महीने भर में बाकी राज्यों में भी लागू हो जाएगा इंट्रा-स्टेट E-way bill

  • Posted on: 10 May 2018
  • By: admin
नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत माल परिवहन के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था का तेजी से विस्तार हो रहा है। देशभर में अंतर-राज्यीय (इंटर-स्टेट) कारोबार के लिए ई-वे बिल लागू होने के महज एक महीने के भीतर 18 राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों में इंट्रा-स्टेट (राज्य के भीतर) ई-वे बिल की व्यवस्था को लागू किया जा चुका है। अगले एक महीने के भीतर बाकी राज्यों में भी इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल की व्यवस्था लागू हो जाएगी। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि हर दिन 12 लाख से अधिक ई-वे बिल जारी हो रहे हैं। टैक्स अधिकारियों ने प्रभावी ढंग से ई-वे बिल की व्यवस्था का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है।
जिन राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्रों में अब तक इंट्रा स्टेट ई-वे बिल सिस्टम लागू नहीं किया गया है, वहां एक महीने के भीतर यह काम कर लिया जाएगा। इसके लिए केंद्र ने अपने टैक्स अधिकारियों को राज्यों के टैक्स अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रहने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि जीएसटी कानून के तहत 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य के माल की ढुलाई के लिए ई-वे बिल अनिवार्य किया गया है। जीएसटी काउंसिल ने 10 मार्च को हुई बैठक में एक अप्रैल से देशभर में इंटर-स्टेट कारोबार के लिए ई-वे बिल लागू करने का फैसला किया था।
इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल का क्रियान्वयन विभिन्न राज्यों में चरणबद्ध ढंग से लागू किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड समेत अब तक 18 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों ने इंट्रा-स्टेट कारोबार के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था लागू कर दी है। ई-वे बिल की व्यवस्था से कर चोरी रुकने की उम्मीद जताई जा रही है। इसे कारोबारियों के लिए भी मुफीद साबित हो रहा है।
जीएसटी रिटर्न मिसमैच पर नोटिस भेजना शुरू नई दिल्ली, प्रेट्र : जीएसटी रिटर्न में अंतर को लेकर अधिकारियों ने संबंधित कंपनियों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। नोटिस उन कंपनियों को भेजे जा रहे हैं जिनके भुगतान किए गए टैक्स और अंतिम बिक्री रिटर्न में अंतर मिला है।
इसके अलावा ऐसी कंपनियां जिनके जीएसटीआर-1 के आंकड़े जीएसटीआर-2ए से अलग हैं, उन्हें भी नोटिस भेजा जा रहा है। करीब 34 फीसद कंपनियों के आंकड़ों में अंतर पाया गया है। मार्च में राजस्व विभाग ने अपने विश्लेषण में पाया था कि इन कंपनियों ने पिछले साल जुलाई से दिसंबर के दौरान करीब 34,400 करोड़ रुपये कम टैक्स का भुगतान किया।
इन कंपनियों ने जीएसटीआर-3बी के माध्यम से 8.16 लाख करोड़ रुपये के कर का भुगतान किया, जबकि जीएसटीआर-1 के विश्लेषण से उनकी कर देनदारी 8.50 लाख करोड़ रुपये बनती है।
सूत्रों के मुताबिक, ऐसी कंपनियों को नोटिस देकर रिटर्न में अंतर का कारण स्पष्ट करने को कहा गया है। तय समय में नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर माना जाएगा कि कंपनी के पास कोई वाजिब कारण नहीं है और उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
Category: