संविधान में नहीं है डिप्टी सीएम या डिप्टी पीएम पद का जिक्र, जानिए कैसे हुई थी शुरुआत

  • Posted on: 10 June 2019
  • By: admin
नई दिल्ली। आंध्रप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां पांच डिप्टी सीएम नियुक्त किए गए हैं। मुख्यमंत्री वायएस जगनमोहन रेड्डी ने एससी, एसटी, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और कापू कम्युनिटी के लोगों को अपनी सरकार में विशेष प्रतिनिधित्व देने के लिए यह फैसला किया। अभी देश में 14 राज्य ऐसे हैं जहां डिप्टी सीएम नियुक्त किए गए हैं। इनमें गोवा और यूपी ऐसे हैं, जहां दो-दो उपमुख्यमंत्री हैं। वैसे संविधान में कहीं डिप्टी सीएम या डिप्टी पीएम जैसे पद का जिक्र नहीं है।
खास बात यह है कि डिप्टी सीएम या डिप्टी पीएम को कोई अतिरिक्त अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं। ये एक सामान्य मंत्री की तरह कार्य करते हैं। यानी विभिन्न दल अपने नेताओं को खास तवज्जो देने के लिए उन्हें डिप्टी बना देते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इसके पीछे गवर्नेंस की सहूलियत कम और पॉलिटिक्स ज्यादा होती है। जानिए देश में डिप्टी पीएम और डिप्टी सीएम पद से जुड़ी रोचक बातें-
सरदार वल्लभ भाई पटेल थे देश के पहले डिप्टी पीएम: देश में इस पद की शुरुआत डिप्टी पीएम से हुई थी।
सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के पहले डिप्टी पीएम थे। इसके बाद मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम भी डिप्टी पीएम रहे।
हालांकि देवीलाल पहले ऐसे नेता रहे, जिन्होंने 1989 में डिप्टी पीएम की बकायदा शपथ ली। संविधान में इस पद का कोई उल्लेखन नहीं होने से इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। तब केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह एक औपचारिक पद है और देवीलाल एक आम मंत्री की तरह ही काम करेंगे। आखिरी बार लालकृष्ण आडवाणी उपमुख्यमंत्री बने थे, जब देश में अटलबिहारी की सरकार थी। आडवाणी 5 फरवरी 2002 से 22 मई 2004 तक इस पद पर रहे।
एसएम कृष्णा थे देश के पहले डिप्टी सीएम: देवीलाल के डिप्टी पीएम बनने का मामला सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गया, लेकिन इसके बाद देश में डिप्टी सीएम का चलन शुरू हो गया। कर्नाटक ने देश को पहला डिप्टी सीएम दिया। 1994 में कांग्रेस की सरकार में एसएम कृष्णा को यह पद मिला। इसके बाद 2004 में सिद्धारमैया डिप्टी सीएम बने।
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