पंद्रह जून से आसान नहीं होगा थर्ड पार्टी वाहन बीमा करवाना

  • Posted on: 10 June 2018
  • By: admin
नई दिल्ली। वाहनों का थर्ड पार्टी बीमा कराना 15 जून के बाद आसान नहीं होगा। सार्वजनिक माल और यात्री वाहनों का बीमा तभी हो सकेगा जब इन वाहनों फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) प्रस्तुत किया जाए। निजी यात्री वाहनों के लिए पीयूसी अनिवार्य होगा। सरकार ने बीमा कंपनियों से कहा है कि वे इन दस्तावेजों के बगैर किसी भी मोटर वाहन का थर्ड पार्टी बीमा कतई न करें। इस संबंध में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से सभी इंश्योरेंस कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को पत्र लिखा गया है। पत्र में 10 अगस्त, 2017 को एमसी मेहता बनाम भारत सरकार व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है
कि उक्त केस में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी बीमा कंपनियों को ऐसे वाहनों का नया बीमा अथवा पुरानी बीमा पॉलिसी का नवीकरण न करने का निर्देश दिया था जिनके वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) न हो।
साथ ही इस बात की याद भी दिलाई गई है कि वैध रूप से पंजीकृत सभी वाहनों के बीमा के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट होना भी आवश्यक है। मंत्रालय ने बीमा कंपनियों को 15 जून तक इन निर्देशों को लागू कर मंत्रालय को अवगत कराने की ताकीद की है। गौरतलब है कि सार्वजनिक माल और यात्री वाहनों को हर साल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होता है। जबकि निजी वाहनों का फिटनेस पूरी पंजीकरण अवधि के लिए वैध होता है।
कंपनियां नए आदेश से परेशान
मंत्रालय के इस पत्र से बीमा कंपनियां परेशान हैं लेकिन परिवहन विशेषज्ञों ने इस पर खुशी के साथ हैरानी भी जाहिर की है। दरअसल, बीमा कंपनियां अभी इस मामले में काफी ढीला रुख अपनाती रही हैं। नए वाहनों के बीमा में तो सब ठीक होता है क्योंकि नए वाहन में फिटनेस सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती है। लेकिन बीमा पॉलिसी के नवीकरण के मामलों में कंपनियां सिर्फ तभी फिटनेस सर्टिफिकेट और पीयूसी के लिए जोर देती हैं जब पिछली बीमा पॉलिसी की अवधि समाप्त हो गई हो।
इससे नहीं होगा कोई खास सुधार
दूसरी ओर विशेषज्ञ इसलिए हैरान हैं कि मंत्रालय इतने दिनों तक क्यों खामोश था। इंडियन फाउंडेशन आफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के संयोजक एस. पी. सिंह ने कहा कि पीयूसी और फिटनेस सर्टिफिकेट पर जोर देना अच्छी बात है। परंतु जिस तरह राज्यों में फिटनेस सर्टिफिकेट और शहरों में पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं, उसे देखते हुए बीमा की खातिर इनकी अनिवार्यता लागू करने से भी कोई फर्क पड़ेगा, इसमें संदेह है।
ज्यादातर शहरों में वाहन प्रदूषण जांच का तंत्र पुरातन और कामचलाऊ है जिससे उत्सर्जन की सही माप नहीं होती। इसी प्रकार फिटनेस जांच के नाम पर भी महज खानापूरी की जाती है। कई मर्तबा तो ये प्रमाणपत्र घर बैठे मिल जाते हैं।
जब तक इन प्रणालियों का आधुनिकीकरण और डिजिटाइजेशन नहीं होता और इनके परिणाम सेंट्रल पोर्टल पर नहीं डाले जाते तब तक ऐसे निर्देशों का वास्तविक लाभ मिलने वाला नहीं है।
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