Editorial

All news from Editor

कर का दायरा

  • Posted on: 10 May 2019
  • By: admin

दुनिया भर में इंटरनेट के विस्तार के साथ बहुत सारे मामलों के लिए इस पर निर्भरता जिस तेजी से बढ़ रही है, उसमें इसके नियमन का सवाल उठना ही था। खासतौर पर इसके कारोबारी पहलू पर पिछले कुछ समय से यह स्वाभाविक सवाल उठ रहे थे कि अगर कोई कंपनी इंटरनेट के जरिए अपनी गतिविधियों से भारी मुनाफा कमाती है तो वह नियम-कायदों और आर्थिक नियमन से अलग क्यों रहे!

टिक टॉक पर पाबंदी

  • Posted on: 25 April 2019
  • By: admin

हल्ला हालांकि पूरी दुनिया में है, लेकिन मोबाइल फोन के लिए वीडियो के सोशल मीडिया एप टिक टॉक की दुकान भारत में तो फिलहाल बंद हो गई है। चीन में तैयार यह एप पिछले कुछ समय में काफी तेजी से लोकप्रिय हुआ था। खासकर नई पीढ़ी के नौजवानों में इसने बहुत तेजी से जगह बनाई थी। इससे पहले कि इसका नाम सुर्खियों में आता, भारत में इसके पांच करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ता हो गए थे।

ऑनलाइन गेम की गिरफ्त

  • Posted on: 10 April 2019
  • By: admin
हम लोगों को इस बात का एहसास नहीं है कि टेक्नोलॉजी युवा पीढ़ी को कितनी तेजी से अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है. पिछले दिनों एक बेहद चिंताजनक खबर आयी कि हैदराबाद में एक 16 वर्षीय लड़के को ऑनलाइन गेम पबजी (प्लेयर अननोन्स बैटलग्राउंड्स) खेलने को लेकर मां ने डांटा, तो उसने आत्महत्या कर ली. मां-बाप ने पुलिस को दिये बयान में कहा है कि बच्चे का अगले दिन अंग्रेजी का इम्तिहान था और वह पबजी खेल रहा था.

रोबोट से होमवर्क

  • Posted on: 25 February 2019
  • By: admin
उसका स्कूल उसे जो सिखाना चाहता था, चीन की उस लड़की ने वह सब एक रोबोट को सिखा दिया। स्कूल के अनुशासन की भाषा में कहें, तो उसने काफी गलत काम किया। जो होमवर्क उसे खुद करना चाहिए था, उसने उसे एक रोबोट से करवाने की जुगत तलाश ली। लेकिन अगर इसे दूसरी तरह से देखें, तो उसने हमारी दुनिया में तेजी से हो रहे कुछ बदलावों के बारे में भी हमें बता दिया और उन कुछ लोगों के बारे में भी, जो इस दौर में भी खुद को नहीं बदल रहे।

घटी ब्याज दर

  • Posted on: 10 February 2019
  • By: admin
अंतरिम बजट में कर के मामले में आम लोगों को मिली राहत के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी आम लोगों के लिए सस्ते कर्ज का रास्ता खोल दिया है। इस वर्ष की अपनी पहली मौद्रिक समीक्षा करते हुए आरबीआई के नए गवर्नर शशिकांत दास की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने मुद्रा स्फीति में कमी को ध्यान में रखते हुए बहुमत के आधार पर नीतिगत ब्याज दर यानी रेपोरेट को 0.25 फीसदी घटाकर 6.25 फीसदी करने का फैसला लिया।

गैर-बराबरी की बढ़ती खाई

  • Posted on: 25 January 2019
  • By: admin

दावोस में विश्व आर्थिक फोरम की सालाना बैठक फिर हो रही है। उस से ठीक पहले ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट जारी कर दुनिया का ध्यान अमीरों और गरीबों में बढ़ते फासले की ओर खींचा है। ऑक्सफेम पिछले कई वर्षों से इस मौके पर ऐसी  रिपोर्ट जारी करता रहा है। ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में मात्र 26 लोगों के पास उतनी संपत्ति थी, जितनी दुनिया के कुल 3.8 अरब गरीब लोगों के पास है।

निगरानी की तैयारी

  • Posted on: 25 December 2018
  • By: admin
कंप्यूटर और अन्य संचार उपकरणों की निगरानी के विवाद को राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा महत्त्व नहीं दिया जा सकता। आम लोगों की निजता में दखल नहीं हो, इस सिद्धांत से कोई असहमत नहीं हो सकता। किंतु निजता का अधिकार उस जगह जाकर खत्म हो जाता है जब व्यक्ति पर किसी तरह का कानून तोडऩे का संदेह हो। किसी की गतिविधियां यदि राष्ट्रीय सुरक्षा या अशांति को खतरा पहुंचाने वाला दिखे तो उसकी पूरी छानबीन करनी होगी और उसमें कम्प्युटर और संचार उपकरण आएंगे ही।

आमदनी बढ़ाएगा निर्यात

  • Posted on: 10 December 2018
  • By: admin

सरकार के मुखिया नरेन्द्र मोदी ने स्वयं देश से यह वायदा किया हुआ है कि वह 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करेंगे। इस दृष्टि से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि मंत्रालय का नाम पर बदलकर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय रखा गया ताकि इसका कार्यक्षेत्र विस्तृत हो सके। चूंकि कृषि मूलत: राज्यों का विषय है, इसलिए केंद्र की कदम उठाने की सीमाएं भी हैं। जाहिर है,

उम्र घटा रहा है प्रदूषण

  • Posted on: 25 November 2018
  • By: admin

चेतावनी दिल्ली के लिए है, लेकिन इसका संदर्भ राष्ट्रीय है। यानी इस समस्या से सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि सारा देश ग्रस्त है। ताजा खबर चिंता बढ़ाने वाली है। अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं तो यहां अक्सर प्रदूषित होने वाली हवा को लेकर आप जरूर चिंतित होंगे। अब एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने दिल्ली की दूषित हुई हवा पर अपने रिसर्च का निष्कर्ष जारी किया है।

बैंकों की सहायता

  • Posted on: 10 November 2018
  • By: admin
बैंकों के पुनर्पूंजीकरण की योजना के तहत उन्हें 20 हजार करोड़ रुपए और देने की तैयारी यही याद दिलाती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की गलतियों की सजा सरकारी कोष यानी आम आदमी को भुगतनी पड़ रही है। इस गलती में रिजर्व बैंक के साथ पिछली संप्रग सरकार भी शामिल है। हालांकि मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही लगातार घाटे में डूबते बैंकों की सुध ली, लेकिन तब तक शायद देर हो चुकी थी
और इसीलिए पिछले वर्ष उसे यह घोषणा करनी पड़ी कि दो लाख 11 हजार करोड़ रुपए की सहायता से बैंकों की हालत सुधारी जाएगी।

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