युवाशक्ति को भगवान से साक्षात्कार करा रहा है इस्कॉन मंदिर

  • Posted on: 10 May 2018
  • By: admin
जयपुर। भौतिक सुखों का आनंद क्षणिक भर रहता है लेकिन भगवान के नामों का कीर्तन करने से इंसान को अजीवन अलौकिक सुख की प्राप्ती होती है। दुनियाभर में बने  इस्कॉन मंदिर इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए लोगों को सच्ची प्रभु भक्ति में लीन रहकर ज्ञान का आलौकिक मार्ग दिखाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जयपुर के मानसरोवर के इस्कॉन रोड पर धौलाई के पास स्थित इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष पंचरत्न दास का कहना है भारत में मथुरा के वृदांवन, मुंबई, कोलकाता और जयपुर में इस्कॉन मंदिर है।
श्रील प्रभुपाद 1970 में अमेरिका के न्यूयार्क शहर गए थे। वहां 17-18 साल प्रचार करने के बाद सबसे पहला इस्कॉन मंदिर उन्होंने वहां स्थापित कराया। प्रभुपाद अमेरिका के युवाओं को हैप्पी बनाना चाहते थे इसलिए मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए ये नियम है नशा नहीं करेंगे,जुआ नहीं खेलेंगे,अनैतिक संबंध, मांस, मदिरा इत्यादि से दूर रहेंगे।
इन्हीं उद्देश्यों से इस्कॉन मंदिर की स्थापना हुई जहां कृष्ण-बलराम की मूर्ति को स्थापित करा कर उनकी पूजा की जाती है। जयपुर के इस्कॉन मंदिर का नाम गिरधारी बलदाऊजी मंदिर है। यहां रोजाना शाम को भगवान की आरती होती है जिसमें काफी संख्या में भक्त मौजूद रहते हैं।  विशेषकर रविवार को भक्त भगवान के दर्शन कर प्रसाद लेकर जाते हैं। 
मंदिर में लगती है यूथ क्लास-पंचरत्न दास ने कहा कि जप करने से व्यक्ति का ईश्वर के प्रति प्रेम व आदरभाव जागृत होता है और वह सदमार्ग पर चलता है। युवाओं को इस ओर प्रेरित करने के लिए मंदिर में यूथ क्लास लगती है जिनमें भगवत गीता के बारे में समझाते हैं। युवाओं को सरल मार्ग से ईश्वर को समझने के लिए हम भगवत गीता और भागवतम का प्रचार करते हैं, क्योंकि भगवान कृष्ण ने कहा है जो भागवत का प्रचार करते हैं वो मुझे सबसे अधिक प्रिय है। साधे शब्दों में कहें तो इस्कॉन मंदिरयुवाशक्ति को भगवान से साक्षात्कार करा रहा है।
तन्मयता से करता हूं इस्कॉन मंदिर की सेवा:ज्योति महेशजी
इस्कॉन जयपुर परिचालन समिति के चेयरमैन ज्योति महेशजी ने बताया कि इस मंदिर की सेवा करने का सौभाग्य मुझे मिला है। करीब करीब हर धार्मिक कार्यों में पूरी तन्मयता से भाग लेता हूं। इसके पीछे हमारे पूर्वजों की प्रेरणा रही है इसलिए इस पर मैं दिल खोलकर सहयोग करता हूं। जयपुर के इस्कॉन मंदिर में हमने जिस तरह के स्टैण्ड ग्लास लगवाएं हैं आपको शायद ही किसी अन्य मंदिर में देखने को मिले। इन स्टैण्ड में दशावतार, मेन गेट पर जय-विजय, गोपियां, श्रीकृष्ण लीला, कालिया मर्दन, वृदांवन के वन, चैतन्य महाप्रभु को देखकर आपको आत्मिक सुख मिलेगा।
 
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