Editorial

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बिटकॉइन को मात करेंगे नये क्रिप्टो उत्पाद

  • Posted on: 10 February 2018
  • By: admin
बिटकॉइन की सफलता का कारण
विकेन्द्रीयकरण-बिटकॉइन करेन्सी का कोई प्राधिकरण नहीं। यह किसी भी 
देश की सरकार या बैंक के नियंत्रण में नहीं है।
गोपनीयता
बिटकॉइन सिस्टम में धन वास्तविक व्यक्ति या संस्थाओं के साथ नहीं अपितु बिटकॉइन के पते से जुड़ा होता है और बिटकॉइन के मालिकों की स्पष्ट रूप से पहचाना नहीं की जा सकती। हालांकि स्वामित्व के गोपनीय होने के साथ समस्त लेन-देन सार्वजनिक होते हैं।

मैसेंजर के लिए संदेश

  • Posted on: 10 February 2018
  • By: admin
यह तो मानना ही होगा कि मोबाइल फोन, और खासकर तरह-तरह के मैसेंजर ने जिंदगी को आसान बना दिया है। यहां तक कि लोगों को, और खासकर रिश्तों को जुडऩे का एक नया मंच दे दिया है। हालांकि समाजशास्त्री व मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि यह इसका एक पक्ष है, जिसे हम इन दिनों जी रहे हैं और जो बहुत अच्छा भी लगता है। लेकिन इसके दूसरे पक्ष में खतरे की घंटी है।

आधार पर निराधार हैं आपत्तियां

  • Posted on: 25 January 2018
  • By: admin
देश की विकास यात्रा में आधार क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। यह बिचौलियों व भ्रष्टाचार को खत्म कर गरीबों तक उनका हक पहुंचा रहा है। डिजिटल समावेशन व डिजिटल सशक्तीकरण डिजिटल इंडिया के दो प्रमुख लक्ष्य हैं, जिन्हें हासिल करने में आधार अहम भूमिका निभा रहा है। यह सुरक्षित होने के साथ-साथ डिजिटल इंडिया के परिवर्तनकारी व समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक किफायती और सशक्त माध्यम भी है। 130 करोड़ की आबादी वाले देश में आज 119 करोड़ लोग आधार के तहत पंजीकृत हो चुके हैं

सोशल मीडिया की ताकत

  • Posted on: 10 January 2018
  • By: admin
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा एक बौद्धिक व्यक्ति हैं और दुनियाभर में उनका सम्मान है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कुछ लोग असफल नेता मानते हैं, या तो इस कारण उनके पास करिश्मा व व्यक्तिगत शक्ति नहीं है, या फिर इस वजह से कि ओबामा नस्लीय तौर पर एक अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं. वे बहुत प्रतिभाशाली लोग हैं और दूसरे नेताओं की तरह हमेशा भले ही नहीं बोलते हों, पर जब वे बोलते हैं, तो इन्हें सुनना निश्चित तौर पर बेहद फायदेमंद होता है।

प्रदूषण और सेहत

  • Posted on: 25 December 2017
  • By: admin
उम्र बढ़ती है, तो शरीर की जरूरतें भी बदलती हैं। बहुत से लोगों की सेहत संबंधी समस्याएं भी इसी के साथ बढ़ जाती हैं। जिनकी नहीं बढ़तीं, सावधानियां तो उन्हें भी बरतनी ही होती हैं। ऐसे में डॉक्टर कहते हैं कि सबसे जरूरी है, नियमित व्यायाम। मगर पकी उम्र में आप वे व्यायाम तो नहीं ही कर सकते, जो लड़कपन में कर लेते थे। न आप अखाड़े में दम आजमा सकते हैं, न फर्राटा भर सकते हैं और न ही रोज मैराथन में वक्त गुजार सकते हैं। ऐसे में सबसे बेहतर होता है, टहलना। सुरक्षित भी और भरोसेमंद भी। टहलने के लिए आपको बहुत ज्यादा चीजों की जरूरत भी नहीं होती।

जन-स्वास्थ्य की नई चुनौतियां

  • Posted on: 25 November 2017
  • By: admin
भारत के गरीब राज्यों में कुपोषण के परिणामों तथा डायरिया जैसे साधारण रोगों से लोगों की मौत आम खबर रही है। लेकिन अब चिंताजनक सूचना यह है कि इन राज्यों में लाइफ स्टाइल मर्ज से भी लोगों की बड़ी संख्या में मौत होने लगी है। पहले ऐसी मौतें अपेक्षाकृत विकसित राज्यों में होती थीं। तो जाहिर है, भारत में जन-स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। मंगलवार को जारी हुई 'इंडिया स्टेट-लेवल डिजीज बर्डन इनिशटिव्स रिपोर्ट' के मुताबिक हृदय रोग और सांस संबंधी बीमारियों के चलते पिछड़े राज्यों में अब बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं।

सुगमता की सूची में

  • Posted on: 10 November 2017
  • By: admin
कोई भी अच्छी खबर तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है, जब वह तमाम आशंकाओं के बीच आई हो। विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत का 30 स्थान तक छलांग लगाना यह बताता है कि अर्थव्यवस्था और कारोबार के हालात अभी उतने बुरे नहीं हैं, जितना कि कई मामलों में मान लिया गया है। पिछली कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत 190 देशों की सूची में 130वें स्थान पर था। अब वह 100वें स्थान पर आ गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है!

  • Posted on: 25 October 2017
  • By: admin

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर की संभावना घटा दी। पहले उसने वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। अब उसने इसे 6.7 प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ़ ने इस गिरावट के लिए नोटबंदी औऱ जीएसटी को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन उसके कुछ ही दिन बाद आईएमएफ़ प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे मोदी सरकार के प्रयासों की तारीफ की।

छलांग लगाने को तैयार अर्थव्यवस्था

  • Posted on: 10 October 2017
  • By: admin

चर्चा देश की अर्थव्यवस्था को लेकर छिड़ी तो महाभारत के चरित्र जिंदा हो उठे। उन्होंने 'शल्य कहा तो इन्होंने कहा कि मैं 'भीष्म हूं और अर्थव्यवस्था का चीरहरण नहीं होने दूंगा। लगे हाथ दुर्योधन और दु:शासन का भी जिक्र हो गया। इसी के साथ यह भी कहा गया कि ये देखो, अस्सी साल के बुजुर्ग नौकरी की तलाश में निकले हैं! इस पर पलटवार करते हुए कहा गया कि मैं नौकरी की तलाश में होता तो आप कहीं नहीं होते। इसी के साथ यह भी बता दिया गया कि मैं उस इलाके का हूं, जहां से 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में बाबू कुंवर सिंह लडऩे निकले थे और उस समय वे अस्सी साल के थे।

पारदर्शिता का पक्ष लीजिए

  • Posted on: 25 September 2017
  • By: admin
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सुप्रीम कोर्ट में पेश ब्योरे से संकेत मिला कि जन प्रतिनिधियों की आमदनी पर निगरानी का सवाल कम-से-कम एक कदम आगे बढ़ा है। सीबीडीटी ने सोमवार को कोर्ट को बताया कि सात लोकसभा सांसदों और देशभर के 98 विधायकों की संपत्तियों में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है। इसमें अनियमितताएं पाई गई हैं। सीबीडीटी ने कहा कि वह मामले की आगे जांच करेगा। लेकिन बोर्ड ने उन नेताओं के नामों का खुलासा करने से इनकार किया है।

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