फ्लैट कल्चर व प्रदूषण से लोग एलर्जी के शिकार

  • Posted on: 10 May 2018
  • By: admin
जयपुर। शहरी संस्कृति और मल्टी स्टोरी फ्लैट कल्चर के चलते आज आबादी के 20 से 30 फीसदी लोग एलर्जी के शिकार हो रहे हैं। एलर्जी का सबसे बढ़ा कारक डस्ट माइट है। ये महानगरीय आरामतलब रहन-सहन और बढ़ते प्रदूषण का परिणाम है। बहुमंजिला फ्लैट कल्चर में सूर्य की रोशनी नहीं आने से डस्ट माइट पनपता है। बच्चे बीमार होते हैं,
लेकिन घबराने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि अत्याधुनिक जांच सुविधा और नई इम्यूनो थैरेपी से इसका इलाज होता है। देश के प्रमुख एलर्जी रोग विशेषज्ञों ने रविवार को आंचल हॉस्पिटल की ओर से आयोजित वर्कशॉप में यह जानकारी दी।
150 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने भाग लिया। आयोजन सचिव डॉ. एमके गुप्ता ने बताया कि सत्रों में एलर्जी कैसे, क्यों होती है, जांच, उपचार, स्किन फूड ड्रग आदि एलर्जियो, इम्यून थैरेपी पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।
बेंगलुरू एलर्जी सेंटर के प्रमुख डॉ. नागेन्द्र प्रसाद ने बताया कि एलर्जी के कारण 15 से कम उम्र के 20 प्रतिशत बच्चों को बार-बार जुकाम, गला खराब, पसलियां चलना आदि परेशानियां घेर रही है। मेट्रो हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीटयूट नोएडा के डॉ. एमके अग्रवाल, डॉ. एबी सिंह दिल्ली, डॉ. नागार्जुन चेन्नई, डॉ. एसएन गौड़ ने विभिन्न तरह की जांचों के बारे में बताया।
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