UPSC सिविल सेवा परीक्षा में आयु कटौती करने से हिन्दी पट्टी के छात्रों को होगा नुकसान

  • Posted on: 25 December 2018
  • By: admin
इलाहाबाद। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा (आईएएस) में आयु सीमा में कटौती का मुद्दा एक बार फिर गरमा रहा है। नीति आयोग ने केद्र सरकार को सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने वाले सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा को घटाकर 27 वर्ष करने का सुझाव दिया है। इस समय सिविल सेवा परीक्षा में न्यूनतम आयु सीमा 21 और अधिकतम 32 वर्ष है।
इससे पूर्व बासवन कमेटी भी आयु सीमा में कटौती की संस्तुति कर चुकी है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा सिविल सेवा परीक्षा में सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) लागू कर इसके प्रारूप में व्यापक बदलाव किया गया था। केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद प्रतियोगी छात्रों ने 2014 में राजधानी दिल्ली सहित अन्य शहरों में इसके खिलाफ जमकर आंदोलन किया था। भाजपा सरकार ने सीसैट को क्वालीफाइंग करते हुए परीक्षा पैटर्न पर विचार कर संस्तुति देने के लिए पूर्व शिक्षा सचिव बीएस बासवान की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि कमेटी की संस्तुति पर सरकार आयु सीमा कम कर सकती है। हालांकि बाद में सरकार ने आयु सीमा कम किए जाने से इनकार कर दिया था।
हिन्दी पट्टी के छात्रों को होगा नुकसान
प्रतियोगी छात्रों और विशेषज्ञों का कहना है कि आयु सीमा में कटौती किए जाने से हिन्दी पट्टी के छात्रों को खासा नुकसान होगा। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय कहते हैं कि आयु सीमा में कटौती प्रतियोगी छात्रों के हित में नहीं होगी। खास तौर से हिन्दी पट्टी के ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए यह काफी नुकसानदायक साबित होगा। 
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