राजस्थान में शिल्प की अनूठी परंपरा, अगली पीढ़ी तक संस्कारित रूप में पहुंचाना हमारा दायित्व:पाठक

  • Posted on: 25 June 2019
  • By: admin
जयपुर। उद्योग आयुक्त डॉ. कृष्णा कांत पाठक ने शिल्प गुरूओं से कहा है कि शिल्प ज्ञान के बीज का अगली पीढ़ी में बीजारोपण करके ही वे सही मायने में शिल्पाचार्य का दायित्व पूरा कर सकते है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में शिल्प की अनूठी और संस्कारित परंपरा रही है और इसे अगली पीढ़ी तक संस्कारित रूप मे पहुंचाना हमारा दायित्व हो जाता है।
डॉ. पाठक सोमवार को भारतीय शिल्प संस्थान और उद्यम प्रोत्साहन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय शिल्प शाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने झालाणा स्थित भारतीय शिल्प संस्थान परिसर में प्रदेश के जाने माने शिल्प गुरूओं और 150 से अधिक जिज्ञासुओं के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर शिल्प शाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि परंपरागत शिल्प से नई पीढ़ी को जोडऩे के उद्देश्य से उद्योग विभाग ने शिल्प गुरूओं और जिज्ञासुओं को साझा मंच उपलब्ध कराने की पहल की है। उन्होंने कहा कि शिल्प शाला पूरी तरह नि:शुल्क रखी गई है और केवल 200 रुपये पंजीयन शुल्क रखा गया है।
शिल्पशाला के प्रति जयपुरवासियों के रेस्पांस से उत्साहित होते हुए डॉ. पाठक ने कहा कि सीमित समय में इस तरह का आयोजन किया गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शिल्प गुरूओं के सानिध्य से कलाएं अंकुरित, प्रस्फूरित और संवंद्र्धित होगी। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा पूरी तरह से गुरूकुल का माहौल बनाया गया है ताकि सीखने और सिखाने का वातावरण बन सके।
भारतीय शिल्प संस्थान की निदेशक तूलिका गुप्ता ने उद्योग विभाग की पहल और विजन की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थानी हस्तशिल्प और शिल्पिकारों की देश-दुनिया में विशिष्ठ पहचान है। उन्होंने कहा कि शिल्पशाला अभिनव प्रयोग है और इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।
राजसिको की एमडी शकुंतला सिंह ने कहा कि इससे नया सीखने का अवसर मिलेगा। शिल्पगुरू अवधेश पांडे ने कहा कि राजस्थान की अनूठी सांस्कृतिक विरासत है और रोजगार व निर्यात में हस्तशिल्प की प्रमुख भूमिका है। कुंदन मीनाकारी के शिल्पगुरू सरदार इन्दर सिंह कुदरत ने राजस्थान की विश्वपटल पर पहचान है।
उद्यम प्रोत्साहन संस्थान के ईडी एस एस शाह ने बताया कि राज्य से 3700 करोड़ के हस्तशिल्प का निर्यात होता है। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले जयपुर को इंटरनेशनल क्राफ्ट सिटी का दर्जा दिया गया है। उन्होंने ओढऩी, जाजम जैसे हस्तशिल्प के लुप्त होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से इन कलाओं को संबल मिलेगा।
पांच दिवसीय शिल्प शाला में शिल्प गुरूओं में कुंदन मीनाकारी के नेशनल अवार्डी सरदार इन्दर सिंह कुदरत, मीनकारी में राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त प्रीति काला, मिनियश्चर पेंटिंग में नेशनल अवार्डी बाबू लाल मारोठिया, लाख शिल्प में नेशनल अवार्डी नवाज अहमद, मिट्टी के बर्जन/टेराकोटा में राधेश्याम व जीवन लाल प्रजापति, ब्लू पॉटरी में संजय प्रजापत और गौपाल सैनी, ज्वैलरी वुडन क्राफ्ट में भावना गुलाटी, हाथ ठप्पा छपाई में नेशनल अवार्डी संतोष कुमार धनोपिया, हैण्ड ब्लॉक प्रिंटिंग में नेशनल अवार्डी अवधेश पाण्डेय, पेपरमैशी में सुमन सोनी, मेहंदी में प्रीतम जिरोतिया और मनीषा रेनीवाल, हाथ कागज में अनिल पारीक, कार्विंग ज्वैलरी में दीपक पालीवाल, चर्मशिल्प में जितेन्द्र यादव और संतोष सैनी, तारकशी में रामस्वरुप शर्मा, लैण्ड स्केप पेंटिंग में शमीम निलोफर नीलम नियाज औा उस्ताकला में संतोष पुरोहित शिल्पशाला में शिल्प की बारीकियां सिखाएंगे।
शिल्पशाला के प्रति जयपुरवासियों में जबरदस्त रेस्पांस देखा गया है। 147 जिज्ञासुओं ने विभिन्न शिल्पों की बारिकियां समझने के लिए पंजीकृत कराया है। सबसे अधिक 29 युवाओं ने हैण्ड ब्लॉक प्रिंटिंग में रूचि दिखाई है। लैण्ड स्केप पेंटिंग और ब्लू पॉटरी में 18-18, मीनाकारी और मिनियश्चर पेंटिंग में 15-15, क्ले पॉटरी में 13 पेपरमैशी में 11 टाई डाई में 10 और लाख शिल्प में 8 ने पंजीयन कराया है।
इस अवसर पर उद्योग प्रोत्साहन संस्थान के एमडी सर्व श्री संजीव सक्सैना, बुनकर संघ के एमडी आरके आमेरिया, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पी आर शर्मा, पीएल शर्मा, केके पारीक, डीडी मीणा, सुभाष शर्मा, चिरंजी लाल आदि के साथ ही राजसिको, डा, आरएसडीसी आदि के अधिकारी व भारतीय शिल्प संस्थान के संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में अभिभावक भी उपस्थित रहे।
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