वल्र्ड बैंक के अनुसार घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार

  • Posted on: 10 April 2019
  • By: admin
वाशिंगटन। हाल के वर्षों में जोरदार घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज रही है, लेकिन इस दौरान निर्यात के मोर्चे पर कमजोरी नजर आई। भारत ने अपनी क्षमता का केवल एक तिहाई निर्यात किया। वर्ल्ड बैंक के एक अधिकारी ने ऐसा कहा। वल्र्ड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री (दक्षिण एशिया क्षेत्र) हंस टिमर ने कहा कि आम चुनाव के बाद भारत में बनने वाली अगली सरकार को निर्यात आधारित आर्थिक वृद्धि पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने भारतीय बाजारों को उदार बनाने के लिए किए गए प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि बाजार को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता है। टिमर ने से बातचीत में कहा, पिछले कुछ वर्षों में आपने देखा कि चालू खाते का घाटा बढ़ा है। यह संकेत देता है कि गैर-कारोबारी क्षेत्र यानी घरेलू क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हुई है। इसने निर्यात को ज्यादा मुश्किल बना दिया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि काफी हद तक घरेलू मांग पर आधारित रही। इसकी वजह से आयात दहाई अंकों में बढ़ा, लेकिन निर्यात में केवल 4-5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई।
घरेलू मांग की रफ्तार पर ब्रेक जरूरी
टिमर ने कहा कि हाल की महीनों में चीजें कुछ हद तक बदली हैं, लेकिन यदि आप व्यापक स्तर पर देखें तो चीजें नकारात्मक ही रही हैं।
वल्र्ड बैंक के अधिकारी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगली सरकार का ध्यान तेजी से बढ़ती घरेलू मांग पर ब्रेक लगाने पर होना चाहिए। टिमर ने कहा, भारत को निर्यात आधारित वृद्धि पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यही वह जगह है जहां आप अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा करते हुए उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।
आप प्रतिद्वंद्वियों और विदेशी ग्राहकों के साथ बातचीत करके जानकारी बढ़ा सकते हैं। टिमर ने कहा, भारत अपनी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल 10 प्रतिशत निर्यात करता है, जबकि उन्हें जीडीपी के 30 फीसदी तक निर्यात करना चाहिए। भारत एक बड़ा देश है। आमतौर पर एक बड़ा देश जीडीपी प्रतिशत के हिसाब से उतना निर्यात नहीं करता है जितना छोटे देश करते हैं। छोटे देश के बाजार ज्यादा खुले होते हैं।
 
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