World Ocean Day 4:10 लाख से ज्यादा जीवों का घरौंदा और 30 फीसद आबादी का सहारा होते हैं महासागर

  • Posted on: 10 June 2019
  • By: admin
धरती पर जीवन को चलाने के लिए पानी सबसे जरूरी वस्तु है। धरती के 71 फीसद से ज्यादा हिस्से में पानी है। इसका 97 फीसद हिस्सा सागरों और महासागरों में मौजूद है। लेकिन इसमें से महज 3 फीसद ही पीने योग्य है। इस 3 फीसद में से भी 2.4 फीसद पानी ग्लेशियरों और उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव में जमा है। यानी नदियों, जलाशयों और भूमिगत जल के रूप में सिर्फ 0.6 फीसद पानी उपलब्ध है।
धरती पर मौजूद पानी का बड़ा हिस्सा समुद्र में मौजूद है, जो हमारे पर्यावरण को संतुलन प्रदान करता है। पानी के इन सबसे बड़े स्रोतों के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए 8 जून को विश्व महासागर दिवस मनाया जाता हैं। विश्व महासागर दिवस को सबसे पहले 8 जून 2009 में मनाया गया औऱ इसके बाद हर साल इसको मनाने की परंपरा का आगाज हुआ।
ऐसे हुई शुरूआत
विश्व महासागर दिवस साल 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित पृथ्वी ग्रह नामक फोरम में हर साल मनाए जाने के लिए प्रस्तावित किया गया था। और इस मौके पर विश्व महासागर दिवस मनाए जाने की घोषणा भी की गई थी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने इससे संबंधित प्रस्ताव को 2008 में पारित किया औऱ विश्व महासागर दिवस को आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई।
बेहद खास है मनाने की वजह
विश्व महासागर दिवस मनाए जाने का मकसद पीछे सिर्फ महासागरों के प्रति लोगों को जानकारी देना नहीं है बल्कि दुनियाभर में महासागरों के महत्व, खासियत और भविष्य में इनके सामने खडी चुनौतियों से अवगत करना और उनसे निपटने के उपाय खोजना है। इस मौके महासागर से जुड़े पहलूओं जैसे-खाद्य सुरक्षा, जैव-विविधता, पारिस्थितिक संतुलन,सामुद्रिक संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग, जलवायु परिवर्तन आदि पर विचार किया जाता है।
महासागरों में जीवन है विविध रूपों में विद्यमान
महासागरों की विशाल जलराशि अपने अंदर एक पारिस्थितिक तंत्र को समाए रहती है। इसमें अनेक जीव-जंतु, शैवाल रहते हैं, जिससे हमारे पर्यावरण का संतुलन बरकरार रहता है। महासागरों में प्रवाल भित्ति क्षेत्र ऐसे ही एक पारितंत्र का उदाहरण है, जो असीम जैव विविधता का प्रतीक है। एक अनुमान के मुताबिक समुद्रों में जीवों की करीबन दस लाख प्रजातियां मौजूद हैं। तटीय क्षेत्रों में स्थित मैन्ग्रोव जैसी वनस्पतियों से संपन्न वन, समुद्र के अनेक जीवों के लिए नर्सरी बनकर उनको आश्रय देते हैं।
महासागरों से पृथ्वी का मौसम होता है निर्धारित-पृथ्वी के समस्त ताप में जल की गर्मी का खास महत्व है। सूर्य दिन में आग उगलता है और सूर्य की ऊर्जा का बहुत बड़ा भाग समुद्री जल में समा जाता है। इस तरह से महासागर ऊष्मा के अक्षय भंडार भी माने जाते हैं। महासागरों के इस प्राकृतिक गुण की वजह से विश्व भर में मौसम संतुलित बना रहता है।
30 प्रतिशत आबादी का होते हैं सहारा-
दुनिया की 30 फीसद आबादी महासागरों के किनारों पर बसती है, लिहाजा इनकी रोजमर्रा की जरूरतें भी महासागरों से ही पूरा होती है। इनमें पलने वाले जीव-जन्तु इसके किनारे बसने वाले लोगों के गुजर-बसर का प्रमुख सहारा है। इसके आसपास और इससे सटे हुए इलाकों में बसने वाली जनजातियां महासागरों के पर्यावरण का भी बेहतर ज्ञान रखती है।
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