Editorial

All news from Editor

सोशल मीडिया की ताकत

  • Posted on: 10 January 2018
  • By: admin
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा एक बौद्धिक व्यक्ति हैं और दुनियाभर में उनका सम्मान है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कुछ लोग असफल नेता मानते हैं, या तो इस कारण उनके पास करिश्मा व व्यक्तिगत शक्ति नहीं है, या फिर इस वजह से कि ओबामा नस्लीय तौर पर एक अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं. वे बहुत प्रतिभाशाली लोग हैं और दूसरे नेताओं की तरह हमेशा भले ही नहीं बोलते हों, पर जब वे बोलते हैं, तो इन्हें सुनना निश्चित तौर पर बेहद फायदेमंद होता है।

प्रदूषण और सेहत

  • Posted on: 25 December 2017
  • By: admin
उम्र बढ़ती है, तो शरीर की जरूरतें भी बदलती हैं। बहुत से लोगों की सेहत संबंधी समस्याएं भी इसी के साथ बढ़ जाती हैं। जिनकी नहीं बढ़तीं, सावधानियां तो उन्हें भी बरतनी ही होती हैं। ऐसे में डॉक्टर कहते हैं कि सबसे जरूरी है, नियमित व्यायाम। मगर पकी उम्र में आप वे व्यायाम तो नहीं ही कर सकते, जो लड़कपन में कर लेते थे। न आप अखाड़े में दम आजमा सकते हैं, न फर्राटा भर सकते हैं और न ही रोज मैराथन में वक्त गुजार सकते हैं। ऐसे में सबसे बेहतर होता है, टहलना। सुरक्षित भी और भरोसेमंद भी। टहलने के लिए आपको बहुत ज्यादा चीजों की जरूरत भी नहीं होती।

जन-स्वास्थ्य की नई चुनौतियां

  • Posted on: 25 November 2017
  • By: admin
भारत के गरीब राज्यों में कुपोषण के परिणामों तथा डायरिया जैसे साधारण रोगों से लोगों की मौत आम खबर रही है। लेकिन अब चिंताजनक सूचना यह है कि इन राज्यों में लाइफ स्टाइल मर्ज से भी लोगों की बड़ी संख्या में मौत होने लगी है। पहले ऐसी मौतें अपेक्षाकृत विकसित राज्यों में होती थीं। तो जाहिर है, भारत में जन-स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। मंगलवार को जारी हुई 'इंडिया स्टेट-लेवल डिजीज बर्डन इनिशटिव्स रिपोर्ट' के मुताबिक हृदय रोग और सांस संबंधी बीमारियों के चलते पिछड़े राज्यों में अब बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं।

सुगमता की सूची में

  • Posted on: 10 November 2017
  • By: admin
कोई भी अच्छी खबर तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है, जब वह तमाम आशंकाओं के बीच आई हो। विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत का 30 स्थान तक छलांग लगाना यह बताता है कि अर्थव्यवस्था और कारोबार के हालात अभी उतने बुरे नहीं हैं, जितना कि कई मामलों में मान लिया गया है। पिछली कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत 190 देशों की सूची में 130वें स्थान पर था। अब वह 100वें स्थान पर आ गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है!

  • Posted on: 25 October 2017
  • By: admin

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर की संभावना घटा दी। पहले उसने वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। अब उसने इसे 6.7 प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ़ ने इस गिरावट के लिए नोटबंदी औऱ जीएसटी को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन उसके कुछ ही दिन बाद आईएमएफ़ प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे मोदी सरकार के प्रयासों की तारीफ की।

छलांग लगाने को तैयार अर्थव्यवस्था

  • Posted on: 10 October 2017
  • By: admin

चर्चा देश की अर्थव्यवस्था को लेकर छिड़ी तो महाभारत के चरित्र जिंदा हो उठे। उन्होंने 'शल्य कहा तो इन्होंने कहा कि मैं 'भीष्म हूं और अर्थव्यवस्था का चीरहरण नहीं होने दूंगा। लगे हाथ दुर्योधन और दु:शासन का भी जिक्र हो गया। इसी के साथ यह भी कहा गया कि ये देखो, अस्सी साल के बुजुर्ग नौकरी की तलाश में निकले हैं! इस पर पलटवार करते हुए कहा गया कि मैं नौकरी की तलाश में होता तो आप कहीं नहीं होते। इसी के साथ यह भी बता दिया गया कि मैं उस इलाके का हूं, जहां से 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में बाबू कुंवर सिंह लडऩे निकले थे और उस समय वे अस्सी साल के थे।

पारदर्शिता का पक्ष लीजिए

  • Posted on: 25 September 2017
  • By: admin
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सुप्रीम कोर्ट में पेश ब्योरे से संकेत मिला कि जन प्रतिनिधियों की आमदनी पर निगरानी का सवाल कम-से-कम एक कदम आगे बढ़ा है। सीबीडीटी ने सोमवार को कोर्ट को बताया कि सात लोकसभा सांसदों और देशभर के 98 विधायकों की संपत्तियों में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है। इसमें अनियमितताएं पाई गई हैं। सीबीडीटी ने कहा कि वह मामले की आगे जांच करेगा। लेकिन बोर्ड ने उन नेताओं के नामों का खुलासा करने से इनकार किया है।

बदलती आदतों का दौर

  • Posted on: 10 September 2017
  • By: admin
सोशल मीडिया हमारी आदतों को किस तरह बदल रहा है, इस पर एसोचैम की एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट से रोशनी पड़ी है। हालांकि एसोचैम ने ये अध्ययन उपभोक्ताओं से संवाद करने की बदलती जरूरतों को समझने के लिए कराया, लेकिन यह समाज की नई प्रवृत्तियों को समझने के लिहाज से भी लाभदायक है। इन प्रवृत्तियों को समझे बिना खासकर आज की नई पीढ़ी से प्रभावी संवाद नहीं हो सकता। स्पष्टत: इस अध्ययन रिपोर्ट का संदर्भ कहीं बड़ा है। मसलन, इसका यह निष्कर्ष कि अब बड़े शहरों में रहने वाले लोग तीन-चार साल पहले के मुकाबले अखबार पढऩे और टीवी देखने में लगभग आधा समय खर्च करते हैं। बाकी समय स्मार्टफोन पर जाता है।

मांग बढऩे पर निर्भर

  • Posted on: 10 August 2017
  • By: admin

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ब्याज दर में चौथाई प्रतिशत की कटौती की। यह कदम बाजार की अपेक्षाओं के मुताबिक है। चूंकि मुद्रास्फीति दर नियंत्रित है, अत: रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति में ब्याज दरों में कटौती पर सहमति थी। छह सदस्यीय इस समिति के दो सदस्य तो आधा फीसदी कमी चाहते थे, लेकिन बहुमत फिलहाल 0.25 प्रतिशत कटौती के पक्ष में रहा। तो आरबीआई ने रेपो रेट (जिस दर पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को कर्ज देता है) 6 प्रतिशत कर दिया है।

स्वच्छता अभियान सराहनीय कदम

  • Posted on: 25 July 2017
  • By: admin
दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रेल प्रशासन द्वारा स्वच्छता को लेकर किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रेल प्रशासन द्वारा स्वच्छता को लेकर किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता को लेकर विगत कुछ समय से सक्रिय दिख रहे रेल प्रशासन ने दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पर विशेष दस्ते तैनात किए हैं। इन दस्तों को स्टेशनों पर अनधिकृत रूप से दाखिल होने वालों और गंदगी फैलाने वालों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इस पहल के सकारात्मक नतीजे भी सामने आए हैं। 

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