वोडाफोन-आइडिया विलय को दूरसंचार विभाग की सशर्त मंजूरी

  • Posted on: 10 July 2018
  • By: admin
नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के विलय को सशर्त मंजूरी नयी दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का क्रेडिट कार्ड कारोबार देखने वाली इकाई एसबीआई कार्ड चालू वित्त वर्ष में चार नए उत्पाद पेश करेगी। क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी इकाई और बाजार में 74त्न हिस्सेदारी रखने वाली एसबीआई कार्ड 2018-19 में अपने कार्डधारकों की संख्या को बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है। वह इसमें गड़बड़ी के अनुपात को 1.9' पर लाने के लक्ष्य को लेकर चल रही है। 
एसबीआई कार्ड के प्रबंध निदेशक हरदयाल प्रसाद ने कहा कि मौजूदा समय में गड़बड़ी अनुपात दो प्रतिशत है जो उद्योग के अनुसार है। दे दी है। डीओटी ने स्पेक्ट्रम शुल्क के तौर पर दोनों कंपनियों से एकमुश्त 7200 करोड़ रुपये की मांग की है। जिसमें वोडाफोन को 3900 करोड़ और आइडिया को 3300 करोड़ रुपये जमा करने हैं। 
शुल्क जमा होने के बाद डीओटी की ओर से विलय को अंतिम मंजूरी दे दी जाएगी।
डीओटी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार राशि प्राप्त होने के बाद ही विभाग वोडाफोन इंडिया का लाइसेंस आइडिया सेल्युलर को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। लाइसेंस ट्रांसफर होने पर ही विलय की प्रक्रिया पूरी होगी। माना जाता है कि इन दोनों टेलीकॉम कंपनियों का मिलन देश की सबसे बड़़ी मोबाइल सर्विस कंपनी को जन्म देगा। इस विलय को रिलायंस जियो के आगमन से उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने के कदम के रूप में देखा जा रहा है जो बहुत कम समय में टेलीकॉम क्षेत्र में बाजार हिस्सेदारी के हिसाब से भारती एयरटेल के बाद दूसरे नंबर की बड़ी कंपनी बन गई है। इस वजह से वोडाफोन को आइडिया के साथ विलय के लिए मजबूर होना पड़ा। जियो के आने के बाद छोटी टेलीकॉम कंपनियां अपना कारोबार समेट चुकी हैं। 
जियो के आने से पहले तक भारती एयरटेल के बाद भारतीय मोबाइल सेवा बाजार में दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन थी। जबकि आइडिया तीसरे नंबर पर थी। वोडाफोन और आइडिया के विलय के परिणामस्वरूप एक ऐसी नई कंपनी का उदय होगा जिसका 63,000 हजार करोड़ रुपये की आमदनी के साथ भारतीय टेलीकॉम बाजार में 39 फीसद ग्राहकों तथा 42 फीसद राजस्व पर कब्जा होगा।
 
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