ड्रोन तकनीक में विश्व का नेतृत्व कर सकता है भारत

  • Posted on: 10 November 2018
  • By: admin
नई दिल्ली। सवा सौ करोड़ की आबादी की पहुंच में ड्रोन कृषि से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक ड्रोन तकनीक भारत की सवा सौ करोड़ की आबादी की जिंदगी से जुडऩे की क्षमता रखती है। इसका सामाजिक स्तर पर अहम और प्रभावी इस्तेमाल कर पूरी दुनिया के सामने ये उदाहरण पेश कर सकता है। हालांकि भारत से पहले दक्षिण अफ्रीका और स्विट्जरलैंड जैसे देश इन कामों में ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं।
ड्रोन का इस्तेमाल-हाल ही में देश में संपन्न हुए नवरात्र दुर्गा पूजा, दशहरा और रामलीला जैसे आयोजनों में ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी के लिए किया गया। इतना ही नहीं आने वाले दिनों में रेलवे ट्रेकों की निगरानी भी इसके ही जरिए की जा सकती है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर चप्पे चप्पे की निगरानी रखना पुलिस के भी बूते के बाहर की बात है। यही वजह है कि इन सभी जगहों के लिए आने वाले समय में ड्रोन एक कारगर तरीका साबित होंगे। कृषि क्षेत्र में ड्रोन-भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में इसकी हिस्सेदारी 18 फीसद और 50 फीसद कार्यबल इसी क्षेत्र में लगा हुआ है। दिसंबर, 2017 में महाराष्ट्र सरकार ने वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम के साथ साझेदारी कर मुंबई में ड्रोन गतिविधियों को बढ़ावा देने का केंद्र बनाया है। इस केंद्र से शुरूआत में राज्य के दो जिलों में ड्रोन मैपिंग का काम होगा। मैपिंग परियोजना में रबी की फसल की कटाई तक ड्रोन की मदद से फसलों, मिट्टी, जमीन की उर्वरक क्षमता, बीजों, कीटों, कीटनाशक और खाद से संबंधित जानकारी इक_ी की जाएगी। इसके बाद मोबाइल एप, रेडियो व अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से किसानों तक बेहतर फसल उत्पादन की कृषि की सटीक और सहायक जानकारी पहुंचाई जाएगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं में ड्रोन-लोक स्वास्थ्य में ड्रोन अहम भूमिका में हो सकते हैं। एक सरकारी सर्वे के मुताबिक भारत में प्रत्येक दस में से सात बच्चे को समय पर टीकाकरण नहीं मिल पाता है। इससे निपटने के लिए सरकार ने महत्वाकांक्षी परियोजना इंद्रधनुष पेश की है। लेकिन बावजूद इसके कई जिलों के दूरदराज व पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को समय पर दवाएं और टीके पहुंचने के बाद भी बच्चों को आधारभूत स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
लिहाजा इनकी पूर्ति का उचित प्रबंध होना जरूरी है। ड्रोन के जरिए टीका व दवाओं की डिलीवरी इन सुदूर क्षेत्रों में मौजूद स्वास्थ्य केंद्रों तक समय पर पहुंचाई जा सकती है। ड्रोन के जरिए ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों में रक्त की पूर्ति भी की जा सकती है। दक्षिण अफ्रीका में रवांडा जैसे कुछ देश इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं।
मुश्किलें भी कम नहीं
ड्रोन तकनीक में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए सरकार को ड्रोन उड़ाने की नीति में कुछ अहम बदलाव करने होंगे।
विभिन्न श्रेणी के ड्रोन में दो किग्रा से 20 किग्रा तक भार क्षमता सीमित है।
ड्रोन का परिचालन सिर्फ दिन में ही किए जाने का प्रावधान है।
ड्रोन तकनीक के व्यावसायिक इस्तेमाल की मंजूरी सिर्फ विजुअल लाइन ऑफ साइट (450 मीटर) के लिए मिली है।
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