ऑर्गेनिक फूड में है सेहत का खजाना, बीमारियों से मिलता है सुरक्षा चक्र

  • Posted on: 25 October 2018
  • By: admin
नई दिल्ली। ऑर्गेनिक फूड यानी रासायनिक खादों के इस्तेमाल के बिना उपजाया गया खाद्य पदार्थ। पिछले कुछ वर्षों में लोगों का रुझान ऐसे खाद्य पदार्थों की ओर तेजी से बढ़ा है। अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में कीमत ज्यादा होने के बाद भी ज्यादातर लोग इसलिए ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों की ओर रुख कर रहे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि इनके सेवन से सेहत को फायदा होता है।
अधिकतर लोग मानते हैं कि ऐसा खानपान बीमारियों से बचने में मदद करता है। हाल में एक अध्ययन में इस धारणा को पुष्ट करते हुए चौंकाने वाले नतीजे भी मिले हैं। वहीं विशेषज्ञों का बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता। उसका कहना है कि अधूरे अध्ययनों के दम पर लोगों की खानपान की आदत में बदलाव का सुझाव नहीं दिया जाना चाहिए।
ऑर्गेनिक फूड के असर को लेकर ठोस वैज्ञानिक प्रमाण देने वाला कोई शोध अब तक सामने नहीं आया है।
क्या कहता है विज्ञान?
खेतों में उपज बढ़ाने के लिए कई पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल होता है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने इनमें से ग्लाइफोजेट, मेलाथियान और डायजिनॉन को कैंसर का कारक माना है। इसी तरह कुछ रसायन एंडोक्राइन डिसरप्टर होते हैं और एस्ट्रोजन हार्मोन की तरह काम करते हुए प्रतीत होते हैं। इसलिए इन्हें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ाने वाला माना जाता है। रसायनों के इन खतरों को देखते हुए कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑर्गेनिक फूड खुद सीधे-सीधे कोई लाभ ना भी पहुंचाए, तब भी यह ऐसे कई घातक रसायनों से बचाने में मददगार होता है। ऐसे में स्वत: ही कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
विशेषज्ञ नहीं हैं एकमत
ऑर्गेनिक फूड से सेहत पर पडऩे वाले असर को लेकर विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। हार्वर्ड के टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डॉ. फ्रैंक बी. हू ने कहा, प्रायोगिक दृष्टि से देखें तो अध्ययनों के नतीजे बहुत प्रारंभिक स्तर के हैं। केवल इनके आधार पर लोगों को अपने खानपान का तरीका बदलने की सलाह नहीं दी जा सकती। फिलहाल यह कहा जा सकता है कि कैंसर से बचाव चाहते हैं तो फलों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें, वह ऑर्गेनिक हो या नहीं हो। डॉ. फ्रैंक ने इस संबंध में व्यापक शोध की जरूरत पर भी बल दिया।
 
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