संदेश के सिरे

  • Posted on: 25 August 2018
  • By: admin
केंद्र सरकार ने वाट्सएप को सीधा संदेश दे दिया है। सोशल मीडिया कारोबार की धुरंधर फेसबुक के मातहत चलने वाली इस कंपनी को बता दिया गया है कि उसे भारतीय कानूनों के तहत चलना होगा। संदेश सेवा चलाने वाली इस कंपनी से कहा गया है कि वह भारत में अपनी एक इकाई खोले और यहां शिकायत प्रकोष्ठ भी बनाए। कैलिफोर्निया की इस कंपनी के सीईओ क्रिस डेनियल इन दिनों भारत आए हुए हैं और उन्हें यह बात खुद सूचना तकनीक मंत्री रविशंकर प्रसाद ने साफ तौर पर बता दी है।
पिछले दिनों यह पाया गया था कि देश में भीड़-हत्या के कई मामलों में अफवाह फैलाने के लिए वाट्सएप का इस्तेमाल हुआ है। इससे पहले इसके द्वारा तनाव फैलाने की कई खबरें भी आई थीं। इसी के बाद देश में इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों से आपातकालिक स्थितियों में सोशल मीडिया पर अस्थाई और तात्कालिक पाबंदी लगाने के विकल्पों पर राय भी मांगी गई थी। वाट्सएप ने भी अपनी तरफ से कुछ कदम उठाने की घोषणा की थी, जिसके तहत अगर किसी संदेश, तस्वीर या वीडियो को फॉरवर्ड किया जाता है, तो उसके ऊपर फॉरवर्ड लिखा होगा, जिससे यह पता चल सके कि यह भेजने वाले का मूल संदेश नहीं है और उसने इसे कहीं से प्राप्त किया है। लेकिन ऐसा नहीं माना जा सकता कि इस उपाय से अफवाहों का फैलना रुक जाएगा। दूसरे, बहुत आसानी से इसकी काट निकाली जा सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि जो समस्या है, उसका समाधान इसमें कहीं नहीं है। ऐसे मौकों पर जांच एजेंसियां हमेशा यह जानने की कोशिश करती हैं कि कोई अफवाह कहां से शुरू हुई थी? वाट्सएप जांच एजेंसियों को इसका कोई सूत्र नहीं देती। कंपनी का कहना है कि वह आजकल लोगों की निजता का ख्याल रखते हुए सारे संदेशों को एनक्रिप्टेड कर देती है या यूं कहें कि ऐसी कूटभाषा में बदल देती है, जिससे संदेश भेजने और देखने वाले ही उसे मूल रूप में प्राप्त कर पाते हैं, बीच में उसे कोई देख-समझ नहीं सकता। यानी खुद वाट्सएप भी नहीं जान पाती कि कौन से संदेश में क्या है और वह कहां से आकर कहां गया? हालांकि ये संदेश कितने एनक्रिप्टेड होते हैं, यह अभी बहुत साफ नहीं है, लेकिन भारत सरकार का आग्रह है कि वह ऐसा तरीका बनाए, जिससे किसी संदेश का मूल स्रोत पता लगाया जा सके। वाट्सएप ने अभी कोई वादा नहीं किया है, लेकिन समस्या का समाधान ढूंढऩे का आश्वासन जरूर दिया है। वाट्सएप अमेरिकी सरजमीं से चलने वाली कंपनी है, मगर भारत सरकार के आग्रह पर ध्यान देना उसकी मजबूरी है। भारत में उसके 20 करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ता हैं और इतने बड़े बाजार को कोई भी कंपनी नहीं खोना चाहेगी। 
 
Category: