साल 2030 तक दुनियाभर में दो करोड़ नौकरियां खा जाएंगे रोबोट

  • Posted on: 10 July 2019
  • By: admin
वॉशिंगटन। एक नए अध्ययन से पता चला है कि रोबोट साल 2030 तक दुनिया भर में मैनुफैक्चरिंग सेक्टर की 20 मिलियन से अधिक नौकरियों को खत्म कर देंगे। इससे सामाजिक असमानता और बढ़ जाएगी। बुधवार को जारी किए जाने वाले पूर्वानुमान में ऑटोमेशन और रोबोट्स की वजह से आर्थिक लाभ तो होगा, लेकिन लो-स्किल जॉब्स (कम कौशल वाली नौकरियों) के खत्म होने के कारण समाज में सामाजिक और आर्थिक तनाव और बढ़ेगा। रिपोर्ट में इन चिंताओं पर प्रकाश डाला गया है।
एक ब्रिटिश-आधारित शोध और परामर्श फर्म ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की तरफ से किए गए अध्ययन में कहा गया है कि रोबोट के उदय से नौकरी का विस्थापन दुनिया भर में या देशों के भीतर समान रूप से नहीं होगा।
अध्ययन में कहा गया है कि रोबोटों ने पहले से ही लाखों मैनुफैक्चरिंग सेक्टर की नौकरियां खत्म कर दी हैं और अब सर्विस में भी उनका विस्तार हो रहा है, जो कंप्यूटर विजन, स्पीच रिकग्निशन और मशीन लर्निंग में अच्छा काम कर रहे हैं।
अध्ययन में कहा गया है कि यहां तक कि एक ही देश में निम्न-कुशल क्षेत्रों में नौकरियों के खत्म होने की संख्या उच्च-कुशल क्षेत्रों में की तुलना में दोगुना अधिक होगी। यह शोध ऐसे समय में सामने आया है, जब सेल्फ-ड्राइविंग कारों और ट्रकों, रोबोट के खाना तैयार करने और ऑटोमेटेड कारखाने और गोदाम के ऑपरेशन्स जैसी तकनीक के उदय और रोजगार पर उसके प्रभाव पर गहन चर्चा हो रही है।
कई विश्लेषकों का कहना है कि ऑटोमेशन ने आमतौर पर विनाश की तुलना में अधिक रोजगार सृजन किया है। मगर, हाल के वर्षों में इस प्रवृत्ति ने एक कौशल अंतर पैदा किया है, जिसकी वजह से कई श्रमिकों की नौकरियां चली गई हैं। नवीनतम अध्ययन के अनुसार रोबोटाइजेशन की वर्तमान लहर अंतत: उत्पादकता और आर्थिक विकास को बढ़ा दे सकती है, जो लगभग उतने ही नए रोजगार पैदा करती है, जितने रोगजार खत्म करती है। पूर्वानुमान में शोधकर्ताओं ने कहा है कि उच्च उत्पादकता से 2030 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर रोबोटिक्स लाभांश मिलेगा। हमने पाया कि जहां दोहराए जाने वाले कार्यों की आवश्यकता होती है, वहां सबसे ज्यादा रोजगार प्रभावित होते हैं जैसे गोदाम का काम। वहीं, जिन कामों में रचनात्मकता या सामाजिक बुद्धिमत्ता की जरूरत है, वे आने वाले कई दशकों तक रोबोट से खत्म नहीं होगी।
अध्ययन में कहा गया है कि रिटेल, हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी और ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन और खेती सहित कई क्षेत्रों में रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अध्ययन के अनुसार, देश और क्षेत्रों के आधार पर इसका प्रभाव असमान होगा।
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