि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्

क्यूएफआई का सकारात्मक रूख

  • Posted on: 13 January 2012
  • By: gaurav

यह निश्चय ही एक सकारात्मक बात है-कि पिछले कुछ समय से नीतिगत मसलों पर फैसले लेने में सुस्त रवैये के आरोप झेल रही केंद्र सरकार ने नए साल की शुरुआत एक बड़े फैसले के साथ की है। रविवार को केंद्र सरकार ने योग्य विदेशी निवेशकों (क्यूएफआई) को सीधे भारतीय शेयर बाजारों में निवेश करने की अनुमति दे दी। क्यूएफआई के तहत वे विदेशी नागिरक, समहू या संघ आते हैं जो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स और प्रतिभूति आयोगों के अंतरराष्ट्रीय संगठन के तहत हुए बहुपक्षीय समझौतों का पालन करते हैं। अब तक क्यूएफआई को सिर्फ घरेलू म्युचुअल फंड योजनाओं में निवेश करने की अनुमति थी। उम्मीद है कि भारतीय वि

टकराव नहीं, संवाद

  • Posted on: 27 December 2011
  • By: gaurav

 अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो केंद्र सरकार संसद में नया लोकपाल बिल पेश करेगी और पुराना बिल वापस ले लिया जाएगा। इसके बाद संसद के विस्तारित सत्र में 27, 28 और 29 दिसंबर को चर्चा के बाद इस बिल को पारित कराने की कोशिश की जाएगी, मगर यह साफ है कि अगर इस बिल में टीम अण्णा हजारे की मांगों के अनुरूप संशोधन न हुए तो इस बिल पर अब तक हुई सारी कवायद मिट्टी में मिल जाएगी। बिल का अधिकृत मसौदा अभी तक जारी नहीं किया गया है, मगर मीडिया के जरिए उसके जो विवरण सामने आए हैं, उन्हें टीम अण्णा ने मानने से इनकार कर दिया है और इसे जनता के साथ धोखा बताकर 27, 28 और 29 दिसंबर को अण्णा हजारे की भूख हड़ताल और फिर 30, 31 दिसं

अन्ना की वापसी

  • Posted on: 26 December 2011
  • By: gaurav

इंतजार की घडिय़ां खत्म हुईं! आ गई, आ गई, आ गई! राजधानी में छा गई! रिटर्न ऑफ अण्णा उर्फ अण्णा की वापसी। अब यह मत पूछिएगा कि अण्णा की वापसी ही क्यों? अण्णा द्वितीय क्यों नहीं?

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