प्रदूषण की चपेट में आकर चमक खोता जा रहा ताजमहल

  • Posted on: 10 May 2018
  • By: admin
यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर में शामिल ताजमहल इन दिनों प्रदूषण की चपेट में आकर अपनी चमक खोता जा रहा है। प्रदूषण का इतना असर हो चुका है कि इसके संगमरमर का रंग बदल रहा है। यहां बनीं शाहजहां व मुमताज की कब्रों का रंग पीला हो गया है। यह हाल तब है जब ये कब्रें वर्ष में केवल 3 दिन के लिए ही खुलती हैं। पर्यावरण विद एमसी मेहता ने इसके संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना है कि गैस व अन्य प्रदूषित चीजों से ताज दम तोड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस पर बुधवार को अहम सुनवाई होना है।
450 पेड़ काटने पर कोर्ट ने लगाई थी फटकार-ताजमहल के आसपास 80 किमी दायरे में मौजूद 450 पेड़ काटने की बात पर पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने नाराजग़ी जताई थी। इन पेड़ों को काटने की अनुमति की याचिका पर कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या ताजमहल को खत्म करने का इरादा है। अगर ऐसा है तो इसके लिए अलग से याचिका दायर की जाए। सरकार का कहना था कि दिल्ली से मथुरा तक रेल यातायात को दुरुस्त करने की जरूरत है। इसके लिए मथुरा से दिल्ली तक अतिरिक्त रेल लाइन बिछाने की योजना पर सरकार काम कर रही है।
सरकार ने लगभग 450 पेड़ चिन्हित किए जिन्हें काटने के बाद ही रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हो सकता है। बेंच ने तल्ख रवैये में केंद्र से कहा कि आपने ताजमहल की तस्वीर देखी है। अगर नहीं तो इंटरनेट पर एक बार जरूर देखें। उनका कहना था कि ये बेशकीमती धरोहर पहले ही दम तोडऩे की कगार पर है।
पुरातत्व विभाग का ये है कहना
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) विभाग तहखाना बंद रहने, धूल और नमी के चलते यह स्थिति होने की बात कर रहा है। ताज में शाहजहां और मुमताज की मुख्य कब्रें तहखाने में स्थित हैं। मुख्य मकबरे में उनके ठीक ऊपर इनकी प्रतिकृति है। मुख्य कब्रें लंबे समय पहले आम सैलानियों के लिए बंद कर दी गई थीं। अब यह शाहजहां के उर्स के दौरान ही खोली जाती हैं।
काले और भूरे दागों से उड़ती ताज की रंगत
पिछले दिनों उर्स शुरू होने पर यह कब्रें खुलीं, तो उनके संगमरमर पर पीलापन छाया हुआ था। नीचे से लेकर ऊपर तक यही स्थिति थी। तहखाने की दीवारों के कुछ पत्थरों का भी यही हाल था। कुछ पत्थरों पर काले व भूरे रंग के दाग भी नजर आए। एएसआइ की रसायन शाखा ने इस स्थिति पर विचार किया है। उर्स खत्म होने के बाद तहखाने का निरीक्षण कर मडपैक करने या नहीं करने पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि उर्स के दौरान गंदे हुए तहखाने के हिस्सों को मडपैक से साफ किया जाएगा। एएसआइ के विशेषज्ञों के अनुसार ताज के तहखाने में नमी की समस्या रहती है। संगमरमर पर समय के साथ भी पीलापन आता है।
दावे कैसे-कैसे
ताजमहल के बिगड़ते स्वरूप में पीछे अलग-अलग कारण बताए गए। जुलाई 2016 में पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि कीड़े की एक प्रजाति के कारण ताजमहल का हिस्सा मटमैला हो रहा है। उन्होंने कहा था कि यह तात्कालिक प्रभाव है और साधारण धुलाई के बाद संगमरमर का असली रंग बहाल हो जाएगा। राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में पर्यटन मंत्री ने कहा कि ताजमहल के रंग में परिवर्तन सरकार के ध्यान में है। यह परिवर्तन जीओल्डीसिरोनॉमस नाम के कीड़े के त्यागे गए मल और गंदगी के कारण हो रहा है। मंत्री ने हालांकि यह भी कहा है कि यह अस्थायी असर है। प्रभावित सतह की साधारण सफाई और धुलाई के बाद संगमरमर का असली रंग बहाल हो जाएगा।
कीड़े के प्रजनन से संबंधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व विभाग इस पर नजर रखे हुए है। पर्यावरणीय क्षति पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की ओर से हो रही कार्रवाई के बारे में शर्मा ने कहा कि पुरातत्व विभाग स्मारक के संरक्षण की देखरेख में जुटा हुआ है।
करेंगे मुआयना-पुरातत्वज्ञ रसायन अधीक्षण डॉ. एमके भटनागर का कहना है कि हम जब मुख्य मकबरे में काम करेंगे, तब तहखाने को भी देखा जाएगा। उर्स के बाद इसका मुआयना किया जाएगा। अगर जरूरत होगी तो मडपैक करेंगे।
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