फरवरी की बिक्री में मारुति ऑल्टो ने मारी बाजी

  • Posted on: 25 March 2019
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नई दिल्ली। सबसे ज्यादा यात्री वाहनों (पीवी) की बिक्री के मामले में मारुति सुजुकी इंडिया की एंट्री लेवल की कार ऑल्टो ने फरवरी में सबको पीछे छोड़ दिया है। कंपनी ने पिछले महीने 24,751 यूनिट ऑल्टो की बिक्री की है। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के छह मॉडल पिछले महीने सबसे ज्यादा बिकने वाले यात्री वाहनों के 10 मॉडल्स में से शीर्ष छह स्थानों पर काबिज रहे।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सियाम) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक ऑल्टो ने मारुति सुजुकी की सेडान डिजायर से पहला स्थान छीन लिया, जो पिछले वर्ष फरवरी में बिक्री के मामले में पहले स्थान पर रही थी। इस वर्ष फरवरी में डिजायर को 15,915 यूनिट बिक्री के साथ चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा है।
सियाम के मुताबिक मारुति सुजुकी की हैचबैक स्विफ्ट फरवरी में दूसरे स्थान पर रही है। कंपनी ने इस वर्ष हैचबैक स्विफ्ट के 18,224 यूनिट की बिक्री की। पिछले वर्ष फरवरी में स्विफ्ट तीसरे स्थान पर रही थी। इस वर्ष फरवरी में तीसरे स्थान पर रही प्रीमियम हैचबैक बलेनो के 17,944 यूनिट बिके। कंपनी ने पांचवें स्थान पर रही नई वैगनआर के 15,661 यूनिट की बिक्री की, जबकि छठे स्थान पर रही विटारा ब्रेजा के 11,613 यूनिट फरवरी में बिके। इस वर्ष फरवरी में सातवें स्थान पर काबिज ह्युंडई मोटर इंडिया लिमिटेड की इलीट आइ-20 को 11,547 ग्राहकों ने पसंद किया। आठवें स्थान पर भी ह्युंडई की ही एसयूवी क्रेटा रही, जिसके 10,206 यूनिट बिके। सियाम के मुताबिक 9,065 यूनिट बिक्री के साथ ह्युंडई मोटर की कंपैक्ट कार गै्रंड आइ10 नौवें स्थान पर रही।
इस वर्ष फरवरी में शीर्ष 10 में मारुति सुजुकी और ह्युंडई मोटर के अलावा एकमात्र मॉडल टाटा मोटर्स का रहा। कंपनी के हैचबैक टियागो के 8,286 यूनिट की बिक्री इस वर्ष फरवरी में हुई। इसने पिछले वर्ष फरवरी में शीर्ष 10 में शामिल महिंद्रा एंड महिंद्रा के बोलेरो को बाहर कर दिया।
ईवी के चक्कर में एलपीजी से चूक रही सरकार
इंडियन ऑटो एलपीजी कोलीशन (आइएसी) ने कहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के चक्कर में सरकार एलपीजी जैसे स्वच्छ ईंधनों की अनदेखी कर रही है। आइएसी के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ईवी को 10,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देना स्वागत योग्य कदम है। लेकिन तस्वीर का बड़ा पहलू देखने का मतलब यह कतई नहीं कि हम 25 वर्ष आगे की ही सोचें। अगर हम वर्तमान की बात करें, तो सरकार के लिए बेहतर यह होगा कि वह सभी स्वच्छ ईंधन को बराबरी की नजर से देखे और उनके लिए अनुकूल नीतियां बनाए।
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