एनपीए वसूली में तेजी लाने को बैंकों में नया समझौता

  • Posted on: 25 July 2018
  • By: admin
नई दिल्ली। वर्षों पुराने फंसे कर्जे (एनपीए) को कम करने की जद्दोजहद में सोमवार को देश के 22 सार्वजनिक बैंकों, 19 निजी बैंक, 32 विदेशी बैंक और एलआइसी, हुडको, पीएफसी व आरईसी समेत 12 प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने आपस में इंटर क्रेडिटर समझौता (आइसीए) पर हस्ताक्षर किए। समझौते के बाद कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि लगभग समूचे बैंकिंग सिस्टम और प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने आइसीए पर हस्ताक्षर किए हैं।
इससे दशकों से अटके एनपीए खातों का समाधान जल्दी निकल सकेगा। उन्होंने कहा कि आइसीआइसीआइ बैंक समेत बाकी बचे बैंक जल्दी ही अपने निदेशक बोर्ड की मंजूरी के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। आइसीए के प्रारूप को पिछले दिनों गोयल की अध्यक्षता में बैंकों के साथ हुई एक बैठक में मंजूरी दी गई थी जिसका असर यह होगा कि 500 करोड़ रुपये तक के एनपीए की वसूली अब ज्यादा आसानी से होगी। इस समझौते के तहत अगर एनपीए खाताधारक को कर्ज देने वाले बैंकों के कंर्सोटियम में से दो तिहाई के बीच कर्ज वसूली के तरीके पर सहमति बन जाती है तो उसका पालन सभी करेंगे।
इस प्लान की घोषणा गोयल ने भी पिछले दिनों की थी और उम्मीद जताई थी कि इससे 3.10 लाख करोड़ रुपये के बकाए एनपीए के समाधान का रास्ता निकल सकेगा।
वित्त मंत्रालय ने कर्ज वसूली के लिए सशक्त नाम से एक कार्यक्रम की घोषणा की थी और आइसीए भी उसी का हिस्सा है। सशक्त कार्यक्रम के तहत 50 करोड़ रुपये तक के कर्ज की राशि के लिए अलग प्रस्ताव किया गया था। 50 से 500 करोड़ रुपये के लिए आइसीए का प्रावधान किया गया है। इसके प्रस्ताव पर एसबीआई, पीएनबी समेत 18 सरकारी बैंकों व वित्तीय संस्थानों और छह निजी बैंकों ने हस्ताक्षर किए हैं।
इसके बारे में पीएनबी की तरफ से बताया गया है कि कर्ज वसूली का फॉर्मूला लीड बैंक की तरफ से बनाया जाएगा। सनद रहे कि कॉरपोरेट सेक्टर को बड़ी राशि का कर्ज कई बैंक मिलकर उपलब्ध कराते हैं। आमतौर पर जो बैंक सबसे ज्यादा कर्ज देता है, उसे लीड बैंक कहा जाता है।
आइसीए के प्रावधान के मुताबिक 50 से 500 करोड़ रुपये के एनपीए मामलों के निपटारे का प्लान लीड बैंक बनाएगा और इस पर अगर बकाए राशि में से 66 फीसद कर्ज देने वाले बैंक मंजूरी दे देते हैं तो इसे लागू किया जा सकेगा।
अगर कर्ज देने वाले किसी दूसरे बैंक को प्लान पर आपत्ति है तो वह पूरे लोन खाते को खरीद सकता है। लेकिन वह किस शर्त पर खरीदेगा यह पहले ही स्पष्ट होगा। इससे फायदा यह होगा कि एनपीए खातों का निपटारा जल्दी से हो सकेगा। अभी खाते को निपटाने का कोई प्लान बनता है तो उसे कर्ज देने वाले हर बैंक की मंजूरी लेनी होती है। इसमें काफी वक्त लग जाता है।
पीएनबी को सरकार से मिली 2816 करोड़ रुपये की पूंजी-
सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक ने कहा है कि उसे सरकार की ओर से 2816 करोड़ रुपये की पूंजी मिल गई है। प्रिफरेंशियल इक्विटी शेयर आवंटन के लिए यह पूंजी दी गई है। बैंक ने रेगुलेटरी फाइलिंग में जानकारी दी कि वित्तीय सेवा विभाग की अधिसूचना के अनुरूप उसे केंद्रीय सरकार से पूंजी मिल गई है। रेगुलेटरी मंजूरी मिलने के बाद वह सरकार को शेयर जारी करेगा।
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