ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल में सरकार ने दी राहत

  • Posted on: 25 June 2018
  • By: admin
नई दिल्ली। जीएसटी के तहत ई-वे बिल से परेशान हो रहे ट्रांसपोर्टरों को सरकार ने कुछ राहत दी है। अलग-अलग राज्यों में कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों के लिए सरकार ने नए नियम जारी किए हैं। ऐसे ट्रांसपोर्टरों को अब अलग-अलग राज्यों के लिए कई ई-वे बिल जेनरेट करने की आवश्यकता नहीं होगी। लेकिन यह सुविधा प्राप्त करने के लिए उन्हें एक यूनिक कॉमन एनरोलमेंट नंबर प्राप्त करना होगा।
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करके कहा है कि ऐसे ट्रांसपोर्टर जो एक से अधिक राज्यों में पंजीकृत हैं और एक ही परमानेंट एकाउंट नंबर का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अब अलग-अलग राज्यों के लिए ई-वे बिल जेनरेट करने की आवश्यकता नहीं होगी।
ऐसे ट्रांसपोर्टर यूनिक नंबर लेने के लिए अपने किसी भी गुड्स एंड सविर्स टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (जीएसटीआइएन) का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद ट्रांसपोर्टर अपने किसी भी अन्य जीएसटीआइएन का आगे इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। यूनिक नंबर के लिए आवेदन जीएसटी ईएनआर-2 के जरिये किया जा सकेगा।
ट्रांसपोर्टरों को अभी ई-वे बिल जेनरेट करने के बाद एक फाइनल रिपोर्ट जमा करनी होती है। रिपोर्ट में इस बात का ब्यौरा होता है कि जिन वस्तुओं के लिए टैक्स जमा किया गया है, उसकी डिलीवरी कर दी गई है। इसके आधार पर ही माल पाने वाले कारोबारी के टैक्स असेसमेंट का वेरिफिकेशन किया जाता है।
जानकारों का मानना है कि विभिन्न राज्यों में पंजीकृत ट्रांसपोर्टरों के लिए अलग-अलग ई-वे बिल जेनरेट करना काफी दिक्कत भरा काम काम हो रहा था। सभी ट्रांसपोर्टरों को अलग-अलग राज्यों में उस राज्य से संबंधित जीएसटीआइएन से लॉगिन कर ई-वे बिल जेनरेट करने पड़ते थे। लेकिन अब यूनिक कॉमन नंबर का इस्तेमाल कर वे पूरे देश के लिए ई-वे बिल जेनरेट कर पाएंगे।
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