ऐसा रहा एपल का सफर, दिवालियापन की कगार से लौटकर बनी 1 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी

  • Posted on: 10 August 2018
  • By: admin
एपल हाल ही में दुनिया की पहली ट्रिलियन डॉलर यानी 1000 करोड़ डॉलर की कंपनी बन गई है। 1976 में स्टीव जॉब्स द्वारा स्थापना के बाद से लेकर आज तक का इसका सफर बेहद रोमांचक और कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा। बीच में तो एक वक्त ऐसा भी आया जब इसके संस्थापक स्टीव जॉब्स को ही कंपनी छोडऩी पड़ी और उसके बाद उन्हीं ने इसे दिवालिया होने से बचाया।
दिवालिया होने की कगार पर आई कंपनी बनी ट्रिलियन डॉलर की
दरअसल, आज जो दिख रहा है उसके पीछे कई डरावनी स्थितियां भी रही हैं। इस कंपनी की स्थापना करने वाले स्टीव जॉब्स जब इसे बाजार में लेकर आए तब इसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर की थी। दस साल बाद ही कुछ ऐसे हालात पैदा हुए कि स्टीव जॉब्स को कंपनी छोडऩी पड़ी।
इसके बाद तो आलम यह हो गया कि एपल दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई। 1997 में माइक्रोसॉफ्ट और दूसरी कंपनियों के सामने एपल का टिक पाना मुश्किल हो रहा था। हालात ये थे कि कंपनी को अपने एक तिहाई कर्मचारी हटाने पड़े। कंपनी के पास सिर्फ 90 दिन का वक्त था।
इसके बाद कंपनी में स्टीव जॉब्स की वापसी हुई और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कंपनी को फिर से पटरी पर लाना। ठीक एक साल बाद उन्होंने आईमैक लॉन्च किया जिसकी अगले कुछ महीनों में 8 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिकीं और इसने कंपनी को बड़ी राहत दी। इस दौरान कंपनी की मार्केट कैप 3 अरब डॉलर था लेकिन 2011 तक यह 350 अरब डॉलर तक पहुंच गया वो भी सिर्फ स्टीव जॉब्स की वजह से। उनके बाद टिम कुक ने इस कंपनी को 1 ट्रिलियन डॉल के मुकाम पर पहुंचाया।
यह थे सफलता के कारण
एपल की सफलता के पीछे कोई एक कारण नहीं रहा। 
आईए नजर डालते हैं इसकी सफलता के पीछे के कारण
ऐसा प्रोडक्ट बने जो खुद के लिए हो
एपल की सफलता में इस मंत्र का बड़ा योगदान रहा है कि कोई भी प्रोडक्ट किसी के लिए बनाने से पहले इसे बनाने वाला को खुद इसकी जरूरत हो। इसका मतलब एपल में कोई इंजीनियर कोई प्रोडक्ट बना रहा है तो वो खुद के लिए बनाता है क्योंकि उसे जरूरत होती है। इनमें स्टीव जॉब्स कंपनी के प्रोडक्ट्स के सबसे प्रमुख यूजर थे। इसके अलावा प्रोडक्ट डिजाइनर को ऐसी चीज बनानी होती थी जिसके बिना वो खुद भी ना रह सके।
यूज करना हो आसान
एपल की सोच हमेशा यही रही कि कोई भी प्रोडक्ट बनाए जाए, वो ऐसा हो जो उपयोग करने में आसान हो। अगर प्रोडक्ट ऐसा नहीं है तो फिर वो बेकार है। इसी सोच के कारण कंपनी का यूजर इंटरफेस डिजाइन पहले दिन से ही यूजर फ्रैंडली रहा।
बेहतर कस्टमर सर्विस-एपल ने हमेशा कोशिश की है कि वो अपने ग्राहकों को बेहतर कस्टमर सर्विस दे। कंपनी का मानना था कि भले ही आप ऐसा प्रोडक्ट बनाएं जो यूज में आसान हो लेकिन उन्हें प्रोडक्ट को यूज करने में कहीं भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है इसके लिए ग्राहक को बेहतर कस्टमर सर्विस मिलनी चाहिए।
आईपॉड के जरिए रिवॉल्यूशन लाए तो वरदान बना आईफोन
एपल ने 2001 में पर्सनल म्यूजिक प्लेयर आईपॉड लॉन्च किया था। स्टीव जॉब्स ने यह चीज उन लोगों के लिए बनाई थी जो सीडी खरीदने के लिए बाजार नहीं जाना चाहते थे।
इसमें 1,000 गाने स्टोर करने की क्षमता और प्ले लिस्ट बनाने जैसी सुविधाएं दी गईं। बाद में जो मॉडल बाजार में उतारे, उनमें फोटो और वीडियो की सुविधा भी दी गई।
इसके अलावा एपल का सबसे बड़ा कदम था आईफोन, स्टीव जॉब्स चाहते थे कि उनकी कंपनी ऐसे प्रोडक्ट बनाए, जिनकी लोग कल्पना भी नहीं कर सकते। 2007 में इसी के तहत एपल ने आईफोन लॉन्च किया, जो उनके लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
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