भारतीय कौशल विकास विश्वविद्यालय विधेयक-2017 ध्वनिमत से पारित

  • Posted on: 10 March 2017
  • By: admin
जयपुर। राज्य विधानसभा ने मंगलवार को भारतीय कौशल विकास विश्वविद्यालय, जयपुर विधेयक, 2017 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। 
श्रम एवं नियोजन मंत्री डॉ. जसवन्त सिंह ने विधेयक सदन में रखा। उन्होंने विधेयक के उद्देश्यों तथा कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे का यह विजन है कि राज्य के प्रत्येक नौजवान को इस लायक बनाया जाए, जिससे उसे नौकरी तथा काम मिल सके। भारतीय कौशल विकास विश्वविद्यालय विधेयक इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए लाया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा वर्तमान में एक लाख 85 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
डॉ.सिंह ने बताया कि सामान्य डिग्री लेने पर कौशल विकास नहीं होता है, जबकि कौशल विकास में डिग्री प्राप्त करने पर न केवल युवाओं के कौशल में विकास होगा बल्कि प्रत्येक क्षेत्र में वह नौकरी प्राप्त कर पाएगा। इस विश्वविद्यालय के माध्यम से युवाओं को वोकेशनल डिग्री में स्नातक तथा स्नात्तकोत्तर की डिग्री मिल पाएगी। 
उन्होंने सदन में बताया कि निजी क्षेत्र में स्थापित इस विश्वविद्यालय का संचालन राजेन्द्र एंड उर्सला जोशी चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा किया जाएगा तथा उपर्युक्त विश्वविद्यालय की अवसंरचना की पर्याप्त जांच विशेषज्ञ समिति के द्वारा की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजेन्द्र एंड उर्सूला जोशी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा पहले इस परिसर में इस्ट्ीटयूट का संचालन किया जाता था, जिसकी विभाग द्वारा गठित टीम ने जांच की थी।  परिसर में स्थापित मशीनरी तथा ड्यूल सिस्टम से प्रभावित होकर टीम ने इस परिसर में विश्वविद्यालय के संचालन का निर्णय लिया।
डॉ. सिंह ने बताया कि रिसर्जेंट राजस्थान 2015 में राज्य सरकार तथा भारतीय स्किल डवलपमेंट कैंपस के साथ इस संबंध में एमओयू किया गया। श्रम एवं नियोजन मंत्री ने बताया कि 4 अगस्त 2015 को कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता विभाग के गठन के पश्चात 7 अक्टूबर 2016 की अधिसूचना के माध्यम से विभाग को निजी एवं सरकारी क्षेत्र में विश्वविद्यालय खोलने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में बजट घोषणा की गई थी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह कैंपस 30 एकड़ भूमि में है जहां एक वर्ष में न्यूनतम 10 हजार वर्गमीटर निर्माण किया जाना है। डॉ. यादव ने बताया कि इस विश्वविद्यालय में युवाओं को ड्यूल ट्रेनिंग सिस्टम के तहत प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जर्मन आधारित इस सिस्टम में युवाओं को पढ़ाई तथा प्रेक्टिकल शिक्षा एक साथ दी जाएगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पर सरकार का नियन्त्रण भी रहेगा। बोर्ड के प्रबंधन में एक कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता विभाग का सदस्य रहेगा। साथ ही विश्वविद्यालय के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य सरकार की सहमति के बिना नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित समिति विश्वविद्यालय में अध्यापन, परीक्षा, अनुसंधान संबंधी विभिन्न विषयों पर सिफारिश करेगी तथा सिफारिश की अनुपालना समयबद्ध सुनिश्चित करेगी।
उन्होंने बताया कि प्रबंधक मंडल द्वारा किए गए नियम राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाएंगे तथा उन्हें राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विशेष परिस्थितियों में विश्वविद्यालय का विघटन भी कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विश्वविद्यालय में यूजीसी के मापदंडों के अनुसार आरक्षण का प्रावधान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस विश्वविद्यालय का राज्य की जनता के कौशल और शैक्षणिक विकास में योगदान होगा। इससे पहले सदन ने विधेयक को जनमत जानने हेतु परिचालित करने के संशोधन प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।
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