गौरीकुंड हाइवे से जुड़ेगा बदरीनाथ हाइवे, 15 साल से था इंतजार

  • Posted on: 10 February 2019
  • By: admin
रुद्रप्रयाग। गौरीकुंड हाइवे और बदरीनाथ हाइवे को जोडऩे वाली बहुप्रतीक्षित बाईपास योजना का दूसरा चरण शुरू होने की उम्मीद बलवती होने लगी है। केंद्र ने इसके लिए 920 मीटर लंबी सुरंग के निर्माण की सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। माना जा रहा कि यह प्रदेश की सबसे लंबी सड़क सुरंग होगी। इससे जहां रुद्रप्रयाग शहर में यात्रा सीजन के दौरान लगने वाले जाम से निजात मिलेगी। वहीं, बीते डेढ़ दशक से बाईपास की राह देख रहे स्थानीय लोगों का इंतजार भी खत्म हो जाएगा।
रुद्रप्रयाग शहर को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए 2004-05 में बाईपास योजना को स्वीकृति मिली थी। इसके लिए बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) को 53 करोड़ की धनराशि भी जारी कर दी गई थी। इसके तहत प्रथम चरण में चार किमी लंबी सड़क और दो पुलों का निर्माण कर बदरीनाथ हाइवे को गुलाबराय से जवाड़ी होते हुए लोक निमार्ण विभाग कॉलोनी के पास गौरीकुंड हाइवे से जोड़ा गया।
दूसरे चरण में गौरीकुंड हाइवे से सुरंग निकालकर चोपता-पोखरी मार्ग से पुल के जरिये बदरीनाथ हाइवे को जोड़ा जाना था। लेकिन, पूरा बजट न मिलने समेत अन्य तकनीकि कारणों से इस पर कार्य शुरू नहीं हो सका। वर्तमान में वन-वे सिस्टम से ट्रैफिक का संचालन हो रहा है।
बदरीनाथ और अगस्त्य मुनि से आने वाले सभी वाहन बाईपास होकर श्रीनगर या फिर रुद्रप्रयाग आ रहे हैं। जबकि श्रीनगर से आने वाले वाहन रुद्रप्रयाग शहर से होकर बदरीनाथ और गौरीकुंड की तरफ जा रहे हैं।
भूगर्भीय सर्वेक्षण की औपचारिकता पूरी
दूसरे चरण में रुद्रप्रयाग बाईपास लोक निर्माण विभाग कॉलोनी के पास से 920 मीटर लंबी सुरंग के जरिए रुद्रप्रयाग-चोपता-पोखरी मोटर मार्ग पर बेलणी चौराहे से जुड़ेगा। यहां अलकनंदा नदी पर पुल का निर्माण कर इसे बदरीनाथ हाइवे से जोड़ा जाएगा।
जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि शासन की ओर से बीआरओ को वन भूमि स्थानांतरण और योजना की डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरंग निर्माण के लिए भूगर्भीय सर्वेक्षण समेत कई औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। लिहाजा, जल्द दूसरे चरण का काम शुरू होने की उम्मीद है।
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