चीन के साथ बेहतर रिश्तों के लिए सीमाई क्षेत्रों में शांति अनिवार्य:भारत

  • Posted on: 25 April 2018
  • By: admin
बीजिंग। डोकलाम गतिरोध के बाद संबंधों को बेहतर बनाने के मकसद से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुई निर्णायक वार्ता के बीच भारत ने कहा है कि चीन के साथ द्विपक्षीय रिश्तों के सुगम विकास के लिए सीमाई क्षेत्रों में शांति बनाए रखना अनिवार्य शर्त है। सुषमा और वांग ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग और आतंकवाद से मुकाबले पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया और जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास जैसी अन्य वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलजुलकर प्रयास करने की भी बात कही।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए सुषमा कल चार दिन के दौरे पर यहां आईं। द्विपक्षीय मुलाकात से पहले वांग ने बीजिंग स्थित दिआयुतई स्टेट गेस्ट हाउस में सुषमा की अगवानी की। वांग को पिछले माह स्टेट काउंसिलर बनाया गया है जिसके बाद वह चीन के पदक्रम में शीर्षस्थ राजनयिक बन गए हैं। साथ ही वह विदेश मंत्री के पद पर भी बने हुए हैं। स्टेट काउंसिलर बनाए जाने के बाद वांग से सुषमा की यह पहली मुलाकात है। मुलाकात के दौरान वांग ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग चीनी शहर वुहान में 27-28 अप्रैल को अनौपचारिक शिखर वार्ता करेंगे। मुलाकात के दौरान अपनी शुरूआती टिप्पणियों में सुषमा ने वांग को स्टेट काउंसेलर बनाए जाने तथा भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि, 'इससे पता चलता है कि आपके नेतृत्व को आपकी क्षमता पर कितना भरोसा है .... और मुझे लगता है कि आपकी नयी जिम्मेदारियां भारत - चीन संबंधों को निश्चित रूप से सुधारेंगी।Ó
सुषमा ने कहा कि, 'हम भारत-चीन सहयोग को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए चीनी नेतृत्व के साथ मिल कर काम करेंगे।Ó मुलाकात के बाद वांग के साथ एक प्रेस बयान में सुषमा ने कहा कि, विभिन्न क्षेत्रों में हमारे संबंधों की प्रगति के प्रयास करते हुए हमने रेखांकित किया कि द्विपक्षीय संबंधों के सुगम विकास के लिए भारत - चीन सीमाई इलाकों में अमन-चैन बनाए रखना एक अनिवार्य शर्त है।
पिछले साल डोकलाम गतिरोध के बाद दोनों देशों ने संवाद बढ़ाया है ताकि तनाव कम हो और विभिन्न स्तरों पर बातचीत से संबंधों में सुधार हो। सुषमा ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि दो प्रमुख देशों एवं बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर भारत-चीन संबंधों का स्वस्थ विकास एशियाई सदी के उभार के लिए अहम है। उन्होंने कहा कि, 'हमारा मानना है कि हमारे बीच की साझा चीजें हमारे मतभेद पर भारी हैं और हमारे मतभेदों के परस्पर स्वीकार्य समाधान के लिए हमें एक - दूसरे से मिलती - जुलती चीजों पर ही आगे बढऩा चाहिए।'
सुषमा ने कहा कि मोदी-शी शिखर वार्ता की तैयारियों के तहत उन्होंने पिछले दिसंबर में नई दिल्ली में हुई उनकी पिछली मुलाकात के बाद संबंधों में हुई प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि वांग से मुलाकात के दौरान उन्होंने दोनों देशों को करीब लाने के लिए लोगों से लोगों का संपर्क मजबूत करने पर चर्चा की। सुषमा ने 2018 में ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों पर आंकड़े साझा करने की व्यवस्था को बहाल किए जाने की पुष्टि के लिए भारत द्वारा चीन की तारीफ से उन्हें अवगत कराया। विदेश मंत्री ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल फिर से शुरू हो जाएगी। चीनी विदेश मंत्री वांग ने कहा कि चीन एवं भारत सहयोग में स्वाभाविक साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि सुषमा के साथ उन्होंने दुनिया और क्षेत्र के मौजूदा हालात पर चर्चा की। वांग ने कहा, 'चीन और भारत वैश्विक प्रभाव वाले दो प्रमुख देश हैं। दोनों देशों पर यह जिम्मेदारी है कि वे संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र केंद्रित बहुपक्षीय प्रणाली बरकरार रखें, संयुक्त रूप से डब्ल्यूटीओ केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का संरक्षण करें और मिलकर आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और अन्य वैश्विक चुनौतियों से मुकाबला करें।'
उन्होंने कहा कि इस साल चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के समापन की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति शी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद अहम फोन आया। वांग ने कहा कि इस फोन कॉल से दोनों देशों के बीच वार्ता प्रक्रिया में सकारात्मक माहौल पैदा हुआ। 
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