Editorial

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ज्ञान की गूंज

  • Posted on: 11 November 2013
  • By: admin
अपने ज्ञान के बल पर हमारी युवा पीढ़ी पूरी दुनिया में अपना डंका बजवा रही है। दुनिया के 110 देशों में रह रहे करीब दो करोड़ से अधिक भारतवंशियों द्वारा अपने देश को हर साल भेजी जाने वाली रकम दुनिया में सर्वाधिक है। यह सब केवल और केवल ज्ञान से संभव हुआ है।

शीर्ष पदों के हल्के दावेदार

  • Posted on: 28 October 2013
  • By: admin

इस महीने प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए तीन खास खबरें मिलीं, जिनमें दो सुखद हैं और तीसरी दिलचस्प। नालंदा अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय को पुनस्र्थापित करने के लिए भारत ने सात देशों के साथ समझौता किया। गत 10 अक्टूबर को जिन देशों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए, उनमें आस्ट्रेलिया, कंबोडिया, सिंगापुर, ब्रुनेई, न्यूजीलैंड, लाओ पीडीआर और म्यांमार शामिल हैं। नालंदा विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय दर्जा देने में यह समझौता अहम साबित होगा। दूसरी खबर यह है कि गया में केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए जल्द ही जमीन उपलब्ध हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए वहां मौजूद हवाई पंट्टी की तीन सौ एकड़ भूमि सौ

जानलेवा डेंगू

  • Posted on: 30 September 2013
  • By: admin

राजधानी में सिर्फ सितंबर माह में डेंगू पीडि़तों का आंकड़ा एक हजार को पार करना तथा 15 लोगों की मौत गंभीर चिंता का विषय है। यह आंकड़ा नगर निगम की रिपोर्ट पर आधारित है, हकीकत में स्थिति और भयावह है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि इस हफ्ते हुई बारिश से हालत और बदतर होगी। यह बयान नगर निगम के दावों की पोल खोलने वाला है। जगह-जगह पानी के जमाव से डेंगू के लिए जिम्मेदार एडिस मच्छरों को पनपने का अनुकूल माहौल बन चुका है। इसी का नतीजा है कि आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि डेंगू की चपेट में होने के बावजूद राजधानी में इससे निपटने के उचित इंतजाम व सावधानी देखने

रेत खनन का सवाल

  • Posted on: 19 August 2013
  • By: admin

वास्तव में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने फरवरी 2012 में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ही दोहराया है। लेकिन इससे साफ हुआ कि बिना पर्यावरण-मंजूरी के रेत खनन और नदियों के किनारे से उसे ले जाने पर रोक का सर्वोच्च न्यायालय का वह आदेश निष्प्रभावी रहा। तो अब ग्रीन ट्रिब्यूनल के वैसे ही आदेश से असल में क्या फर्क पड़ेगा, यह एक वाजिब सवाल है। ट्रिब्यूनल के इस निष्कर्ष से तो कोई असहमति नहीं हो सकती कि रेत खनन की गतिविधि जितने बड़े पैमाने पर हो रही है, वह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि उससे सरकारी खजाने को अरबों की क्षति भी पहुंच रही है। लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन की यह टिप्पणी भी उतनी ह

उलझन भरा फैसला

  • Posted on: 7 August 2013
  • By: admin
मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को शिक्षा के कारोबारियों के कुचक्र से बचाने के लिए तीन साल पहले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया पर एक झटके में पानी फिर गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस सिलसिले में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए शुरू की गई एकल संयुक्त प्रवेश परीक्षा (नीट) को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की सदारत वाली तीन जजों की पीठ के बहुमत से आए इस फैसले से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए छात्रों को अब फिर से अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं के पुराने दौर से गुजरना होगा। यानी डॉक्टर बनने के लिए उन्हें एक बार फिर निजी कॉलेजों के प्रबंधन

प्रकृति का कोप

  • Posted on: 27 June 2013
  • By: admin

जेठ, बैसाख की झुलसाती गर्मी के बाद सावन की शीतल फुहारों का इंतजार बड़ी शिद्दत से रहता है। इस बार समय से काफी पहले आए मानसून से देश चैन की सांस लेता, इसके पहले ही आसमान से आफत टूट पड़ी। उत्तर भारत खासकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जलप्रलय ने ऐसे गंभीर हालात बना दिए कि त्राहि-त्राहि मच गई। सदियों से आस्था का केंद्र रहे बदरी- केदार, गंगोत्री-यमुनोत्री, हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे तीर्थस्थलों में बर्बादी के ऐसे हालात बने जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। प्रकृति का यह कहर ऐसे वक्त टूटा, जब इन तीर्थस्थलों की यात्रा का मौसम चल रहा था। जम्मू कश्मीर में अमरनाथ के लिए भी तीर्थयात्रियों के जत्थे निकल पड़े थ

आरटीआई के दायरे में

  • Posted on: 10 June 2013
  • By: admin

लोकहित से जुड़े तमाम मसलों पर अलग-अलग राग अलापने वाले हमारे राजनीतिक दलों के बीच लंबे अरसे बाद किसी मुद्दे पर आम सहमति देखने को मिल रही है। मुद्दा बीसीसीआई-को सरकारी नियंत्रण से बाहर रखने या बोर्ड अध्यक्ष एन.

निवेश की जरूरत और हकीकत

  • Posted on: 30 April 2013
  • By: admin

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के जर्मनी दौरे का मकसद भारत के विदेशी निवेश को आकर्षित करना था। पिछले कुछ सालों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकारी गंभीरता साफ दिखती है। वित्तमंत्री के तौर पर पी.

चीनी उद्योग को मुक्ति

  • Posted on: 11 April 2013
  • By: admin

आर्थिक सुधारों की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए सरकार ने चीनी उद्योग को नियंतण्रमुक्त करने का फैसला किया है। इसके साथ ही चीनी मिलों को कुल उत्पादन की 10 फीसद चीनी सरकार को सस्ती दरों पर देने की बाध्यता से मुक्ति मिल गई है। अब राशन दुकानों पर चीनी बेचने के लिए राज्य सरकारें खुले बाजार से चीनी की खरीद करेंगी। सार्वजनिक वितरण पण्राली के तहत गरीब लोगों को 13.50 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से चीनी मुहैया कराई जाती है। इस एवज में राज्यों को होने वाले घाटे की भरपाई केंद्र सरकार करेगी। इस मद में केंद्र सरकार पर सब्सिडी का बोझ दोगुना बढ़कर 5300 करोड़ रुपए हो जाएगा। दरअसल उद्योग जगत की चीनी को नियं

बैंकिंग में बड़े बदलाव की जरूरत

  • Posted on: 25 March 2013
  • By: admin

देश के निजी बैंक कठघरे में हैं। ये बैंक संबंधी पारदर्शिता से खिलवाड़ करते हुए देश के भीतर ही काले धन को बड़े पैमाने पर सफेद करने के कारोबार में लगे हैं। यह आर्थिक भ्रष्टाचार देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करने के साथ महंगाई बढ़ाने का काम भी कर रहा है। वेब पोर्टल कोबरा पोस्ट ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर इस बात का खुलासा कर दिया है कि देश के तीन शीर्ष निजी बैंक बेखौफ काली कमाई को सफेद करने में लगे हैं। इन बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी कानूनी भय के कुटिल चतुराई बरतते हुए आयकर, बैंकिंग, विदेशी मुद्रा प्रबंधन, मनीलॉन्ड्रिंग और हवाला कारोबार को अंजाम देते हैं। स्टिंग ऑपरेशन में लगे पत्रकारों को जिस

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