जन-स्वास्थ्य की नई चुनौतियां

  • Posted on: 25 November 2017
  • By: admin
भारत के गरीब राज्यों में कुपोषण के परिणामों तथा डायरिया जैसे साधारण रोगों से लोगों की मौत आम खबर रही है। लेकिन अब चिंताजनक सूचना यह है कि इन राज्यों में लाइफ स्टाइल मर्ज से भी लोगों की बड़ी संख्या में मौत होने लगी है। पहले ऐसी मौतें अपेक्षाकृत विकसित राज्यों में होती थीं। तो जाहिर है, भारत में जन-स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। मंगलवार को जारी हुई 'इंडिया स्टेट-लेवल डिजीज बर्डन इनिशटिव्स रिपोर्ट' के मुताबिक हृदय रोग और सांस संबंधी बीमारियों के चलते पिछड़े राज्यों में अब बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं।
जबकि वहां टीबी और डायरिया जैसी पुरानी बीमारियों से लोगों के पीडि़त होने का सिलसिला भी जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक सभी राज्यों में बीमारियों के पैटर्न में भारी बदलाव हुआ है। कुछ राज्यों में बीमारियों के पैटर्न में बदलाव का यह दौर 1986 से शुरू हुआ। कुछ राज्यों में 2010 के बाद से ऐसे बदलाव देखे गए। लाइफ स्टाइल संबंधी बीमारियों से सबसे पहले प्रभावित होने वाले राज्यों में केरल, तमिलनाडु, गोवा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब शामिल थे। धीरे-धीरे कई दूसरे राज्य इस श्रेणी में आए। अब इन बीमारियों के शिकार होने का आंकड़ा बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और ओडीशा में भी बढ़ा है। इन राज्यों की कुल आबादी 59 करोड़ से ज्यादा है। पूरे देश के तौर पर देखें, तो भारत में 2003 में यह बदलाव शुरू हुआ। 
रिपोर्ट में 1990 से लेकर 2016 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक 'बच्चों और मां के कुपोषण के चलते बीमारियों के आंकड़ों में 1990 के बाद से लगातार गिरावट आई है, लेकिन 2016 में भी कुल बीमार हुए लोगों में इन बीमारियों से पीडि़त लोगों पीडि़त लोगों की हिस्सेदारी 15 फीसदी के करीब रही।  2016 में भारत में मां और बच्चे के कुपोषण से पैदा होने वाली बीमारियों का आंकड़ा चीन की तुलना में 12 गुना अधिक रहा। दक्षिणी सूबे केरल में कुपोषण के चलते होने वाली बीमारियों का आंकड़ा कम है, लेकिन यह भी चीन से 2.7 गुना अधिक है। तो कुल सूरत यह उभरती है कि भारत में पौष्टिक आहार ना मिलने और स्वच्छता की कमी से होने वाली बीमारियां मोटे तौर पर बदस्तूर जारी हैं, जबकि शारीरिक श्रम ना करने या नई जीवन शैली की वजह से होने वाली बीमारियां भी तेजी से फैलने लगी हैं।
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