मोबाइल को आधार से डीलिंक कराने पर ही देना होगा नया KYC

  • Posted on: 25 October 2018
  • By: admin
नई दिल्ली। आधार नंबर जारी करने वाली संस्था यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने कहा है कि मोबाइल उपभोक्ताओं को उसी सूरत में दोबारा केवाईसी (नो युअर कस्टमर) कराने की आवश्यकता होगी यदि वे अपने सिम कार्ड को आधार से डीलिंक कराना चाहते हैं।
यूआआडीएआइ और दूरसंचार विभाग ने संयुक्त बयान में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने आधार के मामले में दिए अपने निर्णय में कहीं नहीं कहा है कि आधार नंबर के जरिये जिन सिम कार्डों का ई-केवाईसी हुआ है, वे बंद हो जाएंगे।
सरकार के दोनों विभागों ने बृहस्पतिवार को जारी इस बयान में स्पष्ट किया है कि मौजूदा सूरत में किसी भी सिम के बंद होने की कोई आशंका नहीं है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी नहीं कहा है कि मोबाइल कंपनियां अपने ई-केवाआसी डाटा को डिलीट कर दें। सुप्रीम कोर्ट ने केवल इतना ही कहा है कि यूआआडीएआआ किसी भी तरह के ऑथेंटिकेशन का डाटा छह महीने से अधिक न रखे। यह बाध्यता अदालत ने यूआआडीएआआ पर लगायी है, न कि टेलीकॉम कंपनियों पर। इसलिए मोबाइल कंपनियों को अपने ई-केवाइसी डाटा को डिलीट करने की आवश्यकता नहीं है।
बयान के मुताबिक, इसके विपरीत दूरसंचार विभाग और यूआइडीएआआ मिलकर एक व्यवस्था तैयार कर रहे हैं जिसके तहत एक मोबाइल एप के जरिये नए सिम कार्ड जारी करने के लिए ई-केवाइसी की सरल प्रक्रिया होगी। इसके तहत फोटो के जरिये व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
एलपीजी सब्सिडी के लिए आधार सत्यापन जारी रहेगा
आधार जारी करने वाले यूआइडीएआइ ने कहा है कि लाभार्थी अपने घर पर माइक्रो-एटीएम से आधार सत्यापन करके एलपीजी सब्सिडी और अन्य सरकारी भुगतान पहले की तरह प्राप्त करते रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विधिक राय है कि बैंक आधार इनैबल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) सुविधा का अबाध रूप से इस्तेमाल कर सकेंगे और आधार का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे लाभार्थी अपने घर पर सरकारी स्कीमों का लाभ आसानी से पा सकेंगे। एईपीएस नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) द्वारा विकसित पेमेंट सिस्टम है। बैंक और वित्तीय संस्थान अपने बिजनेस कॉरस्पोंडेंट सर्विस सेंटर के जरिये लाभार्थियों को आधार नंबर और ऑनलाइन सत्यापन करके लेनदेन कर सकते हैं।
Category: