देश के 91 बड़े जलाशयों में सामान्य से 80 फीसद कम पानी, 11 में जीरो स्टोरेज

  • Posted on: 25 June 2019
  • By: admin
नई दिल्ली। इस बार मानसून देर से आया है। उसके बाद उसकी चाल भी धीमी बनी हुई है। मौसम विज्ञान विभाग के डाटा के मुताबिक इस साल 84 फीसद उपखंडों में कम बारिश दर्ज की गई है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक देश के प्रमुख 91 जलाशयों में से 80 फीसद में सामान्य से कम पानी है। 11 जलाशयों में पानी का भंडारण शून्य फीसद है। इससे गंभीर जलसंकट की आशंका बढ़ गई है।
मौसम विभाग ने रविवार को कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, मराठवाड़ा और विदर्भ के अधिकतर हिस्सों में मानसून आगे बढ़ा है। देश में बारिश का मौसम एक जून से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलता है, लेकिन 22 जून तक मानसून में औसतन 39 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है।
कहां कितनी बारिश दर्ज
ओडिशा और लक्षद्वीप उपखंडों में सामान्य बारिश दर्ज की गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वी राजस्थान में ज्यादा बारिश दर्ज हुई है जबकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बहुत ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र सहित चार उपखंडों में बेहद कम बारिश हुई है। इन क्षेत्रों के जलाशयों में भंडारण बिलकुल निचले स्तर पर पहुंचने के कारण यहां सूखे जैसी स्थिति है। पूर्वी मध्य प्रदेश उपखंड में भी बेहद कम वर्षा दर्ज हुई है। मध्य भारत के गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ उपखंडों में भी कम वर्षा दर्ज की गई है। चक्रवात वायु ने जरूर बारिश की कमी से राहत दिलायी है। जल संकट से जूझ रहे चेन्नाई, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल उपखंड में करीब 38 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई।
अब तक केवल इतनी ही बारिश
देश में अब तक (एक से 23 जून तक) औसत बारिश केवल 70.9 मिमी ही हो पाई है जबकि देखा जाए तो इस समय तक सामान्य बारिश का आंकड़ा 114.2 मिमी है। यह सामान्य से 38 फीसद कम है। लगभग हर राज्य में औसत से कम बारिश है। उत्तर प्रदेश में 54.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 19.7 मिमी पानी बरसा है। यह सामान्य से 64 फीसद कम है। दिल्ली में 83 फीसद कम बारिश हुई है। मध्य प्रदेश और झारखंड में 53 फीसद जबकि पश्चिम बंगाल में 51 फीसद कम बारिश हुई है। बिहार में सामान्य से 34 फीसद कम बारिश दर्ज की गई है।
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