Real Estate Sector की स्थिति नाजुक, 70 प्रतिशत प्रॉपर्टी डेवलपरों का बिजनेस खतरे में

  • Posted on: 25 July 2019
  • By: admin
नई दिल्ली। रियल एस्टेट सेक्टर की स्थिति नाजुक है। डेवलपरों के लिए लोन की ब्याज दर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है और इस ऊंची लागत पर भी उन्हें पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है। ऐसे में अगले दो वर्षों के दौरान करीब तीन चौथाई डेवलपरों का कारोबार चौपट हो सकता है।
कुछ बड़ी चुनौतियां:- पिछले एक साल में उधारी की लगत लगभग 4 प्रतिशत बढ़ गई है।
-डेवलपरोंके लिए फंड पूल एक साल पहले के औसत का 20 प्रतिशत रह गया है।
- लोन के लिए बातचीत पूरी होने में अब 90 दिन तक लग रहे हैं।
- क्रेडिट रेटिंग घटने के बाद एनबीएफसी के लिए पूंजी जुटाना मुश्किल हो गया है।
मेन स्टोरी-देश के ज्यादातर प्रॉपर्टी डेवलपरों का बिजनेस ठप होने का खतरा है। क्रेडिट मार्केट में लगातार तनाव बढऩे के कारण ऐसे डेवलपरों के लिए भी फंडिंग मुश्किल हो गई है, जो एक दशक की उच्चतम ब्याज दरें चुकाने को तैयार हैं। प्रॉपर्टी डेवलपरों को उधार देने वाली कंपनी निसस फाइनेंस सर्विसेज के एमडी अमित गोयनका का कहना है, शैडो बैंकिंग (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां या एनबीएफसी) की निरंतर कमजोर होती स्थिति ने अधिकांश डेवलपरों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। उनके लिए पूंजी उधार लेने की दरें एक दशक से भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। कुछ मामलों में तो 20 प्रतिशत तक। गोयनका के मुताबिक इस ऊंची लागत पर भी प्रॉपर्टी डेवलपरों को उस पैमाने पर पूंजी उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जितनी की जरूरत है। दरअसल, आईएलएंडएफएस ग्रुप के डिफॉल्ट के बाद एनबीएफसी सेक्टर में शुरू हुई कैश की दिक्कतलगातार बनी हुई है। क्रेडिट रेटिंग घटाए जाने के कारण संपत्ति गिरवी रखकर कर्ज देने वाली ढेरों संस्थाएं संघर्ष कर रही हैं। वे न तो पुराने लोन की वसूली अच्छी तरह कर पा रही हैं और न ही नए लोन देने की स्थिति में हैं। कारण यह है कि क्रेडिट रेटिंग घटने के बाद खुद उनके लिए पूंजी जुटा पाना मुश्किल हो गया है। जिन शैडो बैंकों ने हाल के वर्षों में प्रॉपर्टी डेवलपरों को ताबड़तोड़ लोन दिए, उनके लिए हालात सबसे ज्यादा खराब हो गए हैं। इसकी वजह यह है कि देश की अर्थव्यवस्था सुस्त पडऩे के बीच मकानों की बिक्री घट गई है, ऐसे में पुराने लोन की रिकवरी कमजोर पड़ गई है। अगले दो साल परीक्षा की घड़ी-गोयनका का कहना है कि पिछले एक साल में उधारी की लगत तकरीबन 4 प्रतिशत बढ़ गई है। इसके उलट डेवलपरों के लिए फंड्स पूल एक साल पहले के औसत के पांचवें हिस्से (20 प्रतिशत) के बराबर रह गया है। कैश की किल्लत ने रियल एस्टेट कंपनियों की सॉल्वेंसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में आई गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले दो साल के दौरान करीब 70 प्रतिशत प्रॉपर्टी डेवलपरों का बिजनेस ठप हो सकता है।
लोन चुकाना भी चुनौती-इस महीने की शुरुआत में इंडिया रेटिंग्स के विश्लेषकों ने एक नोट में कहा था, अपार्टमेंट की बिक्री घटने के बीच लोन चुकाने की चुनौती से निपटने के लिए डेवलपरों को संपत्तियां बेचने को मजबूर होना पड़ सकता है। ऐसे हालात का कुछ नुकसान उन्हें उधार देने वाले बैंकों, एनबीएफसी या अन्य संस्थाओं को भी उठाना पड़ सकता है।
 
Category: