राज्य वन सेवा प्रशिक्षुओं का उत्तर भारत का दौरा

  • Posted on: 25 May 2019
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शिमला। राज्य वन सेवा प्रशिक्षण कालेज, एस. एफ.एस.द्ध, देहरादून से हिमालयी वनस्पति, वन व वन्यप्राणी प्रबन्धन के अध्ययन हेतु, लगभग 40 प्रशिक्षुओं का दल, हिमाचल में शिमला, मनाली, सहित प्रदेश के अन्य स्थानों में, वन प्रबन्धन की बारीकियों का प्रशिक्षण लेने के लिए शिमला पहुँचा। कुनाल सत्यार्थी प्रीन्सीपल, सैन्ट्रल अकैडमी फॉर स्टेट फॉरेस्ट सर्विसीजद्ध़ व सरिता कुमारी, कोर्स डारेक्टर द्धकी अगुवाई में यह प्रशिक्षु, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब व जम्मू कश्मीर राज्यों के वनों का अध्ययन कर रहे हैं।
एस. एफ.एस, देहरादून में वर्ष 2018-20 बैच में चार राज्यों ओड़ीसा, कर्नाटका, छतीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश के प्रशिक्षु प्रशिक्षणरत हैं।
आज टालैण्ड शिमला स्थित वन मुख्यालय में इन प्रशिक्षओं को सम्बोधित करते हुए, अजय कुमार, प्रधान मुख्य अरण्यपाल ;हॉफद्ध हिमाचल प्रदेश ; डॉ सविता, प्रधान मुख्य अरण्यपाल, वन्य प्राणी द्ध, अजय श्रीवास्तवा, अतिरिक्त प्रधान मुक्ष्य अरण्यपाल (वन्य प्राणी), अनु नागर मुख्य अरण्यपाल, एच. आर. डी. ने हिमाचल प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र व वनों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। अनु नागर ने वन विभाग हिमाचल के अवलोकन के साथ-साथ वन विभाग की विभिन्न गतिविधियों से प्रशिक्षुओं को अवगत करवाया। डॉ सविता, प्रधान मुख्य अरण्यपाल, वन्य प्राणी द्ध -कम- मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक ने हिमाचल प्रदेश वन्य प्राणी प्रभाग व प्रदेश के वन्य प्राणी संरक्षित क्षेत्रों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि आज, वन विभाग को वन्य प्रणियों के संरक्षण के साथ-साथ वन्य जीव-मानव संघर्ष जैसी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रदेश में चल रही बन्दरों की समस्या व बन्दर -नसबन्दी कार्यक्रम की जानकारी भी प्रशिक्षुओं से साझा की। अजय कुमार, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (हॉफ) हिमाचल प्रदेश ने प्रशिक्षुओं को जैव-विविधता, वनों की सुरक्षा, व वन विभाग की विभिन्न गतिविधियों से अवगत करवाते हुए आह्वान किया कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों की पहचान कर किसी एक विषय में विशेषज्ञता प्राप्त करनी होगी तथा प्रशिक्षु अपने कार्य क्षेत्र में सत्यनिष्ठा के साथ कार्य करें ताकि वन प्रबन्धन में हो रहे निरन्तर बदलावों की आपूर्ति की जा सके।
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