हरियाणा सरकार ने एथलीटों की कमाई का हिस्सा मांगा, खिलाडिय़ों में गुस्सा

  • Posted on: 10 June 2018
  • By: admin

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अपने विभागों में कार्यरत खिलाडिय़ों को व्यवसायिक और पेशेवर प्रतिबद्धताओं से होने वाली उनकी कमाई का एक तिहाई हिस्सा राज्य खेल परिषद में जमा कराने को कहा है जिसकी एथलीट कड़ी निंदा कर रहे हैं। खेल एवं युवा विभाग के प्रमुख सचिव अशोक खेमका ने कहा , ''खिलाडिय़ों की पेशेवर खेलों या व्यवसायिक विज्ञापनों से होने वाली कमाई का एक तिहाई हिस्सा हरियाणा राज्य खेल परिषद में जमा किया जायेगा। इस राशि का इस्तेमाल राज्य में खेलों के विकास के लिये किया जायेगा।
खेमका कुछ साल पहले भूमि पंजीकरण विभाग में प्रमुख के कार्यकाल के दौरान सुर्खियों में आये थे जब उन्होंने रोबर्ट वाड्रा पर जमीन के सौदों में कथित अनियमितता का आरोप लगाया था। हालांकि यह सूचना अभी सरकारी वेबसाइट पर नहीं आयी है। इसमें कहा गया है , '' अगर खिलाड़ी को संबंधित अधिकारी की पूर्व अनुमति के बाद पेशेवर खेलों या व्यवसायिक प्रतिबद्धताओं में भाग लेते हुए ड्यूटी पर कार्यरत समझा जाता है तो इस हालत में खिलाड़ी की पूरी आय हरियाणा राज्य खेल परिषद के खाते में जमा की जायेगी। राज्य सरकार में विभिन्न विभागों से कार्यरत एथलीट जैसे पूर्व हाकी कप्तान सरदार सिंह और मुक्केबाज अखिल कुमार (मुक्केबाजी में राष्ट्रीय पर्यवेक्षक) ने फिलहाल इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एथलीटों ने कहा कि उन्हें अभी इस मुद्दे पर कोई अधिकारिक सूचना नहीं मिली है। हालांकि हरियाणा के कुछ एथलीट जो राज्य सरकार के विभागों में कार्यरत नहीं हैं , उन्होंने इस फैसले पर हैरानी व्यक्त की है। दोहरे ओलंपिक पदकधारी पहलवान सुशील कुमार ने कहा , '' मैंने अभी तक यह अधिसूचना नहीं देखी है , मुझे यह सिर्फ मीडिया रिपोर्टों से ही पता चल रहा है। मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि ओलंपिक खेलों में भाग ले रहे एथलीट पहले ही गरीब परिवारों से आते हैं। उन्होंने कहा , '' सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे एथलीट को प्ररेणा मिले। मैंने दुनिया में कहीं भी ऐसी नीति के बारे में नहीं सुना है। खिलाडिय़ों को बिना किसी तनाव के टूर्नामेंट में खेलना चाहिए। साथी पहलवान और ओलंपिक कांस्य पदकधारी योगेश्वर दत्त ने इस कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, 'इन अधिकारियों से भगवान हमें बचाये जो इस तरह के बेहूदे फैसले कर रहे हैं। उनका हरियाणा में खेलों के विकास में योगदान नगण्य रहा है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि वे राज्य में खेलों के पतन में बड़ी भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा , '' अब एथलीट अन्य राज्यों में चले जायेंगे और इसके लिये ये अधिकारी जिम्मेदार होंगे। हरियाणा सरकार पहले भी विवाद में फंस गयी थी जब उसने राष्ट्रमंडल खेलों में राज्य के पदक विजेताओं की ईनामी राशि घटाने का फैसला किया था। वहीं 26 अप्रैल को पुरस्कार वितरण समारोह कार्यक्रम को भी अनिश्चितकाल के लिये रद्द करना पड़ा क्योंकि खिलाडिय़ों ने इसके बहिष्कार की धमकी दी थी। 

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