व्हाट्सएप, स्काइप जैसी ओटीटी पर खुली बहस कराएगा ट्राई

  • Posted on: 10 February 2019
  • By: admin
नई दिल्ली। इंटरनेट पर वाट्सएप और स्काइप जैसे ओवर-द-टॉप (ओटीटी) सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनियों को नियामकीय ढांचे के दायरे में लाया जाए या नहीं, यह ऊहापोह फरवरी के अंत तक खत्म हो जाने की संभावना है। उम्मीद जताई जा रही कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) इस संबंध में अपने नियम 28 फरवरी तक तय कर लेगा। ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा ने कहा, हम जल्द इस पर खुली बहस कराएंगे। हमें उम्मीद है कि अगले महीने के अंत तक हम अपनी सिफारिशें जारी कर देंगे।
गूगल डुओ, फेसबुक, वट्सएप और स्काइप जैसी इंटरनेट से चलने वाली सेवाएं मोबाइल सर्विस कंपनियों की तरह ही कॉलिंग और मेसेजिंग की सुविधा भी दे रही हैं। यही वजह है कि पिछले साल नवंबर में ट्राई ने इन सेवाओं को नियामकीय ढांचे के तहत लाने पर विचार-विमर्श किया था। दूरसंचार कंपनियां लंबे समय से इन एप और ओटीटी सेवाओं को नियामकीय ढांचे के दायरे में लाने को लेकर बातचीत कर रही हैं। ट्राई ने इस संबंध में आम लोगों से भी राय मांगी है कि क्या इन पर भी वैसे ही नियम लागू किए जाने चाहिए, जो दूरसंचार कंपनियों पर लागू किए गए हैं।
असमान नियमों का आरोप
वाट्सएप और फेसबुक जैसी कंपनियां पहले ही निजी सूचनाओं की चोरी और फर्जी खबरों को लेकर नीति निर्माताओं की नजर में हैं। किसी भी तरह का नया नियामकीय ढांचा या लाइसेंस की जरूरत, ऐसी एप्स पर और दबाव बनाएंगी।
दूरसंचार सेवाप्रदाताओं के संघ सीओएआई के अनुसार लाइसेंस शुल्क, स्पेक्ट्रम, दूरसंचार उपकरण और सुरक्षा उपकरणों पर दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनियां बहुत निवेश करती हैं। साथ ही उन पर भारी-भरकम टैक्स भी लगता है। इसके उलट ये एप बिना किसी नियामकीय लागत के दूरसंचार कंपनियों की तरह ही वायस-वीडियो कॉल और डाटा सेवाएं मुहैया कराती हैं। यह असमानता है। ट्राई को लिखे पत्र में सीओएआई ने इन सेवाओं को लाइसेंसिंग व्यवस्था के दायरे में लाने की सिफारिश की है। दूसरी तरफ इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने ओटीटी सेवाओं को लाइसेंस या नियामकीय ढांचे के तहत लाए जाने का विरोध किया है।
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