कर्जमाफी योजना के क्रियान्वयन के लिये जिला स्तरीय कमेटी का गठन

  • Posted on: 10 May 2018
  • By: admin
जयपुर। सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक ने बताया कि वर्ष 2018-19 के बजट में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे द्वारा सहकारी बैंकों से जुड़े किसानों के लिये कर्जमाफी की?तिहासिक घोषणा को मूर्तरूप प्रदान करने के लिये सभी जिला स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। सहकारिता मंत्री ने बताया कि इस कमेटी में संबंधित जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक को समन्वयक तथा जिला इकाई उप रजिस्ट्रार, विषेश लेखा परीक्षक, प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक के सचिव या शाखा प्रबंधक व पैक्स व्यवस्थापक या शाखा सचिव, प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक को सदस्य बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि संबंधित ऋण पर्यवेक्षक एवं शाखा प्रबंधक द्वारा द्वारा सत्यापित पात्र कृषकों की सूची में किसी प्रकार की गलती न रहे इसके लिये जिला स्तरीय कमेटी न्यूनतम 10 प्रतिशत कृषकों की माफ किये जा रहे ऋण का परीक्षण करेगी।
प्रमुख शासन सचिव, सहकारिता श्री अभय कुमारने बताया कि परीक्षित सूचियों में पारदर्शिता बनाये रखने के लिये उक्त कमेटी सहकारी बैंक की शाखा एवं समिति के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करेगी तथा इस संबंध में दैनिक समाचार पत्र में बतौर समाचार भी प्रकाशित करवायेगी। उन्होंने बताया कि यह कमेटी प्रकाशित सूची पर आपत्तियों को प्राप्त कर उनका 7 दिवस में निस्तारण करेगी। कुमार ने बताया कि किसी किसान द्वारा की गई आपत्ति सही पाई जाती है तो समिति उसकी सूचना को तत्काल साफ्टवेयर में अपडेट करवाते हुए तैयार की गई पात्र किसानों की अन्तिम सूची का प्रकाशन करवायेगी। उन्होंने बताया कि अन्तिम सूची के आधार पर सहकारी बैंक की पुस्तकों में माफी योग्य राशि का इन्द्राज कर राज्य सरकार को क्लेम प्रेषित करने का दायित्व जिला स्तरीय कमेटी का होगा।
रजिस्ट्रार, सहकारिता राजन विशाल ने बताया कि समिति जिले में आयोजित होने वाले कर्जमाफी प्रमाण पत्र वितरण शिविरों के संबंध में पर्यवेक्षण करेगी। उन्होंने बताया कि यह समिति योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये समुचित प्रचार-प्रसार की व्यवस्था करेगी।
विशाल ने बताया कि यह समिति परिवेदना निवारण कमेटी के संबंध में सूचना सहकारी बैंक की प्रत्येक शाखा एवं पंचायत समिति कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करवायेगी ताकि कोई भी ऐसा किसान जो जिला स्तरीय कमेटी के समक्ष रखी गई आपत्ति के निस्तारण से संतुष्ट नहीं होने पर परिवेदना निवारण कमेटी के सम्मुख अपना पक्ष प्रस्तुत कर सके।
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