सरकारी अनुमान से अधिक दलहन आयात से दबाव में भाव

  • Posted on: 25 July 2019
  • By: admin
इंदौर। वित्त वर्ष 2018-19 में कुल 25.27 लाख टन दलहन आयात हुआ। इतने बड़े पैमाने पर आयात जारी रहने से आपूर्ति और उपलब्धता बढ़ गई है। नतीजतन मंडियों में सभी दलहन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम भाव पर बिक रहे हैं। इस साल खरीफ में दलहन का रकबा भी घटा है। केंद्र सरकार का दावा है कि 2018-19 में सरकारी स्तर पर दलहन का आयात नहीं किया गया, लेकिन व्यापारियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने निजी तौर पर भारी मात्रा में दलहन का आयात किया।
सरकार की तरफ से मात्रात्मक प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद दलहन का आयात जारी रहा। अप्रैल, 2018 में भारत सरकार ने दो लाख टन तक तुअर के आयात की अनुमति दी थी, जबकि अन्य दलहन का आयात कोटा 4 लाख टन तय किया गया था।
सरकार की तरफ से केवल दाल मिलर्स-प्रोसेसर्स को ही दलहन आयात की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन, कुल 6 लाख टन की अनुमोदित आयात मात्रा के मुकाबले अधिक दलहन का आयात किया गया। जिससे घरेलू बाजार में भाव पर दबाव बढ़ता गया।
2018-19 में दलहन आयात
देश आयात (लाख टन में)
म्यांमार 7.00
कनाडा 5.20
मोजाम्बिक 2.28
रूस 1.55
तंजानिया 1.18
करार के तहत आयात
भारत ने मोजाम्बिक के साथ 2015 में जो करार किया था, उसमें अगले पांच वर्षों के दौरान वहां से 7.50 लाख टन दलहन आयात की शर्त थी। उसी करार के तहत निजी कारोबारियों ने दलहन का आयात किया गया।
2019-20 की योजना
चालू वित्त वर्ष के लिए 4 लाख टन तुअर और 1.50-1.50 लाख टन मूंग व मसूर के आयात की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 1.50 लाख टन दलहन आयात का अतिरिक्त कोटा निर्धारित किया गया है।
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