रक्षा मंत्रालय की तैयारी, आयुध फैक्टरी में निजी साझेदारी

  • Posted on: 25 August 2019
  • By: admin
नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय आयुध फैक्टरियों को निजी क्षेत्र और विदेशी कंपनियों के साथ साझीदारी में रक्षा उत्पादन करने की मंजूरी प्रदान करेगा। इसके लिए उन्हें सरकार के नियंत्रण से मुक्त कर सार्वजनिक उपक्रम बनाए जाने की कवायद चल रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से आयुध फैक्टरियों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। देश में 41 आयुध फैक्टरियां हैं, लेकिन उनकी स्थिति अच्छी नहीं है।
ये सभी फैक्टरियां रक्षा सामग्री बनाने में लगी हैं लेकिन उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी नहीं होने के कारण सुरक्षा बलों ने इनसे खरीद कम कर दी है। दूसरे, यदि सरकार इनका आधुनिकीकरण करती है तो उसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है।
इसलिए सरकार इनके निगमीकरण की तैयारी में है। सरकार की मंशा है कि इन पर नियंत्रण कम किया जाए और कारपोरेट क्षेत्र की तर्ज पर ये फैक्टरियां अपने लिए संसाधन खुद जुटाएं और अपने उत्पादनों को देश-विदेश के बाजार में बेचें।
सार्वजनिक उपक्रमों की श्रेणी
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पहले चरण में इन्हें सरकारी नियंत्रण से हटाकर सार्वजनिक उपक्रमों की श्रेणी में रखा जाएगा। इन्हें अपने निर्णय करने के अधिकार प्रदान किए जाएंगे। आधुनिकीकरण के लिए सरकार इन्हें बजट नहीं देगी, बल्कि ये अपने संसाधनों से या कर्ज लेकर खुद जुटाएंगे। वे चाहे हैं तो किसी भारतीय निजी कंपनी के साथ या विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ साझीदारी में अपना नया उपक्रम भी शुरू कर सकेंगे। 
प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इन फैक्टरियों को प्रतिस्पर्धा में लाने, उत्पादों की गुणवत्ता को बाजार के अनुरूप सुनिश्चित करने, नई तकनीकों एवं प्रौद्यौगिकी के इस्तेमाल, निर्यात पर ज्यादा ध्यान देने और अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी है कि उन्हें अपने निर्णय खुद लेने के अधिकार दिए जाएं। इसके अलावा सभी 41 फैक्टरियों को आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के अधीन संचालित किया जाता है।
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