वस्त्र उद्योग के लिए नवोन्मेष संस्कृति, विभिन्न उत्पाद और नये बाजार को जोडऩा: एम. वेंकैया नायडू

  • Posted on: 10 January 2019
  • By: admin
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने वैश्विक बाजार में निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए वस्त्र उद्योग के लिए नवोन्मेष संस्कृति, विभिन्न उत्पाद  और नये बाजार को जोडऩे का आह्वान किया है। वे आज नई दिल्ली में वस्त्र उद्योग के लिए 'उपलब्धियां और आगे का रास्ता' एवं उत्कृष्टता के धागे पुरस्कार वितरण के लिए आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, वस्त्र राज्य मंत्री श्री अजय टमटा और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह समझते हैं कि भारत का निर्यात प्रदर्शन विभिन्न कारणों से अपनी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। उन्होंने कहा कि यह हमेशा के लिए व्यापार नहीं हो सकता है और उद्योग को इस अवसर पर आगे बढऩा है और यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत का निर्यात वर्तमान में लगभग पांच प्रतिशत से दोहरे अंक तक पहुंच जाये। उन्होंने कहा कि आपको अपने उत्पादों में विविधता और इन्हें नये बाजारों से जोडऩे की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत को प्रचुर मात्रा में कच्चे माल और कपड़ा मूल्य श्रृंखला के सभी क्षेत्रों में विनिर्माण की उपस्थिति का एक अनूठा लाभ है, श्री नायडू ने कहा कि वैश्विक बाजार में कारोबार करने वाली शीर्ष वस्तुओं के उत्पादों और निर्यात में अधिक हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए इस क्षेत्र को आपूर्ति श्रृंखला में सुधार करने, अनुसंधान पर ध्यान केन्द्रित करने और अधिक लागत अनुकूलन प्राप्त करने के लिए प्रवर्धन की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इस उद्योग के लिए पुरानी तकनीक को त्यागने और अपनी संरचना को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए यह एक आदर्श समय था, श्री नायडू ने कहा कि कच्चे माल की उपलब्धता, कम लागत और कुशल मानव संसाधन भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए एक अतिरिक्त लाभ थे जो वर्ष 2023 तक 223 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने की अपेक्षा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि बंगलादेश और वियतनाम से कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत के लिए वैश्विक बाजार में निर्यात को बनाये रखने के लिए गुणवत्ता को मुख्य आधार बनाना होगा।
वस्त्र उद्योग में तेजी लाने के लिए शत प्रतिशत एफडीआई और प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना की अनुमति देने जैसी सरकार द्वारा उठाये गये विभिन्न उपायों का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने सलाह दी कि उद्योग को भारतीय वस्त्रों और परिधान की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार के लिए नवोन्मेष और मूल्य संवर्धन पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नवोन्मेष एक कुंजी है यदि  हमें वैश्विक क्षेत्र में अपने पदचिन्हों का विस्तार करना है तो हमें नये और विशेष उत्पादों के साथ आगे आना होगा। उन्होंने नई तकनीक को अपनाकर जलविहीन रंगाई को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर वस्त्र उद्योग में उत्कृष्टता दिखाने वाले विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों को उत्कृष्टता के धागे पुरस्कार प्रदान किये।   
 
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