नेक, यूजीसी की भी रेटिंग होनी चाहिए:मल्होत्रा

  • Posted on: 25 November 2017
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जयपुर। भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो.वीके मल्होत्रा ने कहा है कि नेक, यूजीसी सहित अन्य संस्थाओं की भी रेटिंक होनी चाहिए, जिससे पता चल सके कि वे किस तरह क्या काम कर रहे हैं? यदि अच्छा काम कर रहे हैं तो उन्हें स्वायत्ता दी जानी चाहिए, नहीं तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। मल्होत्रा 'शिक्षा की स्वायत्ता: चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में परिष्कार कॉलेज मानसरोवर में सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि देश का निर्माण अच्छी संस्थाओं के निर्माण से ही होता है, ऐसे में देश में अच्छी संस्थाओं का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि प्राइमरी शिक्षा में कुछ मेहनत होती है, सैकण्डरी में कुछ ज्यादा मेहनत होती है, लेकिन उच्च शिक्षा में बहुत कम मेहनत होती है, ऐसे में उच्च शिक्षा में अधिक मेहनत की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए राजस्थान राज्य अधीनस्थ व मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष नंदसिंह नरूका ने कहा कि जीविकोपार्जन के लिए पढ़ते हैं, लेकिन हमें जीवन के लिए भी पढऩा चाहिए।
नई शिक्षा नीति में भाषा पर चर्चा नहीं हो रही:पाण्डेय
अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक प्रो.नन्दकिशोर पाण्डेय ने पुराने विश्वविद्यालयों की चर्चा करते हुए कहा कि तक्षशीला और नालंदा विश्वविद्यालय उस दौर में सरकार की मदद से नहीं चलते थे, बल्कि वहां के आस-पास के तीन सौ गांवों की आर्थिक मदद से उन विश्वविद्यालयों का संचालन होता था,जिससे वे विश्वविद्यालय स्वायत्त थे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति बन रही है, लेकिन दुर्भाग्य है कि इसमें भाषा पर चर्चा नहीं हो रही है। पाण्डे ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं का संचालन नौकरशाहों से होने के बजाए शिक्षाविदों से होना चाहिए ताकि शिक्षा लोगों को जोड़ सकें। संगोष्ठी को संगोष्ठी निदेशक डॉ.दिलीप गोयल, परिष्कार कॉलेज ऑफ ग्लोबल एक्सीलेंस के निदेशक डॉ.राघव प्रकाश, शिक्षा की स्वायत्ता शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयोजक दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने भी सम्बोधित किया। संगोष्ठी की सह सचिव डॉ.प्रणु शुक्ला ने बताया कि दो दिवसीय संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों ने शिक्षा की स्वायत्ता पर प्रकाश डाला।
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