Editorial

All news from Editor

राष्ट्रपति से अपेक्षाएं

  • Posted on: 21 August 2012
  • By: admin

राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण में प्रणब मुखर्जी ने निराश किया। आशा की जा रही थी कि वह राष्ट्रपति पद की शपथ अपनी मातृभाषा अथवा राष्ट्रभाषा में लेंगे, पर उन्होंने उस भाषा में शपथ ग्रहण की जिसमें हमारे देश की गुलामी का आदेश दिया गया था। आम दिनों में कोई नेता, अधिकारी अथवा नागरिक किसी भी भाषा का प्रयोग करे, उसका महत्व कम है पर जब राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण जैसा राष्ट्रीय समारोह हो, तब अपने देश की भाषाओं को नकारकर गुलामी की प्रतीक भाषा को कंठहार बनाना करोड़ों भारतीयों को कितनी पीड़ा दे गया इसका अनुमान संभवत: संसद के केंद्रीय हाल में बैठे नेता और स्वयं राष्ट्रपति भी नहीं लगा पाए। राष्ट्रपति ने शपथ ल

रेल रोको कितना उचित?

  • Posted on: 9 August 2012
  • By: admin

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से सवाल किया है कि रेल रोको, चक्का जाम व सड़कों को जाम करने जैसे आंदोलनों के दौरान यदि सरकारी सम्पत्ति को नुकसान होता है तो वर्तमान कानूनी प्रावधानों के तहत क्या संबंधित राजनीतिक दलों या अन्य संगठनों की मान्यता रद्द की जा सकती है?

अहम है शिक्षा में बुनियादी सुधार

  • Posted on: 16 July 2012
  • By: admin

यह हमारे ही देश में संभव है कि शिक्षा में बुनियादी सुधारों की बजाय आरक्षण को हथियार बनाकर उसके दोहन के प्रयास किए जाते हैं। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक बदलाव में जो उत्साह दिखा रहे हैं, उनकी पृष्ठभूमि में शिक्षा में गुणवत्ता की दृष्टि से सुधार लाना कम, शिक्षा का अंग्रेजीकरण और शिक्षा को निजी शिक्षा केंद्रों के टापुओं में बदलने की कवायद ज्यादा है। जबकि हमारे उद्देश्य ये होने चाहिए कि शिक्षा क्षेत्र से एक तो असमानता दूर हो, दूसरे वह केवल पूंजी से हासिल करने का आधार न रह जाए। इस नजरिये से आइआइटी परिषद ने आइआइटी में प

ई-बुक्स के बाजार में पिछड़ते हिंदी लेखक

  • Posted on: 16 July 2012
  • By: admin

पिछले करीब तीन महीनों से ईएल जेम्स की फिफ्टी शेड्स ट्रायोलॉजी यानी तीन किताबें- फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे, फिफ्टी शेड्स डार्कर, फिफ्टी शेड्स फ्रीड अमेरिका में प्रिंट और ई एडीशन दोनों श्रेणी में बेस्ट सेलर बनी हुई हैं। जेम्स की इन किताबों ने अमेरिका और यूरोप में इतनी धूम मचा दी है कि कोई इस पर फिल्म बना रहा है तो कोई उसके टेलीविजन अधिकार खरीद रहा है। फिफ्टी शेड्स ट्रायोलॉजी लिखे जाने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। टीवी की नौकरी छोड़कर पारिवारिक जीवन और बच्चों की परवरिश के बीच एरिका ने शौकिया तौर पर फैनफिक्शन नाम के वेबसाइट पर मास्टर ऑफ यूनिवर्स के नाम से एक सिरीज

सूचनाओं का महत्व

  • Posted on: 29 June 2012
  • By: gaurav

सूचना क्रांति के दौर में सोशल साइटों को लेकर बढ़ती ललक ने भले ही सूचनाओं के प्रवाह को बढ़ावा दिया है। आए दिन फेसबुक पर ऐसे फोटो और सूचनाएँ लोड कर दिए जाते हैं, जिन्हें लेकर अदालती और प्रशासनिक हलकों की तरफ से मनाही होती है। इसे ताकत और इस माध्यम का बेजा इस्तेमाल मानने वाले दोनों तरह के लोग हैं। इसे बेजा इस्तेमाल मानने की शुरूआत भ्रष्टाचार विरोधी अण्णा हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलन के साथ ही हुई।  निश्चिततौर पर तब कई बार भ्रष्टाचार विरोधियों ने कॉर्पोरेट के कुछ काले सच से राजनीति के अंदरूनी संबंधों को इन साइटों के जरिए ना सिर्फ उछाला, बल्कि नाराजगी में सत्ता के शीर्ष पर काबिज उन लोगों के खि

ऊर्जा का बढ़ता संकट

  • Posted on: 12 June 2012
  • By: admin

सस्ती व सतत ऊर्जा किसी भी देश की तरक्की के लिए सर्वाधिक जरूरी संसाधन है। किसी भी देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा का मतलब है कि वर्तमान और भविष्य आवश्यकता की पूर्ति इस तरीके से हो कि सभी लाभान्वित हों और पर्यावरण पर भी कोई कुप्रभाव न पड़े। इस संदर्भ में गुजरात ने एक मिसाल कायम की है। पिछले दिनों गुजरात में 600 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना भारत ही नहीं पूरे एशिया के लिए एक उदाहरण है। देश में सौर संयंत्रों से कुल 900 मेगावाट बिजली पैदा होती है। इसमें 600 मेगावाट अकेले गुजरात बना रहा है। गुजरात ने नहर के ऊपर सौर ऊर्जा संयंत्र लगा कर अनूठी मिसाल कायम की है।

अधूरे सुधारों का सच

  • Posted on: 30 April 2012
  • By: poonam

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने अमेरिका यात्रा के दौरान जिस तरह भारत में आर्थिक सुधारों की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई और इसके लिए गठबंधन राजनीति और घपलों-घोटालों को मुख्य रूप से जिम्मेदार बताते हुए कम से कम 2014 तक यही स्थिति कायम रहने का अंदेशा जताया उससे यह एक बार फिर स्पष्ट हो गया कि संप्रग सरकार अपने गठबंधन के सहयोगियों के समक्ष इस हद तक नतमस्तक हो गई है कि उसने राष्ट्रीय हितों को भी हाशिये पर रख दिया है। कौशिक ने वाशिंगटन के प्रतिष्ठित कारनेगी संस्थान में जो कुछ कहा उसके बाद अंतरराष्ट्रीय उद्योग-व्यापार जगत को भी यह स्पष्ट संदेश चला गया कि

रंगत में लौटता सेंसेक्स

  • Posted on: 19 April 2012
  • By: admin

सेंसेक्स केचेहरे पर बला की मुस्कराहट है। उसका मन प्रसन्नता से झूम रहा है। दलाल पथ की रौनक में यकायक चार चांद लग गए हैं। निवेशकों की उम्मीदें फिर से जागने व संवरने लगी हैं। डूबी पूंजी का जहाज उबरने को है। अर्थव्यवस्था पर गुलाबी रंग चढऩे लगा है। मंदी के बादलों को यह बाय-बाय बोलने का समय है। एहसास बनने लगा है कि पॉजिटिव मूड में अब आर्थिक चीजें बदलेंगी। और बदलें भी क्यों न, आखिर अपने सेंसेक्स केबल पर ही तो गुलाबी अर्थव्यवस्था का मयार टिका है प्यारे। एक लंबे समय से सेंसेक्स की दुर्गति पर हंसने वाले फिलहाल खामोश हैं। दरअसल, निगेटिविटी में जीना मंदडिय़ों की पुरानी आदत है। सेंसेक्स की बढ़त से वे भय

जहर घोलता पॉलिथिन

  • Posted on: 30 March 2012
  • By: admin

जम्मू रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए तीस क्विंटल पॉलीथिन के जब्त होने से पता चलता है कि मंदिरों के शहर जम्मू में पॉलीथिन पर लगा प्रतिबंध केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है और इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। इतनी संख्या में पॉलीथिन के जब्त होने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले जम्मू की अनाज मंडी वेयर हाउस में एक गोदाम से करीब बीस क्विंटल पॉलीथिन जब्त किया गया था। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम अधिकारियों को यह जिम्मा सौंपा है कि शहर को प्रदूषण मुक्त एवं खूबसूरत बनाने के लिए वे पॉलीथिन लिफाफों की बिक्री पर रोक लगाएं, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो रहा है। करीब तीन साल पहले जब सरकार ने

Pages