Editorial

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शिक्षा का गिरता स्तर

  • Posted on: 15 July 2014
  • By: admin

 ग्रेजुएशन पार्ट-वन का परीक्षा परिणाम 25 फीसद रहना शिक्षा के गिरते स्तर का परिचायक है। पिछले पांच सालों में यह अब तक का सबसे खराब परिणाम है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य में शिक्षा का स्तर किस कदर गिर गया है। अगर अभी से इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संभाग में पढ़े-लिखे युवाओं की जमात कम होती चली जाएगी। शिक्षा के गिरते स्तर के लिए अगर सरकार को भी दोषी ठहराए तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि पिछले दस सालों में जम्मू-कश्मीर में डिग्री कॉलेज कुकरमुत्तों की तरह खोले गए। हालत यह है कि दस सालों में 45 नए कॉलेज खोल कर सरकार ने अपनी पीठ तो थपथपा ली लेकिन शिक्षा के स्तर को

काले धन का हिसाब

  • Posted on: 30 June 2014
  • By: admin

यह संतोषजनक है कि स्विट्जरलैंड सरकार की ओर से यह कहा गया कि वह ऐसे भारतीयों की सूची बना रही है जिन पर संदेह है कि उन्होंने काला धन स्विस बैंकों में जमा कर रखा है, लेकिन देखना यह है कि ऐसी कोई सूची भारत को कब और किस रूप में हासिल होती है?

पर्यावरण के लिए

  • Posted on: 27 June 2014
  • By: admin

क्यों न आज याद किया जाए उस कुएं को जो प्यास बुझाता था लेकिन अब उसमें झांकने से उतना ही डर लगता है जितना अपने भीतर झांकने से लगता है? क्यों न हो बात आज उस बावड़ी की जो गांव के लोगों की प्यास बुझाती थी लेकिन अब खुद ही इतनी प्यासी है कि प्यास ही उसकी खुराक बन गई है?

विज्ञान में ठहराव

  • Posted on: 1 May 2014
  • By: admin

यह विज्ञान की तरक्की का युग है। लगातार बहुत सी नई-नई बातें विज्ञान के क्षेत्र में हो रही हैं। ऐसे में, यह कहना अजीब लगता है कि विज्ञान के सामने कोई संकट है, लेकिन प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका नेचर में छह वैज्ञानिकों ने लिखा है कि विज्ञान में अब नई खोजें मुश्किल से हो पा रही है। इन वैज्ञानिकों ने विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से जुड़े तथ्यों का विश्लेषण करके बताया है कि सन 1940 तक भौतिकी में सिर्फ 11 प्रतिशत, रसायनशास्त्र में 15 प्रतिशत और चिकित्सा में 24 प्रतिशत नोबेल पुरस्कार 20 साल से ज्यादा पुरानी खोजों पर दिए गए थे। सन 1985 से अब तक यह भौतिकी में 60 प्रतिशत, रसायन में 52 प्रतिशत और चिकित्सा म

बेलगाम स्कूल

  • Posted on: 31 March 2014
  • By: admin

नए शिक्षण सत्र की उल्टी गिनती के साथ ही पब्लिक स्कूलों में फिर से अभिभावकों के चौतरफा शोषण का खेल शुरू हो गया है। चिंताजनक यह कि जिम्मेदार तंत्र इस मुद्रा में जैसे उसे कुछ न तो दिखाई दे रहा और न ही सुनाई पड़ रहा है। नतीजा, पब्लिक स्कूलों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। अभिभावकों की जेब पर बोझ डालने के लिए कई फंडे आजमाए जा रहे हैं। स्कूलों ने पहले पंजीकरण के नाम पर वसूली की और अब दाखिले के पैकेज में आधा दर्जन से ज्यादा मदें जोड़कर अभिभावकों को सिर पकडऩे पर मजबूर कर रहे हैं। कहीं विकास निधि के नाम पर तो कहीं हाइटेक क्लास रूम के नाम पर परेशानी खड़ी की जा रही हैं। यूनिफार्म और कापी किताब की धंधेबाजी

भ्रष्टाचार से मुक्ति-तभी होगी देश की उन्नति

  • Posted on: 13 March 2014
  • By: admin

किसी भी राष्ट्र की उन्नति में उस राष्ट्र के नागरिकों का योगदान होता है, नागरिकों के द्वारा किये गये कार्यों से राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है चाहे वे आम नागरिक हों या व्यापारी वर्ग अथवा नौकरीपेशा। मेहनत और ईमानदारी से किये गये कार्य प्रतिष्ठा व समृद्धि तो पहुँचाते हैं साथ ही आपको एक जिम्मेदार नागरिक होने का अहसास भी दिलाते हैं जिससे व्यक्ति को आत्मसंतुष्टि मिलती है। परन्तु आज के समय में ये मानवीय मूल्य क्षीण होते जा रहे हैं। मनुष्य अपने कार्यों को करवने के लिए किसी भी हद तक जा रहे हैं वे अपने कार्यो को करवाने के लिए रिश्वत देते व लेते ही जा रहे हैं। जिसमें व्यक्ति भ्रष्ट तथा भ्र

सराहनीय कदम

  • Posted on: 25 February 2014
  • By: admin

बाल सुधार गृहों के हालात पर हाईकोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर पूर्व सैन्यकर्मियों को नियुक्त करने का सरकार को निर्देश देना सराहनीय कदम है। अब तक बाल सुधार गृहों में पुलिसकर्मियों की नियुक्ति होती थी। उन पर आए दिन बाल कैदियों से दुर्व्यवहार के आरोप लगते रहते थे। हाईकोर्ट ने जिस तरह यह कहा कि बाल सुधार गृहों में पुलिसकर्मियों की नियुक्ति सही नहीं उससे यह साफ है कि उसे भी पुलिसकर्मियों पर भरोसा नहीं है। सरकार ने भी दो सप्ताह के भीतर इस पर काम करने की बात कही है। सुधार गृहों में रहने वाले नाबालिगों की सुरक्षा के साथ ही उन्हें मिल रही खाने-पीने, पढ़ाई, खेलकूद तथा मनोरंजन की सुविधाओं पर लगातार स

विज्ञान और भारत

  • Posted on: 13 February 2014
  • By: admin

भारतीय विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मौजूदा वक्त में विज्ञान और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई और शोध का जो महत्व बताया है, उससे कोई इनकार नहीं कर सकता। हर युग में वह देश और सभ्यता दूसरों से आगे रही है, जिसने ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में दूसरों से ज्यादा तरक्की की है, लेकिन मौजूदा वक्त में यह बात ज्यादा सही है। यह कहा भी जा रहा है कि यह ज्ञान की शताब्दी है और आने वाले वक्त में शायद देशों की तरक्की का एकमात्र मानदंड विज्ञान और टेक्नोलॉजी में उनका कौशल होगा। भारत की बड़ी युवा आबादी भी तभी देश की तरक्की में भागीदार हो सकती है, जब उसके पास जरूरी कौशल और ज्ञान हो। जानका

आरबीआइ की बिहार के प्रति संवेदना

  • Posted on: 28 January 2014
  • By: admin

दो दिवसीय दौरे पर बिहार आए रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआइ) के गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। यह एक ऐसा अवसर था, जिसमें इस विकासशील प्रदेश को देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाले शीर्ष बैंक के समक्ष अपनी अपेक्षाएं रखने का अवसर मिला। इनमें कई बातें ऐसी थीं, जो मुख्यमंत्री राज्यस्तरीय बैंकर्स कमेटी की बैठक में पहले भी रख चुके हैं। राज्य में बैंकों की साख-जमा अनुपात बढ़ाने और कृषि आधारित उद्योग एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता जताई गई। इन दो बातों से विकास के प्रयास में काफी तेजी लाई जा सकती

मजबूत होगी सूचना के अधिकार की जंग

  • Posted on: 3 December 2013
  • By: admin

आरटीआइ के संबंध में कोलकाता हाईकोर्ट का ताजा फैसला आरटीआइ कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा सकता है. कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि आरटीआइ की अर्जी डालने के लिए अपनी पहचान को उजागर करना जरूरी नहीं है. अब सिर्फ पोस्टबॉक्स का नंबर देकर बिना नाम-पते के भी सूचना मांगी जा सकती है. सूचना के अधिकार में भारतीय लोकतंत्र को बुनियादी रूप से बदलने की क्षमता है. यही कारण है कि सत्ता और शासन के उच्च पदों पर बैठे लोग इस बात से डरते हैं कि कहीं सूचना की क्रांति, शक्ति के संतुलन को आम जनता के पक्ष में न मोड़ दे.

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