कैसे मिले बांधों का समुचित लाभ

  • Posted on: 13 October 2011
  • By: gaurav

देश की भलाई के लिए हमारी केंद्र और राज्य सरकारों ने पिछले समय में बांधों के निर्माण और बारिश के पानी को व्यवस्थित ढंग से संरक्षण करने के लिए एक बड़ी राशि का निवेश किया है। यह संरक्षित जल वास्तव में एक अनमोल स्रोत है, जो पनबिजली ऊर्जा केंद्रों, कृषि भूमि और हमारे घरों तक जल की उपलब्धता सुनिश्चित करता है। बहरहाल, बांधों के साथ अब समस्या यह है कि उनमें गाद भर गई है जिसके चलते बांध बनाने के उद्देश्य पर ही ग्रहण लग गया है। पानी में डूबी रहनी वाली मिट्टी के बांधों में जम जाने के चलते बांध की जल भंडारण क्षमता कम हो जाती है। हर साल बारिश के मौसम में मिट्टी जमने की प्रक्रिया तेज होती जाती है, जिसके फलस्वरूप बांधों की जल संग्रहण क्षमता अत्यंत कम हो जाती है। 

 
इसके परिणामस्वरूप बारिश के दिनों में बांधों का जल खतरे के निशान के ऊपर जल्दी पहुंच जाता है। ऐसा बांधों में मिट्टी के जमने के कारण होता है। उस समय जल स्तर की माप सही नहीं हो सकती, वह वास्तव में भ्रामक होती है। इसके चलते बांध से जुड़े अधिकारी बांध से शुद्ध पानी नदियों में छोडऩे के लिए मजबूर हो जाते हैं। निराशाजनक बात है कि इससे नदियों में बाढ़ आ जाती है और किनारों पर रहने वाले सैकड़ों, हजारों परिवारों का जीवन खतरे में पड़ जाता है और फसलों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर संपत्ति की भी हानि होती है।
 
इसका दूसरा दुष्परिणाम यह होता है कि बांधों से निकला कीचड़ युक्त जल पनबिजली ऊर्जा केंद्रों तक पहुंच जाता है जिससे ऊर्जा प्रणाली को नुकसान पहुंचता है और फलस्वरूप बिजली उत्पादन कम हो जाता है। लगतार मिट्टी का जमाव स्वयं बांधों की उम्र कम कर देता है। बांधों में जमा होने वाली यह मिट्टी बड़ी उपजाऊ होती है और इसीलिए कृषि के लिए मुफीद मानी जाती है। अगर हम समय-समय पर इस जमी हुई मिट्टी को निकालने का कोई उपाय कर पाएं तो यह देश में खेती योग्य जमीन को नया जीवन प्रदान कर सकता है। भविष्य में बांधों को ऐसा बनाया जाना चाहिए कि उनमें जमी मिट्टी को समय-समय पर निकालने की सहज सुविधा हो। इससे बांधों की उम्र बढ़ जाएगी और उनकी जल ग्रहण क्षमता भी कम नहीं होगी। इसका एक और बड़ा लाभ यह होगा कि गर्मियों में पानी की किल्लत से बचा जा सकता है। बांधों में जमा अतिरिक्त जल हमेशा उपलब्ध रहेगा जो लोगों की प्यास बुझाने के साथ-साथ खेती की सिंचाई की जरूरत भी पूरी करेगा। इस तरह पनबिजली परियोजनाओं को ऊर्जा उत्पादन के लिए स्वच्छ जल भी उपलब्ध रहेगा।                                          - नवीन शर्मा
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