नहीं कह सकते कि NBFC crisis कब खत्म होगा:शक्तिकांत दास

  • Posted on: 25 July 2019
  • By: admin
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि यह बताना मुश्किल है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का मौजूदा संकट कब तक खत्म होगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक दूसरे सेक्टरों तक इसकी आंच पहुंचने से बचाने का भरपूर प्रयास कर रहा है।
दिसंबर, 2018 में आरबीआई का गवर्नर बनने के बाद मीडिया को दिए पहले इंटरव्यू में दास ने कहा,
नियामक और एक मौद्रिक प्राधिकरण के रूप में हमें हालात की लगातार निगरानी करनी होगी और सतर्क रहना होगा।
हमें परिस्थितियों का विश्लेषण करना होगा और समीक्षा करनी होगी। मध्यम और लंबी अवधि के लिए हमने कुछ लक्ष्य तय कर रखे हैं।
दास ने कहा कि यदि कोई मसला गंभीर रूप लेता है, तो एक भी दिन गंवाए बगैर हम उच्च स्तरीय आंतरिक समीक्षा करेंगे। एनबीएफसी के बारे में उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों से एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा है, जब हमने अंतरिक तौर पर इस मसले पर चर्चा न की हो, चाहे बात किसी एक एनबीएफसी की हो या फिर इस पूरे सेक्टर की। इनकी पहचान बैलेंस शीट के आकार, संचालन के तौर-तरीके और क्रेडिट व्यवहार के संदर्भ में की गई है। हमारी पर्यवेक्षण टीमें उनकी निगरानी कर रही हैं।
नीतिगत दरों में और कटौती संभव-देश की आर्थिक स्थिति पर दास ने कहा कि आगामी आंकड़ों पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। मसलन, महंगाई के आंकड़े कैसे रहते हैं और आर्थिक विकास की स्थिति कैसी रहती है। उन्होंने कहा, 'मंदी के संबंध में मैं यह नहीं बता सकता कि ऐसी स्थिति कब तक रहेगी। ऐसा करना संभव नहीं है।
लेकिन, यदि समग्र रुझान पर गौर करें तो हमें लगता है कि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के आंकड़े कुछ हद तक बेस इफेक्ट से और कुछ हद तक निवेश व मांग में कमी से प्रभावित रहे। मौद्रिक नीति समिति की बैठक के ब्योरे में हमने इनका जिक्र किया है। नीतिगत ब्याज दरों के मामले में दास ने कहा कि इसमें कम से कम 0.25 प्रतिशत और कटौती की गुंजाइश बनती है।
नकदी जरूरत से ज्यादा
बैंकिंग सिस्टम में नकदी की कमी पर आरबीआई के गवर्नर ने कहा, हमने सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी (नकदी) सुनिश्चित की है। कुछ समय पहले तक जरूर नकदी की कमी थी, लेकिन पिछले एक से डेढ़ महीने के दौरान स्थिति पलट गई है। फिलहाल सिस्टम में एक खरब रुपए से ज्यादा की सरप्लस लिक्विडिटी है।
दास ने कहा कि आरबीआई पक्का करेगा कि बैंकों को पर्याप्त फंड मुहैया कराया जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि सिस्टम में जरूरत से ज्यादा नकदी होने के बावजूद संभव है कि एक या दो बैंकों में लिक्विडिटी को लेकर कुछ मसले हों।
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की पहली जिम्मेदारी महंगाई को काबू में रखना है, लेकिन चूंकि देश की अर्थव्यवस्था भी इन दिनों सुस्त पड़ती नजर आ रही है, लिहाजा इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन, इसके लिए कई संस्थाओं को अपनी-अपनी भूमिका सही तरीके से निभानी होगी।
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